Saturday, September 6, 2008

भारत को मिली ऐतिहासिक सफलता


भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार से जुड़े अमेरिका परमाणु करार अधिनियम 1954 की धारा 123 में इस बात का उल्लेख है कि अमेरिका उन्हीं देशों से परमाणु करार करेगा जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हों। जबकि भारत परमाणु अप्रसार संधि से बहुत दूर है। लेकिन भारत की खास बात रही है कि उसने परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांति के क्षेत्र में किया है। भारत शुरू से ही एक शांति प्रिय देश है। भारत को विएना में अंतरराष्ट्रीय मंच पर आज एक ऐतिहासिक सफलता मिली जब परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देश समूह (एनएसजी) ने भारत के खिलाफ पिछले 30 वर्षो से लगे प्रतिबंध हटा लिए। एनएसजी की बैठक में 45 सदस्यीय संस्था ने आज अमेरिका के उस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया जिसमें भारत पर लगी पाबंदियों को हटाने का प्रावधान है। चीन, न्यूजीलैंड और आस्ट्रिया सहित कुछ देशों के विरोध को पार करते हुए भारत ने एनएसजी का समर्थन हासिल किया। एनएसजी के फैसले के बाद भारत अब असैन्य परमाणु कारोबार में शिरकत कर सकेगा। सन् 1974 में पोखरण परमाणु विस्फोट के चार साल बाद सन् 1978 में भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाये गये थे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के लिए जुलाई 2005 में हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को अमल में लाने के लिए एनएसजी की सहमति अनिवार्य थी जो आज हासिल हो गयी। भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु बाजार में प्रवेश दिलाने की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की लम्बी मुहिम आज सफल रही जब परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देश समूह ने भारत पर लगे प्रतिबंध हटा लिए। एनएसजी की तीन दिन तक चली जद्दोजहद भरी बैठक में गतिरोध और ऊहापोह के बावजूद भारत ने यह महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। एनएसजी की हरी झंडी के बाद परमाणु क्षेत्र में भारत का अलगाव खत्म हो गया तथा उसे परमाणु ऊर्जा, सामग्री और तकनीक के आदान-प्रदान का अधिकार हासिल हो गया।भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते का अब केवल एक चरण शेष है जिसेमं अमेरिकी कांग्रेस को इस समझौते का अनुमोदन करना है। भारत अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए)के साथ निगरानी समझौता पहले ही कर चुका है।1968 में भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर इस आधार पर हस्ताइार करने से इंकार कर दिया कि यह भेदभावपूर्ण है। 18 मई 1974 को भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया। 10 मार्च 1978 को अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने परमाणु अप्रसार अधिनियम पर हस्ताक्षर कर भारत को परमाणु सहायता बंद कर दी गई। 11 व 13 मई 1998 को भारत ने पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए।34 साल तक प्रतिबंधों की काली रात के बाद भारत के लिए आज तब परमाणु सवेरा हुआ जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु जगत में भारत के अलगाव को दूर करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के साथ जुलाई 2005 में भारत-अमेरिका असैन्य सहयोग समझौता किया था। इस समझौते के एक महत्वपूर्ण चरण में 45 सदस्यीय परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देश समूह ने आज भारत से परमाणु प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। समझौते की अंतिम औपचारिकता के रूप में अब अमेरिकी कांग्रेस इस पर इसी महीने विचार करेगी तब उसके अनुमोदन के बाद यह समझौता अमल में आएगा।

2 comments:

रंजन said...

ये मील का पत्थर साबित होगा..

safat alam taimi said...

धन्यवाद