Thursday, September 3, 2009

राजशेखर रेड्डी एक करिश्माई राजनेता थे


चमत्कार की उम्मीदें, उम्मीदें ही रह गईं और बुरी आशकाएं हकीकत बन गईं। हेलिकॉप्टर हादसे में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई। एस. राजशेखर रेड्डी की मौत हो गई। उनके साथ हेलिकॉप्टर में हैदराबाद से चित्तूर के लिए रवाना हुए चार अन्य लोगों की भी लाशें मिल गई हैं। इस बीच आंध्र प्रदेश के मौजूदा वित्त मंत्री के. रोसैया को राज्य का कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाया गया है। हादसे में मुख्यमंत्री के साथ जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें प्रधान सचिव सुब्रमण्यम , मुख्य सुरक्षा अधिकारी ए . एस . सी . वेसले , पायलट कैप्टन एस . के . भाटिया और सह-पायलट कैप्टन एम . एस . रेड्डी शामिल हैं। रेड्डी का शव हैदराबाद आज ही लाया जाएगा और पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। वाईएसआर रेड्डी का अंतिम संस्कार कडप्पा जिले में मौजूद उनके पैतृक गांव पुलिवेंदुला में शुक्रवार को किया जाएगा। बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे से ही मुख्यमंत्री का हेलिकॉप्टर लापता था और उसके बाद भारत में अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। करीब 24 घंटे बाद गुरुवार सुबह वायु सेना की टीम को कुर्नूल से करीब 75 किलोमीटर पूरब में पहाड़ी पर हेलिकॉप्टर का मलबा मिला और थोड़ी ही देर में पांचों शव भी मिल गए।

जब आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू आईटी के रथ पर सवार होकर प्रदेश में विकास की बयार बहाने का दावा कर रहे थे , डॉक्टर येदुगुड़ी सन्दिंती राजशेखर रेड्डी उर्फ वाईएसआर ने गांव , खेत और किसानों की हिमायत की। समग्र विकास की उनकी इस अवधारणा का ही नतीजा था कि सन् 2004 में आंध्र प्रदेश पार्टी सत्ता में आई और वह मुख्यमंत्री बने। पांच साल मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने विकास के अपने इस दर्शन को कभी नहीं छोड़ा और समाज के दबे कुचले व उपेक्षित तबके की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के जरिए राजनीति की दुनिया में खुद के लिए एक असाधारण स्थान बनाया।

डॉक्टर रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1949 को पिछड़ा माने जाने वाले रायलसीमा क्षेत्र के पुलिवेंदुला में हुआ था। वाईएस राजा रेड्डी के पुत्र डॉक्टर रेड्डी ने अपने स्टूडेंट लाइफ के दिनों से ही राजनीति में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। जब वह एम । आर . मेडिकल कॉलेज , गुलमर्गा , कर्नाटक में पढ़ाई कर रहे थे तो स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने। एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए जम्मलमडुगु मिशन हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम किया।

1973 में उन्होंने अपने पिता वाईएस राजा रेड्डी के नाम पर पुलिवेंदुला में 70 बेड वाला एक चैरिटी हॉस्पिटल भी खोला। उनके परिवार ने पुलिवेंदुला में एक पॉलिटेक्निक और एक डिग्री कॉलेज बनाया , जिन्हें बाद में प्रतिष्ठित लोयोला ग्रुप को सौंप दिया गया। डॉक्टर रेड्डी में एक बिजनेस मैन के गुण भी थे और उनकी उद्यमी कुशलताओं के साथ - साथ उनके भीतर मौजूद पारदर्शिता ने उन्हें बिजनेस की दुनिया में भी स्थापित किया। डॉक्टर रेड्डी को जनसेवा का जज्बा विरासत में मिला और उन्होंने इसी जज्बे के तहत राजनीति में 1978 में प्रवेश किया। वह चार बार राज्य विधान सभा के सदस्य रहे और चार बार ही लोकसभा के लिए भु चुने गए। डॉक्टर रेड्डी ने राज्य विधान सभा या संसद के जितने भी चुनाव लड़े , उन सभी में उन्होंने जीत हासिल की। अपने 25 वर्ष के राजनीतिक करियर में डॉक्टर रेड्डी ने अनेक भूमिकाओं में जनसेवा की है। वह 1983 से लेकर 1985 तक और फिर 1998 से लेकर 2000 तक आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रहे। मुख्यमंत्री बनने से पहले वह कई विभागों के मंत्री भी रहे। डॉक्टर रेड्डी ने वर्ष 2003 में 1500 किलोमीटर की पदयात्रा करके आम लोगों की समस्याओं को उनकी ही भाषा में जानने - समझने की कोशिश की थी तब से वह काफी लोकप्रिय हो गए थे। उनका मानना था कि चूंकि देश की लगभग 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ज्यादा प्रयास होने चाहिए।

1 comment:

अर्शिया said...

ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे।
( Treasurer-S. T. )