Saturday, August 2, 2008

आतंक के साए में सार्क सम्मेलन

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) के दो दिवसीय सम्मेलन की शुरूआत ही विवाद से हुई है। कोलंबों में सम्मेलन के लिए बनाए गए प्रवेश द्वार के ठीक बीच में लगा भारत का झंडा उल्टा छपा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीर के ठीक ऊपर छपे देश के राष्ट्रीय ध्वज में हरा रंग ऊपर है जबकि केसरिया रंग नीचे है। सम्मेलन के आयोजकों की ओर से की गयी यह एक बड़ी भूल है, इस पर उन्हें क्षमा अवश्य मांगनी चाहिए। कुछ इसी तरह की एक घटना और घटी थी जब मुशर्रफ भारत के दौरे पर आए थे और उनके जहाज पर भारत का झंडा उल्टा लगा था। यह ऐसी भूल हैं जिससे पता चलता है कि झंडा लगाते वक्त यह नहीं देखा जाता है कि झंडा सही लगा भी है कि नहीं। यह एक लापरवाही ही है।सार्क सम्मेलन में प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपनी जमीन से आतंकवाद को जड़ से समाप्त करें। सभी जानते हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह ही नहीं देता है बल्कि प्रशिक्षण भी देता है। इसलिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद को सबसे बड़ा खतरा बताया है। मौजूदा दौर में आतंकवाद ने दुनिया भर में अपनी पैठ बना ली है। आतंकवाद से लड़ने के लिए सभी देशों को एकजुट होना पड़ेगा। दक्षेस देशों में बने खुला व्यापार क्षेत्र, आतंकवाद के खात्मे के लिए संयुक्त कार्रवाई बल का गठन, आपराधिक मामलों पर आपसी कानूनी सहयोग सम्बन्धी समझौता होना चाहिए। सार्क सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने काबुल में पिछले महीने भारतीय दूतावास पर हुए हमले और भारत में बंगलौर और अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों का मुद्दा उठाया उठाकर सराहनीय कार्य किया है।

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