Sunday, August 24, 2008

मैया मैं नहीं माखन खायो




माखन चोर कन्हैया की शिकायत जब यशोदा से होती है तब कृष्ण जी कहते हैं कि मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो। जब मैया और सख्ती से पेश आती हैं तो वह कहने लगते हैं कि मैया मोरी मैं ने ही माखन खायो। यह तो तय था कि चोरी छिप नहीं सकेगी क्योंकि मुंह पर माखन लगा हुआ था और माखन खाते हुए पकड़कर मां यशोदा के पास लाया गया था। आज इन्हीं का जन्म है, जिसे जन्माष्टमी के नाम से पूरा देश जानता है। विशेषकर मथुरा में जहां पर पैदा हुए थे, वह जगह थी मथुरा नरेश कंस की जेल, जहां पर कंस की बहिन देवकी ने नवीं संतान के रूप में कृष्ण को जन्म दिया था। आज न सिर्फ मथुरा बल्कि हिंदुस्तान के प्रमुख मंदिरों को सजाया जाता है और रात के ठीक बारह बजे मंदिरों की घंटियां बजने लगती हैं और पूरा वातावरण ही कृष्णमय हो जाता है। लोगों की भीड़ अपने आप खिची चली आती है। वह तो विष्णु के अवतार थे। पृथ्वी पर जन्म लेने का मकसद तभी होता है जब धर्म का पतन होने लगता है। अन्याय की जड़ें मजबूत होने लगती हैं, तब भगवान को पृथ्वी पर मानव के रूप में जन्म लेना पड़ता है न्याय और धर्म का पालन न करने वालों को खातमें के लिए। कंस ने भी यही किया था। था तो उनका भांजा, लेकिन धर्म और न्याय से बड़ा पारिवारिक संबंध नहीं होता। दुष्ट कंस को मौत की सजा दी। न सिर्फ मथुरा बल्कि गोकुल, बृंदावन, नंदगांव में बाल लीलाओं का प्रदर्शन किया। प्रेम के इतने भूखे थे कि आदमी क्या पशु भी उनके तरफ खिंचे चले आते थे। मीराबाई ने तो यहां तक कह दिया था कि मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोय। ऐसे प्रभु को मैं आज उनके जन्म दिवस पर शत-शत बार नमन करते हैं।

1 comment:

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

bahut sundar abhivyakt. janamashtmi ki hardik shubhakamana .