Tuesday, January 13, 2009

मकर संक्रान्ति पर्व के साथ गणेश चतुर्थी भी

इस बार चौदह जनवरी को मकर संक्रान्ति पर्व के साथ ही माघकृष्ण गणेश चतुर्थी भी है और दोनों पर्वो के इस अनूठे समागम को शुभ माना गया है। जिस राशि में सूर्य की कक्षा का परिवर्तन होता है उसे संक्रान्ति कहा जाता है। क्ब् जनवरी को सूर्य का धन राशि से हटकर मकर राशि में प्रवेश होता है, इसी से इसको मकर संक्रान्ति कहा जाता है। इस दिन से भगवान भुवन भास्कर का संचरण उत्तर की ओर होने लगता है। मकर संक्रान्ति से मिथुन राशि की संक्रान्ति तक के छ: महीनों का काल उत्तरायण कहा जाता है और कर्क राशि से धनुराशि तक सूर्य के संचरण का काल दक्षिणायन है। इसमें सूर्य का दक्षिण की ओर संचरण होता हैं। मकर संक्रान्ति ज्यादातर क्ब् जनवरी को ही पड़ती है। संयोगवश इसी दिन माघ कृष्ण चतुर्थी भी है जो अनूठा संयोग है। यह श्री गणेश चौथ के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन गणेश चौथ की व्रत करने वाली महिलायें चन्द्रदेव को अ‌र्घ्य प्रदान करती हैं। मकर संक्रान्ति पर्व के महत्व को गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम चरित मानस में अभिव्यक्त किया है- माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।

3 comments:

pintu said...

बिल्कुल सही कहा आपने!

संगीता पुरी said...

आपको दोनो पर्वों की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

Udan Tashtari said...

बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं.