Wednesday, September 17, 2008

पाटिल के 'पर' कटेंगे पर उड़ते रहेंगे


देश में इस समय आतंकवाद से निपटने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही तरफ से बहस छिड़ गई है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष कोई नया कानून नहीं लाना चाहती है, जबकि सरकार द्वारा बनाई गई मोइली समिति ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए देश का मौजूदा कानून काफी नहीं है। नया कानून बनाने का सुझाव दिया है। लालू ने भी सुरक्षा को लेकर सरकार पर हमला बोला। मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने तो यहां तक कह डाला कि आगामी लोक सभा के चुनाव में यदि पार्टी सत्ता में आती है तो एक सौ दिन के अंदर पोटा कानून लागू कर दिया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह भी वह सूत्र अपनाने जा रहे हैं कि लाठी भी न टूटे और सांप भी मर जाए, अर्थात केंद्रीय गृह मंत्रालय को खंडित कर देश की सुरक्षा का भार उसी मंत्रालय के अधीन होगा। उस मंत्रालय का नाम होगा आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय। इससे एक लाभ अवश्य होगा कि शिवराज पाटिल गृह मंत्री बने भी रहेंगे, उनके पर भी कट जाएंगे और आंतरिक सुरक्षा को लेकर जो आवाज उठी है वह दब भी जाएगी। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो फिर आगामी संसद के मानसून सत्र में सदन में विपक्षी लोग हंगामा खड़ा कर देंगे। शायद इसीलिए सरकार को अक्ल आयी कि इस मामले को पहले ही निपटा लिया जाए। आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय को पाने के लिए अभी से दौड़ भी शुरू हो चुकी है। अभी तक इस दौड़ में स्टील राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और रक्षा राज्य मंत्री पल्लम राजू शामिल हैं।

1 comment:

संजय तिवारी said...

हेडिंग औऱ सूचना दोनों ही अच्छे.