दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस के सीनियर नेता नारायण दत्त तिवारी को एक युवक के दावे की सचाई का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया है। युवक ने दावा किया था कि वह तिवारी का बॉयोलॉजिकल (जैविक) पुत्र है।
गौरतलब है कि पूर्व केंदीय मंत्री शेर सिंह के 29 साल के नाती रोहित शेखर दिल्ली हाई कोर्ट में मामला दायर कर कहा है कि वह तिवारी और अपनी मां उज्ज्वला सिंह के बीच रहे संबंधों से पैदा हुआ, जो खुद भी कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई हैं। इस बारे में उज्ज्वला का कहना है कि तिवारी द्वारा रोहित को अपना बेटा मानने से इनकार कर देने पर उसे दिल्ली हाइ कोर्ट जाना पड़ा।
इसके पहले नारायण दत्त तिवारी को दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है था। अदालत ने उनसे जवाब मांगा है कि उनका बॉयोलॉजिकल(जैविक) पुत्र होने का दावा करने वाले रोहित शेखर के आरोप की सत्यता का पता लगाने के लिए क्यों नहीं उनका डीएनए टेस्ट करवाया जाए।
Thursday, December 23, 2010
Wednesday, December 22, 2010
प्याज में तेजी से सरकार की आंखों में आंसू
प्याज के दाम में आई तेजी से केंद्र सरकार पसोपेश में हैं। उसे समझ नहीं आ रहा है कि अचानक प्याज की कीमतों में आए उछाल को किस तरह कम किया जाए। नैफेड के एक उच्चाधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि हमारी तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि प्याज के रेट एकदम इतने कैसे बढ़ गए।
इधर, प्याज के मामले में सरकार में एकमत नजर नहीं आया। यूपीए के कई सीनियर कैबिनेट मंत्रियों ने शरद पवार के इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया कि प्याज में तेजी बरसात में फसल खराब हो जाने के कारण आई है। इन मंत्रियों का मानना है कि पवार के इस बयान से लोगों में यह संदेश गया है कि सरकार ने सब कुछ बाजार पर छोड़ दिया है।
इस मामले में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत की है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय को पत्र लिखकर कारगर कदम उठाने को कहा। इसके अलावा, खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय से प्याज की पैदावार, सप्लाई और निर्यात के आंकड़े भी मांगे गए हैं ताकि पता लगाया जा सके कि आखिर प्याज की सप्लाई में इतनी कमी कैसे आ गई।
प्रणव मुखर्जी भी इस बात का जवाब चाहते हैं कि प्याज की सप्लाई अचानक इतनी कम कैसे हो गई। वह इस मामले में तुरंत उपाय करने के पक्षधर हैं। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और गृह मंत्री पी. चिदंबरम भी मानते हैं कि सरकार को जल्द कुछ कारगर कदम उठाकर लोगों को यह संदेश देना चाहिए कि उसका मैनेजमेंट विफल नहीं हुआ है। सिर्फ डिमांड और सप्लाई की बात कहकर हालात को टाला नहीं जा सकता। यह देखना होगा कि डिमांड और सप्लाई में आखिर इतना अंतर कैसे आ गया है। हालांकि प्रणव ने साफ कहा कि कोशिश करनी होगी कि प्याज की डिमांड और सप्लाई के बीच के अंतर को किस तरह से भरा जाए। मैं इस सिलसिले में संबंधित मंत्रालय से बात करूंगा।
इधर, खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय का मानना है कि पिछले कई दिनों से प्याज की डिमांड और सप्लाई में 18 से 20 पर्सेंट की कमी चली रही थी। मगर यह कमी अचानक 40 से 50 पर्सेंट हो जाएगी, इसका अनुमान नहीं था। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जहां तक बरसात के कारण प्याज की फसल बर्बाद होने का मामला है, सिर्फ 20-22 पर्सेंट फसल बर्बाद हुई है। अब यह पता करने की जरूरत है कि आंकड़ा 22 से बढ़कर 40 पर्सेंट कब और कैसे पहुंच गया। इसके कारण प्याज की सप्लाई एकदम कम हुई और दाम अचानक बढ़ गए।
इधर, प्याज के मामले में सरकार में एकमत नजर नहीं आया। यूपीए के कई सीनियर कैबिनेट मंत्रियों ने शरद पवार के इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया कि प्याज में तेजी बरसात में फसल खराब हो जाने के कारण आई है। इन मंत्रियों का मानना है कि पवार के इस बयान से लोगों में यह संदेश गया है कि सरकार ने सब कुछ बाजार पर छोड़ दिया है।
इस मामले में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत की है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय को पत्र लिखकर कारगर कदम उठाने को कहा। इसके अलावा, खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय से प्याज की पैदावार, सप्लाई और निर्यात के आंकड़े भी मांगे गए हैं ताकि पता लगाया जा सके कि आखिर प्याज की सप्लाई में इतनी कमी कैसे आ गई।
प्रणव मुखर्जी भी इस बात का जवाब चाहते हैं कि प्याज की सप्लाई अचानक इतनी कम कैसे हो गई। वह इस मामले में तुरंत उपाय करने के पक्षधर हैं। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और गृह मंत्री पी. चिदंबरम भी मानते हैं कि सरकार को जल्द कुछ कारगर कदम उठाकर लोगों को यह संदेश देना चाहिए कि उसका मैनेजमेंट विफल नहीं हुआ है। सिर्फ डिमांड और सप्लाई की बात कहकर हालात को टाला नहीं जा सकता। यह देखना होगा कि डिमांड और सप्लाई में आखिर इतना अंतर कैसे आ गया है। हालांकि प्रणव ने साफ कहा कि कोशिश करनी होगी कि प्याज की डिमांड और सप्लाई के बीच के अंतर को किस तरह से भरा जाए। मैं इस सिलसिले में संबंधित मंत्रालय से बात करूंगा।
इधर, खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय का मानना है कि पिछले कई दिनों से प्याज की डिमांड और सप्लाई में 18 से 20 पर्सेंट की कमी चली रही थी। मगर यह कमी अचानक 40 से 50 पर्सेंट हो जाएगी, इसका अनुमान नहीं था। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जहां तक बरसात के कारण प्याज की फसल बर्बाद होने का मामला है, सिर्फ 20-22 पर्सेंट फसल बर्बाद हुई है। अब यह पता करने की जरूरत है कि आंकड़ा 22 से बढ़कर 40 पर्सेंट कब और कैसे पहुंच गया। इसके कारण प्याज की सप्लाई एकदम कम हुई और दाम अचानक बढ़ गए।
Tuesday, December 21, 2010
प्याज की कीमतों पर पवार की खिंचाई
प्याज की बढ़ी हुई कीमतों ने आम लोगों के साथ-साथ यूपीए सरकार के कर्णधारों के भी पसीने छुड़ा दिए हैं। प्रधानमंत्री के ऑफिस ने शरद पवार के मंत्रालय की खिंचाई करते हुए पूछा है कि एक सप्ताह में प्याज का थोक मूल्य दोगुना कैसे हो गया। साथ ही प्याज की कीमतों को जल्द से जल्द घटाने के लिए उपाय करने को कहा गया है।
पीएमओ की ओर से उपभोक्ता मामलों और कृषि मंत्रालय के सचिवों को भेजी चिट्ठी में मनमोहन ने प्याज की कीमतों में अचानक आए बेहतहाशा उछाल पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि प्याज की कीमतों में बेतहाशा तेजी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं, जिससे इसे उचित स्तर पर लाया जा सके। प्रधानमंत्री ने तेजी से कदम उठाने और इनकी रोजाना के आधार पर निगरानी के निर्देश दिए हैं।
इस बीच, कृषि मंत्री शरद पवार का ने कहा है कि प्याज की कीमतों में कमी आने में दो-तीन सप्ताह का समय लगेगा।
पीएमओ की ओर से उपभोक्ता मामलों और कृषि मंत्रालय के सचिवों को भेजी चिट्ठी में मनमोहन ने प्याज की कीमतों में अचानक आए बेहतहाशा उछाल पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि प्याज की कीमतों में बेतहाशा तेजी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं, जिससे इसे उचित स्तर पर लाया जा सके। प्रधानमंत्री ने तेजी से कदम उठाने और इनकी रोजाना के आधार पर निगरानी के निर्देश दिए हैं।
इस बीच, कृषि मंत्री शरद पवार का ने कहा है कि प्याज की कीमतों में कमी आने में दो-तीन सप्ताह का समय लगेगा।
100 रुपए तक महंगी हो सकती है एलपीजी
तेल मंत्रालय बहुत जल्द आपके किचेन का बजट बढ़ा सकता है। अगस्त के बाद से रसोई गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई 66 फीसदी की बढ़ोतरी के मद्देनजर मंत्रालय कुकिंग गैस के हर सिलिंडर पर 50-100 रुपए बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के राजनीतिक असर पर विचार-विमर्श करने के बाद सरकार अगले बुधवार को इस पर आखिरी फैसला लेगी। दरअसल, अगले साल इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के 20,000 करोड़ रुपए का एफपीओ जारी होने से पहले सरकार कंपनी के बहीखाते को मजबूत करना चाहती है।
अगस्त से अब तक एलपीजी के अंतरराष्ट्रीय दाम में दो-तिहाई की तेजी आ चुकी है, जिसका असर घरेलू तेल कंपनियों के बहीखाते पर पड़ा है, क्योंकि देश में सालाना 30 लाख टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलपीजी) आयात किया जाता है। इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने बताया कि अगले साल 1 जनवरी से प्रति सिलिंडर सब्सिडी का बोझ बढ़कर 367 रुपए हो जाएगा है, जो राजधानी में सिलिंडर के मौजूदा रीटेल भाव 345.35 रुपए से भी ज्यादा है।
अधिकारियों ने बताया कि तेल मंत्रालय 22 दिसंबर को होने वाली बैठक में मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह (ईजीओएम) से एलपीजी की कीमत बढ़ाने की अनुमति लेगा। उम्मीद है कि इस बैठक में डीजल के दाम बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'हम यह नहीं बता सकते हैं कि कुकिंग गैस और डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी, क्योंकि इस पर ईजीओएम ही फैसला लेगा।' ईजीओएम का फैसला आखिरी होगा क्योंकि इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत नहीं है।
पूर्वी एशिया में एलपीजी का सबसे ज्यादा उपभोग भारत में होता है और इसकी आपूर्ति के लिए सालाना 30 लाख टन कुकिंग गैस का आयात किया जाता है। तेल मंत्रालय की शाखा पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान देश में एलपीजी की मांग 1.40 करोड़ टन रहेगी। देश के एलपीजी उपभोग में सालाना 5-8 फीसदी की बढ़ोतरी होने से आयातित एलपीजी पर देश की निर्भरता बढ़ रही है। सरकारी तेल कंपनियां नई दिल्ली में 345.35 रुपए प्रति सिलिंडर बेच रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव की तुलना में सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू बाजार में एलपीजी सिलिंडर की बिक्री पर 1 जनवरी से 367 रुपए का घाटा होगा, क्योंकि अगले महीने से आयात और महंगा होने वाला है।
सरकारी तेल कंपनियों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया कि अगले महीने से वे किस कीमत पर एलपीजी कार्गो आयात कर रही हैं। उनका कहना है कि यह गोपनीय है। नाम जाहिर न करने की शर्त पर सरकारी तेल कंपनियों के एक विश्लेषक ने कहा कि इस साल अगस्त में वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमत 600 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 1,000 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो गई है और अभी भी इसमें तेजी जारी है। पिछले हफ्ते तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 3 रुपए का इजाफा किया था, लेकिन उन्हें डीजल, कुकिंग गैस और केरोसन की कीमतें बढ़ाने की छूट नहीं है।
अगस्त से अब तक एलपीजी के अंतरराष्ट्रीय दाम में दो-तिहाई की तेजी आ चुकी है, जिसका असर घरेलू तेल कंपनियों के बहीखाते पर पड़ा है, क्योंकि देश में सालाना 30 लाख टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलपीजी) आयात किया जाता है। इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने बताया कि अगले साल 1 जनवरी से प्रति सिलिंडर सब्सिडी का बोझ बढ़कर 367 रुपए हो जाएगा है, जो राजधानी में सिलिंडर के मौजूदा रीटेल भाव 345.35 रुपए से भी ज्यादा है।
अधिकारियों ने बताया कि तेल मंत्रालय 22 दिसंबर को होने वाली बैठक में मंत्रियों के अधिकारप्राप्त समूह (ईजीओएम) से एलपीजी की कीमत बढ़ाने की अनुमति लेगा। उम्मीद है कि इस बैठक में डीजल के दाम बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'हम यह नहीं बता सकते हैं कि कुकिंग गैस और डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी, क्योंकि इस पर ईजीओएम ही फैसला लेगा।' ईजीओएम का फैसला आखिरी होगा क्योंकि इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत नहीं है।
पूर्वी एशिया में एलपीजी का सबसे ज्यादा उपभोग भारत में होता है और इसकी आपूर्ति के लिए सालाना 30 लाख टन कुकिंग गैस का आयात किया जाता है। तेल मंत्रालय की शाखा पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान देश में एलपीजी की मांग 1.40 करोड़ टन रहेगी। देश के एलपीजी उपभोग में सालाना 5-8 फीसदी की बढ़ोतरी होने से आयातित एलपीजी पर देश की निर्भरता बढ़ रही है। सरकारी तेल कंपनियां नई दिल्ली में 345.35 रुपए प्रति सिलिंडर बेच रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव की तुलना में सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू बाजार में एलपीजी सिलिंडर की बिक्री पर 1 जनवरी से 367 रुपए का घाटा होगा, क्योंकि अगले महीने से आयात और महंगा होने वाला है।
सरकारी तेल कंपनियों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया कि अगले महीने से वे किस कीमत पर एलपीजी कार्गो आयात कर रही हैं। उनका कहना है कि यह गोपनीय है। नाम जाहिर न करने की शर्त पर सरकारी तेल कंपनियों के एक विश्लेषक ने कहा कि इस साल अगस्त में वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमत 600 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 1,000 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो गई है और अभी भी इसमें तेजी जारी है। पिछले हफ्ते तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 3 रुपए का इजाफा किया था, लेकिन उन्हें डीजल, कुकिंग गैस और केरोसन की कीमतें बढ़ाने की छूट नहीं है।
Thursday, December 16, 2010
Monday, November 8, 2010
ओबामा ने बोला, जय हिंद
महात्मा गांधी के रंग में रंगे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को भारत की संसद में राष्ट्रपति बनकर खड़े होने का श्रेय ही राष्ट्रपिता को दे दिया और धन्यवाद से लेकर जय हिंद तक के नारे से देश का दिल जीत लिया।
अपने भाषण के अंत में तो ओबामा सीधे भारतीय जनता से संवाद करने लगे और उनसे कहने लगे कि उन्हें अपना मुस्तकबिल खुद तय करना होगा और इस सफर में अमेरिका उन्हें अपना अपरिहार्य सहयोगी मानता है। पूरे भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी को केंद्र में रखा और उनके प्रेम और अहिंसा के संदेश तथा इंसाफ के लिए अहिंसा का अस्त्र उठाने को अपनी मूल प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि युवा मार्टिन लूथर किंग भारत आकर आपके राष्ट्रपिता के यही सिद्धांत लेकर गए थे और अगर मैं आज राष्ट्रपति बनकर आपके सामने खड़ा हूं तो यह उसी प्रेरणा का परिणाम है।
अपने भाषण की शुरुआत ही उन्होंने भारतीयों से मिले आतिथ्य के लिए बहुत धन्यवाद कहते हुए की और जय हिंद से जब उन्होंने अपना भाषण समाप्त किया तो संसद के गुम्बद तालियों से देर तक गूंजते रहे। शून्य से लेकर सूचना टेक्नोलॉजी और ई-पंचायत से लेकर सूचना के अधिकार तक ओबामा भारत की सभ्यता विविधता की शक्ति और सभी को साथ लेकर लोकतांत्रिक ढंग से प्रगति करने की अगाध प्रशंसा करते रहे।
ओबामा ने कहा कि मैं हर भारतीय नागरिक से कहना चाहता हूं कि आपकी प्रगति के सफर में अमेरिका सिर्फ दूर खड़े होकर तालियां नहीं बजाएगा। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहूंगा। हमें इस भारत के भविष्य पर यकीन है और हमें इस बात पर भी भरोसा है कि भविष्य वैसा ही बनता है जैसा हम बनाना चाहते हैं।
स्वामी विवेकानंद से लेकर संविधान निर्माता भीमराव अम्बेडकर तक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि हम कहीं भी रहते हों और कहीं से भी आते हों पर हम अपनी ईश्वर प्रदत्त क्षमताओं को साकार कर सकते हैं जैसे डा अम्बेडकर जैसे दलित नेताओं ने खुद को ऊपर उठाया और भारत का संविधान लिखा।
उन्होंने कहा कि हमारा यह भी मानना है कि हम कहीं भी रहते हों। भले ही वह पंजाब का कोई गांव हो या चांदनी चौक की कोई गली में रहता हो या कोलकाता की पुरानी सड़कों का बाशिंदा हो या बेंगलूर की ऊंची इमारत में रहता हो। हर किसी को सुरक्षा और शान से जीने का अधिकार है। शिक्षा और काम हासिल करने और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने का अधिकार है।
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि भारत और अमेरिका की कहानी एक है और वह यह है कि अपने मतभेदों के बावजूद सब मिलकर काम कर सकते हैं और सफल होकर गौरवशाली राष्ट्र बन सकते हैं। और आखिरी शब्दों तक ओबामा ने संसद को मंत्रमुग्ध किया। जब उन्होंने जय हिंद कहकर भाषण का समापन किया तो संसद के गुम्बद विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका की दोस्ती अमर रहे।
अपने भाषण के अंत में तो ओबामा सीधे भारतीय जनता से संवाद करने लगे और उनसे कहने लगे कि उन्हें अपना मुस्तकबिल खुद तय करना होगा और इस सफर में अमेरिका उन्हें अपना अपरिहार्य सहयोगी मानता है। पूरे भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी को केंद्र में रखा और उनके प्रेम और अहिंसा के संदेश तथा इंसाफ के लिए अहिंसा का अस्त्र उठाने को अपनी मूल प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि युवा मार्टिन लूथर किंग भारत आकर आपके राष्ट्रपिता के यही सिद्धांत लेकर गए थे और अगर मैं आज राष्ट्रपति बनकर आपके सामने खड़ा हूं तो यह उसी प्रेरणा का परिणाम है।
अपने भाषण की शुरुआत ही उन्होंने भारतीयों से मिले आतिथ्य के लिए बहुत धन्यवाद कहते हुए की और जय हिंद से जब उन्होंने अपना भाषण समाप्त किया तो संसद के गुम्बद तालियों से देर तक गूंजते रहे। शून्य से लेकर सूचना टेक्नोलॉजी और ई-पंचायत से लेकर सूचना के अधिकार तक ओबामा भारत की सभ्यता विविधता की शक्ति और सभी को साथ लेकर लोकतांत्रिक ढंग से प्रगति करने की अगाध प्रशंसा करते रहे।
ओबामा ने कहा कि मैं हर भारतीय नागरिक से कहना चाहता हूं कि आपकी प्रगति के सफर में अमेरिका सिर्फ दूर खड़े होकर तालियां नहीं बजाएगा। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहूंगा। हमें इस भारत के भविष्य पर यकीन है और हमें इस बात पर भी भरोसा है कि भविष्य वैसा ही बनता है जैसा हम बनाना चाहते हैं।
स्वामी विवेकानंद से लेकर संविधान निर्माता भीमराव अम्बेडकर तक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि हम कहीं भी रहते हों और कहीं से भी आते हों पर हम अपनी ईश्वर प्रदत्त क्षमताओं को साकार कर सकते हैं जैसे डा अम्बेडकर जैसे दलित नेताओं ने खुद को ऊपर उठाया और भारत का संविधान लिखा।
उन्होंने कहा कि हमारा यह भी मानना है कि हम कहीं भी रहते हों। भले ही वह पंजाब का कोई गांव हो या चांदनी चौक की कोई गली में रहता हो या कोलकाता की पुरानी सड़कों का बाशिंदा हो या बेंगलूर की ऊंची इमारत में रहता हो। हर किसी को सुरक्षा और शान से जीने का अधिकार है। शिक्षा और काम हासिल करने और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने का अधिकार है।
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि भारत और अमेरिका की कहानी एक है और वह यह है कि अपने मतभेदों के बावजूद सब मिलकर काम कर सकते हैं और सफल होकर गौरवशाली राष्ट्र बन सकते हैं। और आखिरी शब्दों तक ओबामा ने संसद को मंत्रमुग्ध किया। जब उन्होंने जय हिंद कहकर भाषण का समापन किया तो संसद के गुम्बद विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका की दोस्ती अमर रहे।
ओबामा ने भारत को दिया लोलीपॉप
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के भारत के दावे का सोमवार को पुरजोर समर्थन किया तथा पाकिस्तान को उसकी सरजमीं पर आतंकवादी अड्डों को नष्ट करने और मुंबई हमलों के दोषियों को सजा देने की हिदायत दी।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश के नेता ओबामा ने सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की संसद के केन्द्रीय कक्ष में सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका को यह देख कर खुशी होगी कि भारत सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य के आसन पर बैठे।
उन्होंने संयुक्तराष्ट्र में सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि उनका देश सुरक्षा परिषद में अधिक भूमिका निभाने के भारत के इरादे का स्वागत करता है। ओबामा की इस घोषणा का सांसदों ने देर तक तालियां बजा कर स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि आने वाले बरसों में भारत इस शक्तिशाली विश्व संस्था में स्थाई सदस्यता हासिल कर लेगा।
यह पहला अवसर है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्थाई सदस्यता के भारतीय दावे का खुल कर समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि भारत को स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए अमेरिका की ओर से क्या पहल होगी। पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकवादी कार्रवाइयों के संदर्भ में ओबामा ने कहा कि पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंकवादी अड्डों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुंबई के आतंकवादी हमलों को बर्बर करार देते हुए उन्होंने पाकिस्तान को साफ शब्दों में हिदायत दी कि हमलावरों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए।
ओबामा ने विश्व में भारत की बढती हुई सशक्त भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह एक उभरती हुई ताकत नहीं है बल्कि एक ऐसी ताकत है जो अपनी साख कायम कर चुकी है। इक्कीसवीं सदी की दुनिया में शांति, सुरक्षा और समृद्धि कायम करने में भारत की भूमिका को कोई नजरंदाज नहीं कर सकता तथा आज अमेरिका इस सच्चाई को पहचानते हुए द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयां देना चाहता है।
भारत के पुराने इतिहास, विश्व सभ्यता को उसके योगदान और महात्मा गांधी के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया में मुक्ति, संघर्ष और उपेक्षित वर्गों को न्याय दिलाने में प्रेरणा दायक भूमिका निभाई है। मार्टिन लूथर किंग पर महात्मा गांधी की शिक्षाओं के असर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस अमेरिकी महानायक ने अपने भारत भ्रमण को एक तीर्थयात्रा की संज्ञा दी थी।
अपने राष्ट्रपति बनने का कुछ श्रेय महात्मा गांधी को देते हुए उन्होंने कहा कि आज अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में वह जब संसद को संबोधित कर रहे हैं तो यह भी गांधीजी के जीवन संघर्ष का ही नतीजा है। ओबामा ने न्यूयार्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, भारतीय संसद और मुंबई आतंकवादी हमलों को जोड़ते हुए कहा कि आतंकवाद अमेरिका और भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद को आतंकवादियों ने इसलिए निशाना बनाया कि यह लोकतंत्र का प्रतीक है।
आतंकवादियों के साथ पाकिस्तान की साठगांठ की ओर इशारा करते हुए ओबामा ने कहा कि आज वहां के नेता भी यह मानने लगे हैं कि आतंकवाद उनके लिए भी विनाशकारी है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान से हाल में मिल रहे सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि अल कायदा और तालिबान के उन्मूलन तक हमारा अभियान जारी रहेगा।
कश्मीर विवाद के सीधे उल्लेख से बचते हुए ओबामा ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता प्रक्रिया जारी रहे। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के नेताओं की आशाओं पर पानी फेरते हुए ओबामा ने इस प्रकरण में अमेरिकी मध्यस्थता से इनकार किया और कहा कि यह मुद्दा दोनों देशों के लोगों को स्वंय ही सुलझाना है।
ओबामा ने पाकिस्तान को आतंकवादी अड्डे नष्ट करने और मुंबई हमलों के दोषियों को दंडित करने की हिदायत देने के साथ ही भारत को यह नसीहत भी दी कि एक लोकतांत्रिक, समृद्ध और स्थायित्व वाला पाकिस्तान भारत के हित में है। ओबामा ने अपने संबोधन में अमेरिकी विदेश नीति के लिए सिरदर्द बने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अल कायदा के विश्वव्यापी नेटवर्क और म्यांमार में लोकतंत्र के दमन के मुद्दों को भी छुआ। उन्होंने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के सहयोग को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को भारत से सबक लेना चाहिए जिसने दशकों से दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की मुहिम चला रखी है।
म्यांमार में हाल में संपन्न चुनावों को छलावा बताते हुए ओबामा ने आंग सान सू ची के लोकतांत्रिक आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी जनता की स्वाभाविक चाह है जिसकी कोई उपेक्षा नहीं कर सकता। एक अश्वेत परिवार की मुसीबतों का सामना करने वाले ओबामा ने खुद को भारत के दलितों के साथ जोड़ते हुए कहा कि समाज के सभी लोगों को रंग, जाति और वर्ग से ऊपर उठते हुए समान अवसर हासिल करने का अधिकार है। उन्होंने भारत में दलित उत्थान में डा भीमराव अंबेडकर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक समता मूलक समाज के निर्माण के लिए काम किया।
भारत और अमेरिका की समान लोकतांत्रिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संविधान एक ही शब्दावली, वीदी पीपल, हम जनता जनार्दन से शुरू होते हैं। यही समान मूल्य और आदर्श भारत और अमेरिका को स्वाभाविक सहयोगी बनाते हैं और उनका सहयोग 21वीं सदी के सुरक्षित और समृद्ध विश्व की बुनियाद साबित होगा।
ओबामा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत में लाइसेंस राज के खात्मे के बाद आर्थिक प्रगति का नया दौर शुरू हुआ है। करोड़ों लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने में सफलता मिली है तथा देश में दुनिया का सबसे बड़ा मध्यवर्ग अस्तित्व में आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हरित क्रांति के जरिए भारत ने भूख पर विजय प्राप्त की है तथा देशवासियों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की है। कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में चमत्कारी सफलता हासिल करने वाले भारत को ओबामा ने विश्व अर्थव्यवस्था के इंजन की संज्ञा दी।
भारत-अमेरिका सहयोग को दोनों देशों के राजनीतिक दलों से मिल रहे समर्थन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग गठबंधन वाली पिछली दो सरकारों ने मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाया जबकि अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक प्रशासन के दो प्रमुखों ने भी इसी दिशा में काम किया है।
पिछले दशकों में भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखे मतभेदों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन के कारण विकसित और विकासशील देशों के बीच उपजी कटुता और शीत युद्ध का दौर अब खत्म हो गया है। राष्ट्रहित को सरकार की नीतियों का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत ही यह तय करेगा कि उसके राष्ट्रीय हित क्या हैं। इसी तरह अमेरिका भी अपने राष्ट्रीय हित तय करता है, लेकिन जिन क्षेत्रों में दोनों देशों के समान हित हैं उनमें निकट सहयोग दुनिया के हित में है।
हाल के बरसों में ओबामा बिल क्लिंटन के बाद अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने संसद को संबोधित किया। केन्द्रीय कक्ष में गरिमापूर्ण उपस्थिति के बीच उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने मेहमान नेता को स्वागत किया तथा लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया। ओबामा के संसद भवन पहुंचने पर अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लोकसभा अध्यक्ष ने उनकी अगवानी की।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश के नेता ओबामा ने सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की संसद के केन्द्रीय कक्ष में सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका को यह देख कर खुशी होगी कि भारत सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य के आसन पर बैठे।
उन्होंने संयुक्तराष्ट्र में सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि उनका देश सुरक्षा परिषद में अधिक भूमिका निभाने के भारत के इरादे का स्वागत करता है। ओबामा की इस घोषणा का सांसदों ने देर तक तालियां बजा कर स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि आने वाले बरसों में भारत इस शक्तिशाली विश्व संस्था में स्थाई सदस्यता हासिल कर लेगा।
यह पहला अवसर है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्थाई सदस्यता के भारतीय दावे का खुल कर समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि भारत को स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए अमेरिका की ओर से क्या पहल होगी। पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकवादी कार्रवाइयों के संदर्भ में ओबामा ने कहा कि पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंकवादी अड्डों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुंबई के आतंकवादी हमलों को बर्बर करार देते हुए उन्होंने पाकिस्तान को साफ शब्दों में हिदायत दी कि हमलावरों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए।
ओबामा ने विश्व में भारत की बढती हुई सशक्त भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह एक उभरती हुई ताकत नहीं है बल्कि एक ऐसी ताकत है जो अपनी साख कायम कर चुकी है। इक्कीसवीं सदी की दुनिया में शांति, सुरक्षा और समृद्धि कायम करने में भारत की भूमिका को कोई नजरंदाज नहीं कर सकता तथा आज अमेरिका इस सच्चाई को पहचानते हुए द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयां देना चाहता है।
भारत के पुराने इतिहास, विश्व सभ्यता को उसके योगदान और महात्मा गांधी के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया में मुक्ति, संघर्ष और उपेक्षित वर्गों को न्याय दिलाने में प्रेरणा दायक भूमिका निभाई है। मार्टिन लूथर किंग पर महात्मा गांधी की शिक्षाओं के असर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस अमेरिकी महानायक ने अपने भारत भ्रमण को एक तीर्थयात्रा की संज्ञा दी थी।
अपने राष्ट्रपति बनने का कुछ श्रेय महात्मा गांधी को देते हुए उन्होंने कहा कि आज अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में वह जब संसद को संबोधित कर रहे हैं तो यह भी गांधीजी के जीवन संघर्ष का ही नतीजा है। ओबामा ने न्यूयार्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, भारतीय संसद और मुंबई आतंकवादी हमलों को जोड़ते हुए कहा कि आतंकवाद अमेरिका और भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संसद को आतंकवादियों ने इसलिए निशाना बनाया कि यह लोकतंत्र का प्रतीक है।
आतंकवादियों के साथ पाकिस्तान की साठगांठ की ओर इशारा करते हुए ओबामा ने कहा कि आज वहां के नेता भी यह मानने लगे हैं कि आतंकवाद उनके लिए भी विनाशकारी है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान से हाल में मिल रहे सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि अल कायदा और तालिबान के उन्मूलन तक हमारा अभियान जारी रहेगा।
कश्मीर विवाद के सीधे उल्लेख से बचते हुए ओबामा ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता प्रक्रिया जारी रहे। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के नेताओं की आशाओं पर पानी फेरते हुए ओबामा ने इस प्रकरण में अमेरिकी मध्यस्थता से इनकार किया और कहा कि यह मुद्दा दोनों देशों के लोगों को स्वंय ही सुलझाना है।
ओबामा ने पाकिस्तान को आतंकवादी अड्डे नष्ट करने और मुंबई हमलों के दोषियों को दंडित करने की हिदायत देने के साथ ही भारत को यह नसीहत भी दी कि एक लोकतांत्रिक, समृद्ध और स्थायित्व वाला पाकिस्तान भारत के हित में है। ओबामा ने अपने संबोधन में अमेरिकी विदेश नीति के लिए सिरदर्द बने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अल कायदा के विश्वव्यापी नेटवर्क और म्यांमार में लोकतंत्र के दमन के मुद्दों को भी छुआ। उन्होंने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत के सहयोग को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को भारत से सबक लेना चाहिए जिसने दशकों से दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की मुहिम चला रखी है।
म्यांमार में हाल में संपन्न चुनावों को छलावा बताते हुए ओबामा ने आंग सान सू ची के लोकतांत्रिक आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी जनता की स्वाभाविक चाह है जिसकी कोई उपेक्षा नहीं कर सकता। एक अश्वेत परिवार की मुसीबतों का सामना करने वाले ओबामा ने खुद को भारत के दलितों के साथ जोड़ते हुए कहा कि समाज के सभी लोगों को रंग, जाति और वर्ग से ऊपर उठते हुए समान अवसर हासिल करने का अधिकार है। उन्होंने भारत में दलित उत्थान में डा भीमराव अंबेडकर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक समता मूलक समाज के निर्माण के लिए काम किया।
भारत और अमेरिका की समान लोकतांत्रिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संविधान एक ही शब्दावली, वीदी पीपल, हम जनता जनार्दन से शुरू होते हैं। यही समान मूल्य और आदर्श भारत और अमेरिका को स्वाभाविक सहयोगी बनाते हैं और उनका सहयोग 21वीं सदी के सुरक्षित और समृद्ध विश्व की बुनियाद साबित होगा।
ओबामा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत में लाइसेंस राज के खात्मे के बाद आर्थिक प्रगति का नया दौर शुरू हुआ है। करोड़ों लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने में सफलता मिली है तथा देश में दुनिया का सबसे बड़ा मध्यवर्ग अस्तित्व में आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हरित क्रांति के जरिए भारत ने भूख पर विजय प्राप्त की है तथा देशवासियों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की है। कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में चमत्कारी सफलता हासिल करने वाले भारत को ओबामा ने विश्व अर्थव्यवस्था के इंजन की संज्ञा दी।
भारत-अमेरिका सहयोग को दोनों देशों के राजनीतिक दलों से मिल रहे समर्थन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग गठबंधन वाली पिछली दो सरकारों ने मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाया जबकि अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक प्रशासन के दो प्रमुखों ने भी इसी दिशा में काम किया है।
पिछले दशकों में भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखे मतभेदों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन के कारण विकसित और विकासशील देशों के बीच उपजी कटुता और शीत युद्ध का दौर अब खत्म हो गया है। राष्ट्रहित को सरकार की नीतियों का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत ही यह तय करेगा कि उसके राष्ट्रीय हित क्या हैं। इसी तरह अमेरिका भी अपने राष्ट्रीय हित तय करता है, लेकिन जिन क्षेत्रों में दोनों देशों के समान हित हैं उनमें निकट सहयोग दुनिया के हित में है।
हाल के बरसों में ओबामा बिल क्लिंटन के बाद अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने संसद को संबोधित किया। केन्द्रीय कक्ष में गरिमापूर्ण उपस्थिति के बीच उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने मेहमान नेता को स्वागत किया तथा लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया। ओबामा के संसद भवन पहुंचने पर अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लोकसभा अध्यक्ष ने उनकी अगवानी की।
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