Saturday, May 11, 2013
दर्द हमें होता है अहसास मां को होता है
संसार में आने के बाद बच्चे के मुंह से जो पहला शब्द निकलता है वह होता है मां। वास्तव में मां ही बच्चे को लाड-प्यार और मीठी झिड़कियों के साथ जीवन का पाठ पढ़ाती है, इसलिए हरेक के जीवन में मां की अहम भूमिका होती है। आज मातृ दिवस १२ मई के अवसर पर मां के प्रति उनकी भावनाओं को टटोला तो इस दुनिया में यदि सच्चा प्यार कहीं है तो वह मां का प्यार ही है। इस संसार में कोई ऐसा जो प्यार का खजाना पाना नहीं, बल्कि लुटाना जानता है तो वह मां ही है और कोई नहीं। दर्द हमें होता है लेकिन उसका अहसास होता है मां को। परीक्षा के दिनों में जब हम रात रातभर जागकर पढ़ा करते थे तो हमें यदि किसी चीज की आवश्यकता हो तो मां को कभी भी आवाज लगाने की नौबत नहीं आती। यदि हम परेशान हो या हमारी जरा सी भी तबीयत खराब हो तो बिना बताए ही मां को अहसास हो जाता है। सफलता की राह मां की प्रेरणा के बिना पूरी नहीं हो सकती। मां तेरी सूरत ही है भगवान की सूरत क्योंकि भगवान को तो किसी ने देखा नहीं, लेकिन भगवान भी मां जैसे होंगे जो सारे जग का पालन करते हैं और बदलते में कोई कामना नहीं करते। अखिलेश ने कहा कि अगर मां न होती तो इस संसार में प्यार, ममता, दुलार जैसी कोमल भावनाएं केवल शब्द बन कर ही रह जाते, मां की महिमा ही ऐसी है कि उसके आगे शब्द कम पड़ सकते हैं, इसलिए कहना कि मां जैसी कोई नहीं ठीक ही है।
Thursday, May 9, 2013
हर माह 37 अरब वीडियो देखते हैं भारतीय
भारत में इंटरनेट पर वीडियो देखने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। देश में हर महीने औसतन 3.7 अरब वीडियो देख जाते हैं। यह संख्या पिछले दो साल में बढ़कर दोगुनी हो गई है।
दो साल पहले मार्च, 2011 में ऑनलाइन उपभोक्ताओं की संख्या 319.4 लाख थी, जो इस साल मार्च तक 540.2 लाख हो गई। इस समय भारत में 13 करोड़ 70 लाख लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और इसके उपभोक्ताओं की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। पिछले दो साल में गूगल की ऑनलाइन वीडियो साइट यूट्यूब पर सबसे ज्यादा 315 लाख उपभोक्ताओं ने वीडियो देखे। फेसबुक पर यह आंकड़ा 186 लाख और याहू की साइट पर 82 लाख रहा। तेजी से बढ़ते ऑनलाइन वीडियो उपभोक्ताओं की संख्या बाजार और मीडिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।
Thursday, May 2, 2013
सिर पर चोट से हुई सरबजीत की मौत
लाहौर की कोट लखपत जेल में हमलावरों का शिकार हुए सरबजीत की मौत सिर पर गहरी चोटें लगनी की वजह से हुई है। इस बात का खुलासा पाकिस्तान से भारत में लौटी सरबजीत की लाश का पोस्टमार्टम करने के बाद हुआ है। सिविल अस्पताल पट्टी में सरबजीत के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए पांच सदस्यीय मेडीकल बोर्ड गठित किया गया था। पोस्टमार्टम से पूर्व जब सरबजीत का शव ताबूत से निकाला गया को उसके सरबजीत के मुंह से खून बह रहा था। जिसे देख कर पोस्ट मार्टम करने वाला बोर्ड भी हैरान था। लोगों में चर्चा थी कि शायद पाकिस्तान ने ऐसा जानबूझकर किया और उसने ऐसा अपनी बदनीयती का संदेश देने के लिए किया है। पोस्टमार्टम के दौरान सरबजीत के सिर के छह एक्सरे लिए गए जिनमें सिर की हड्डियां कनपटी व माथे से टूटी हुई पाई गईं। डाक्टरों की राय है कि सर्बजीत सिंह का वजन 90 से 95 किलो व सेहत तंदरुस्त थी और उसकी मौत सिर पर चोटें लगने की वजह से हुई है।
डाक्टरों की टीम ने सरबजीत के शरीर की पूरी तरह से जांच भी की। जांच में यह भी सामने आया कि उसके सिर पर जान से मारने की नीयत से इतने बार किए गए कि उसका चेहरा ही बदल गया। सरबजीत के सिर पर गंभीर चोटों के कारण उसके मुंह का अकार चौड़ाई में बढ़ गया था। हालांकि अधिकारिक तौर पर पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को गुप्त रखा है तथा चिकित्सक अब केमिकल टेस्ट करके इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर सरबजीत की मौत कब हुई थी।
यह थे पोस्टमार्टम बोर्ड में शामिल
फोरेंसिक विभाग के सहायक प्रोफेसर डाक्टर गुरमनजीत राय, हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डाक्टर एचएस सोहल, शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डाक्टर सुधीर खिची, पैथोलाजिकल विभाग के प्रोफेसर डाक्टर अमरजीत सिंह, एनेसथिसिया विभाग की प्रोफेसर डाक्टर वीना चतरथ।
दो घंटे चला पोस्टमार्टम
सरबजीत की देह पट्टी सिविल अस्पताल में पहुंचने के बाद रात 9.47 बजे पोस्टमार्टम शुरू हुआ और 2.08 घंटे बाद रात 11.55 बजे तक चला।
सरबजीत: यातना के 23 साल
28अगस्त 1990 : सीमापार पाकिस्तान में गिरफ्तार। नौ महीने बाद परिवार को एक पत्र प्राप्त हुआ, जिससे सरबजीत के पाकिस्तान में कैद होने का पता चला।
04 सितंबर 1990 : पाकिस्तानी पुलिस ने नौ दिन बाद लाहौर की स्थानीय अदालत में उसे मनजीत सिंह बता कर पेश किया और 'रॉ का एजेंट व सीरियल बम ब्लास्ट का आरोपी करार दिया। सरबजीत को लाहौर व मुल्तान में सीरियल बम ब्लास्ट में 14 लोगों की मौत का आरोपी बताया गया।
03 अक्टूबर 1991 : अदालत ने सरबजीत को फांसी की सजा सुनाई।
27 दिसंबर 2001 : पाकिस्तान के उच्च न्यायालय ने सरबजीत की फांसी की सजा को बरकरार रखा।
30 अप्रैल 2008 : वर्ष 2007 में सरबजीत की फांसी की सजा को उच्च न्यायालय ने कन्फर्म करते हुए तीस अप्रैल 2008 फांसी की तिथि निर्धारित कर डाली। सरबजीत अपने वकील के माध्यम से फांसी माफी की दरखास्त पाक सर्वोच्च न्यायालय में ले गए।
24 जून 2009 : पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने सरबजीत के वकील के हाजिर न होने पर भी निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाते हुए फिर से सरबजीत की दया याचिका इसलिए रद कर दी।
28 मई 2012 : सरबजीत ने पांचवी व अंतिम दया याचिका पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पास की।
26 जून 2012 : पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दया याचिका स्वीकार करते हुए सरबजीत की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया।
27 जून 2012 : पाकिस्तान की तरफ से सरबजीत सिंह को रिहा करने की घोषणा की गई, लेकिन चार घंटे बाद ही स्पेलिंग मिस्टेक बताकर पंजाब के ही सुरजीत सिंह को रिहा करने का एलान किया गया।
26 अप्रैल 2013 : पाकिस्तान की कोटलखपत जेल में कैदियों ने जानलेवा हमला किया। इसके बाद सरबजीत को लाहौर के जिन्ना अस्पताल में कोमा में भर्ती कराया गया।
कफन में लौटा लाल
-एयर इंडिया के विमान से देर शाम अमृतसर हवाई अड्डे पहुंचा ताबूत
राजासांसी हवाई अड्डा
पाकिस्तान की काल कोठरी में 23 साल जिल्लत की जिंदगी बसर करने के बाद पंजाब का लाल वीरवार शाम अपनी सरजमीं पर लौटा जरूर लेकिन कफन में लिपट कर। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में कातिलाना हमले से 'शहीद हुए सरबजीत का पार्थिव शरीर वीरवार शाम पौने आठ बजे श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में एयर इंडिया के विशेष विमान से भारत पहुंचा। लगभग बीस मिनट के बाद सीमा सुरक्षा बल के विशेष हेलीकाप्टर से सरबजीत का पार्थिव शरीर सुर सिंह भेज दिया गया। यहां बनाए गए विशेष हेलीपैड में लैंडिंग होगी। इसके बाद सरबजीत के पार्थिव शरीर को एक एंबुलेंस में रख कर पट्टी के सिविल अस्पताल में ले जाया जाएगा, जहां डाक्टरों की एक टीम उसका पोस्टमार्टम करेगी।
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में सरबजीत के ताबूत को वहां रखे गए स्कैनर से निकाला गया। सरबजीत का शव वीरवार शाम तीन बजे पाकिस्तान से पहुंचना था, लेकिन पाकिस्तान सरकार द्वारा बार बार शव भेजने में की जा रही देरी से हवाई अड््डे में इंतजार कर रहे मंत्रियों व उच्चाधिकारियों को कई घंटे बैठना पड़ा। हवाई अड्डे पर सीमा सुरक्षा बल, सीआइएसएफ व पंजाब पुलिस के कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
इससे पूर्व लाहौर हवाई अड्डे से लगभग 7 बज कर दस मिनट पर एयर इंडिया के इस जहाज ने उड़ान भरी। 35 मिनट के बाद जहाज श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में पहुंचा, जहां भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर, उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, एससीएसटी कमीशन के वाइस चेयरमैन डा. राजकुमार, मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सरबजीत के पार्थिव शरीर पर फूल माला चढ़ा कर श्रद्धा सुमन भेंट किए।
लगभग दस मिनट के श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद परनीत कौर, प्रताप सिंह बाजवा व अन्य कांग्रेसी नेता हवाई अड्डे से बाहर लौट गए। पत्रकारों से बातचीत करते हुए बीबी परनीत कौर ने कहा कि भारत की जेलों में सजा काट रहे सभी पाकिस्तानी कैदियों की सुरक्षा में कोई ढील नहीं आने दी जाएगी। भारत में पाकिस्तानी कैदियों पर हमले नहीं होते है। भारत एक जिम्मेदार देश है।
बाजवा ने कहा कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के आगे नंगा हो गया है। सरबजीत पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
इससे पूर्व बिक्रम मजीठिया ने कहा कि सरबजीत के परिवार ने उसके पुन: पोस्टमार्टम के लिए कहा है। उसके पोस्टमार्टम के लिए दो टीमों का गठन किया गया है। सरबजीत के परिवार ने उसकी हत्या में प्रयोग किए गए हथियारों, उसे कहां कहां चोट लगी है। कहीं शरीर का कोई अंग तो पाकिस्तान में निकाला गया, इसकी जांच के लिए दोबारा पोस्टमार्टम करने के लिए कहा गया है।
Wednesday, May 9, 2012
दिल्ली में चार सरकारी बंगलों पर काबिज मायावती
ऐशोआराम के लिए सांसद-विधायक किस तरह से नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, इसका परत दर परत आरटीआइ से खुलती जा रही है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पास दिल्ली में चार सरकारी बंगले हैं। इनमें से तीन बंगले तो उन्हें बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते ही आवंटित किए गए हैं। माया ने इन बंगलों में बगैर किसी मंजूरी के बेहिसाब तरीके से अनाधिकृत निर्माण भी कराया है।
राज्यसभा सांसद माया ने बंगलों में किसी भी निर्माण के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की मंजूरी नहीं ली। माया को बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते 27 दिसंबर 2010 को बंगला संख्या 4 जीआरजी आवंटित हुआ। उन्हें बंगला संख्या 14 जीआरजी 30 अप्रैल 2008 को बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने की हैसियत से दिया गया। इसी आधार पर ही उन्हें चार नवंबर 2010 को बंगला संख्या 16 जीआरजी भी मिल गया। जबकि बहुजन प्रेरणा ट्रस्ट की चेयरमैन होने की हैसियत से 30 जुलाई 2007 से ही उन्हें 12 जीआरजी स्थित बंगला हासिल था। सीपीडब्ल्यूडी ने स्पष्टीकरण में कहा है कि उसका काम आवंटियों के बंगलों का रखरखाव, उनका कब्जा दिलाने और खाली बंगलों को अधिकार में लेने का है। बंगलों के आवंटन, किराया वसूलने या उन्हें खाली कराने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। नियमों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सत्ता गंवाने के बाद मायावती से कम से कम तीन बंगले खाली करा लिए जाने चाहिए थे। हालांकि न तो केंद्र सरकार या अन्य संबंधित एजेंसियों ने कोई कदम उठाया। न ही माया ने इन्हें खाली करने की जहमत उठाई। हाल ही में सपा नेता शिवपाल सिंह यादव द्वारा दायर एक आरटीआइ से भी खुलासा हुआ है कि बतौर पूर्व मुख्यमंत्री लखनऊ के 13 माल एवेन्यू स्थित अपने बंगले की साज सज्जा और मरम्मत कार्य में माया ने 86 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च कर डाले। यह आंकड़ा सौ करोड़ से भी ज्यादा हो सकता है। यहां लगीं कुछ खिड़कियों में से प्रत्येक की कीमत ही करीब 15 लाख है। 2007 में तीसरी बार यूपी की सत्ता संभालने के बाद माया के बंगले में नवीनीकरण शुरू हुआ था। राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री यादव ने अनियमितता के आरोपियों पर कार्रवाई का एलान किया है।
Saturday, May 5, 2012
शेना बनीं आईएएस टॉपर
25 वर्षीय शेना अग्रवाल को घर में सब प्यार से बुलबुल कहकर बुलाते हैं। इस बुलबुल ने देश भर में यूपीएससी की परीक्षा में टॉप करके साबित कर दिया है कि उसकी उड़ान आसमान से ऊंची है। वह मेट्रोपोलिटिन सिटी के होनहारों से किसी भी सूरत में कम नहीं है। शेना ने एम्स से एमबीबीएस में टॉप करने तथा 2010 में सिविल सर्विसेज में 305वीं रैंक हासिल करने के बाद चैन की सांस नहीं ली।
बुलबुल ने आईएएस के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मेहनत की और आखिरकार शुक्रवार को उसने उस गोल को अचीव कर ही लिया, जिसके लिए वह वर्षों से मेहनत कर रही थी। 3 अप्रैल 1987 को रोहतक शहर में जन्मी शेना ने नर्सरी की पढ़ाई रोहतक में की। इन दिनों उसके पिता चंद्र कुमार अग्रवाल डेंटल कालेज में बच्चों को पढ़ाते थे। डा. चंद्र कुमार अग्रवाल का परिवार वर्ष 1991 में रोहतक से यमुनानगर की प्रोफेसर कालोनी में आकर बस गया और उन्होंने शेना को संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल में दाखिल करवा दिया। जहां पर उसने पहली से 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की। मूल रूप से डा. चंद्रकुमार अग्रवाल का परिवार भटिंडा का रहने वाला है, जो 1984 में रोहतक आ गया था।
इतना होनहार स्टूडेंट हमने नहीं देखा
संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल आर. भट्टी के मुताबिक उन्होंने आज तक शेना जितना होनहार स्टूडेंट नहीं देखा। उन्होंने बताया कि शेना अपना हर काम शिद्दत से करती थी। जब तक पढ़ाई का उसका काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक वह टीचर्स के पीछे पड़ी रहती थीं। इसके अलावा उसका एक्सट्रा स्टडी पर ज्यादा ध्यान रहता था। यही वजह है कि पहली से लेकर 10वीं कक्षा तक उसने स्कूल में टॉप किया है। टॉपर होने की वजह से वह सभी टीचर्स की लाडली बन गई थी। पुराने क्षणों को याद करते हुए मैडम भट्टी ने बताया कि जब टीचर्स शेना के पेपर को चेक करते थे, तो वे हमेशा यही कहते थे कि शेना के नंबर कहां से काटे। क्योंकि वह इतनी अच्छी तरह से प्रश्न हल करती थी कि टीचर्स को नंबर काटने का मौका ही नहीं मिल पाता था। शेना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह हमेशा रेगुलर रहती थी। क्लास में शेना पूरा सोच विचार करने के बाद ही किसी प्रश्न का उत्तर देती थी।
ज्वाइन की हुई थी टेस्ट सीरीज
डा. चंद्रकुमार अग्रवाल ने बताया कि हालांकि उनकी बेटी का चयन आईआरएस में हो चुका था, बावजूद इसके उसने टेस्ट सीरीज ज्वाइन की हुई थी, जिसके जरिए वह आईएएस की परीक्षा की तैयारी कर रही थी। निरंतर पढ़ाई के टच में रहने व कड़ी मेहनत के बल पर ही उसने यह मुकाम हासिल किया है। शुक्रवार को रिजल्ट का पता चलने के बाद अग्रवाल दंपति ने बेटी से फोन पर बात की और उसे आशीर्वाद दिया।
बुलबुल को पसंद हैं परांठे
शेना को घर में प्यार से सभी लोग बुलबुल बुलाते हैं। शेना की मां पिंकी अग्रवाल ने बताया कि मेरी बेटी को खाने में परांठे सबसे ज्यादा पसंद हैं। जब भी वह रसोई में पराठें बनाती थी, तो बुलबुल चुपके से पीछे आकर खड़ी हो जाती थी। हालांकि कभी कभार वह काम में अपनी मां का भी हाथ बटा देती थी। लेकिन उन्होंने कभी भी बुलबुल को घर के काम के लिए बाध्य नहीं किया।
शांत स्वभाव की है शेना
शेना के पिता डा. चंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि उनकी बेटी बडे़ शांत स्वभाव की है। जब 10वीं में शेना ने जिले में टॉप किया था, तो तब उन्हें आभास हो गया था कि एक दिन उनकी बेटी पूरे देश में उनका नाम रोशन करेगी। आखिरकार शुक्रवार को वह दिन आ ही गया, जब बेटी ने आईएएस में टॉप कर उनका, यमुनानगर का व प्रदेश का नाम देशभर में रोशन कर दिया।
स्वीमिंग व बैडमिंटन की ओर था रुझान
पढ़ाई में टॉपर शेना को खेलों में स्वीमिंग और बैडमिंटन सबसे पसंद है। जब भी उसे फुर्सत मिलती तो वह सहेली गुरप्रीत के साथ बैडमिंटन खेलने चली जाती थी। इसके अलावा उसे बचपन से स्वीमिंग का भी शौक रहा है। इसके अलावा जब भी शेना को स्टेज कंडक्ट करने का मौका मिला, तो उसने साबित करके दिखाया कि कम्युनिकेशन के मामले में उसका कोई जवाब नहीं है।
बचपन से भरी है नेतृत्व की भावना
शेना की मां पिंकी अग्रवाल ने बताया कि स्कूल के दिनों में वह ग्रुप हाउस की लीडर रही है। एम्स में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान जब भी ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित होते थे, तो शेना ही ऑर्गेनाइजेशन का जिम्मा संभालती थी। स्कूल की इनडोर एक्टिविटी में उनकी बेटी बढ़-चढ़कर भाग लेती रही है। यही वजह है कि उसमें बचपन से ही नेतृत्व की भावना कूट-कूटकर भरी हुई थी। उन्होंने बताया कि शेना को बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा है।
मंदिर में टेका माथा
शुक्रवार को जैसे ही अग्रवाल दंपति को पता चला कि उनकी बेटी ने आईएएस में टॉप किया है, तो उन्होंने पास के हनुमान मंदिर में माथा टेकने की तैयारियां शुरू कर दी। डा. चंद्रकुमार अग्रवाल ने बताया कि आखिरकार भगवान ने उनकी मन्नत पूरी कर दी। अग्रवाल दंपति ने शाम को मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाया। उन्होंने मंदिर में प्रार्थना की कि सदा उनकी बेटी पर भगवान का हाथ बना रहे। उन्होंने कहा कि जब-जब बेटी ने किसी परीक्षा में टॉप किया है, तो उन्होंने मंदिर में आकर माथा टेका है।
वह लम्हा कभी नहीं भूलता
डा. चंद्रकुमार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2005 में वह पूरी फैमिली के साथ दुबई टूर पर गए थे और वर्ष 2006 में उन्हें परिवार के साथ यूएसए जाने का मौका मिला। वहां बेटी व परिवार के साथ बिताया हुआ एक-एक क्षण उन्हें याद आता रहता है। टूर के दौरान बेटी ने जो मस्ती की, वह सदा उनकी स्मृतियों में बसी हुई है। जब भी बेटी की याद आती है, तो वह उन दिनों को याद कर लेते हैं।
मीडिया कर्मियों से घिरे रहे अग्रवाल दंपति
शुक्रवार को जैसे ही मीडिया कर्मियों को पता चला कि यमुनानगर की शेना अग्रवाल ने आईएएस में टॉप किया है, तो मीडिया कर्मी उनका इंटरव्यू लेने के लिए घर पर पहुंच गए। मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान बीच-बीच में अग्रवाल दंपति को परिजनों व रिश्तेदारों के बधाई फोन आते रहे। जब भी अग्रवाल दंपति फोन सुनने के लिए उठते, तो बीच में मीडिया कर्मियों को रोककर उनसे बात करने लग जाते। बाद में फिर से बेटी की उपलब्धियों के बारे में बताने जुट जाते। बेटी की उपलब्धियों को बताते हुए अग्रवाल दंपति की आंखों में चमक नजर आ रही थी।
टीचर्स को दिया सफलता का श्रेय
अग्रवाल दंपति ने शेना की सफलता का श्रेय उसके टीचर्स को दिया है। उन्होंने कहा कि जब भी शेना को पढ़ाई के दौरान कभी मुश्किलें आती थीं, तो वह टीचर्स से संपर्क कर लेती थीं। इसके अलावा सेल्फ स्टडी पर भी उसका पूरा ध्यान रहता था।
Wednesday, March 14, 2012
रेल बजट में किराए में वृद्धि

रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने वित्ता वर्ष 2012-13 के रेल बजट में किराए में वृद्धि की घोषणा की है। उन्होंने स्लीपर से लेकर एसी गाड़ियों में पांच से तीस पैसे प्रति किलोमीटर तक किराए में वृद्धि की घोषणा की है। कुल मिलाकर यह वृद्धि पांच रुपये तक होगी। रेलवे ने करीब नौ साल के बाद पहली बार यह वृद्धि की गई है।
रेल बजट पेश करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय रेल अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। उन्होंने अपने बजट भाषण में लगातार बढ़ रहे रेलवे के घाटे और बढ़ रही घटनाओं पर भी अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में भारतीय रेल सुरक्षा को प्राथमिकता देगी।
त्रिवेदी ने कहा कि उनका पूरा ध्यान सुरक्षा पर है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में रेल दुर्घटना की पृष्ठभूमि में पद संभालने के कुछ ही समय बाद यह निर्णय लिया गया था। अपने राजनीतिक जीवन का पहला रेल बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वह रेल यात्रा को दुर्घटना रहित बनाना चाहते हैं। परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व प्रमुख अनिल काकोदकर अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह की अनुशंसा पर मैं एक स्वतंत्र रेल सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव किया है।
भारतीय रेल 64,000 किमी मार्ग के साथ विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। इस नेटवर्क पर प्रतिदिन 12,000 यात्री रेलगाड़ी एवं 7,000 मालगाड़ियां क्रमश: 230 लाख यात्रियों एवं 26.5 लाख टन सामान की ढुलाई करती है। रेलवे को वर्ष 2012-13 में रेलवे यात्री किराए से 36 हजार करोड़ रुपये आय होने की उम्मीद है।
रेल बजट 2012-13
- एसी थ्री के किराए में दस पैसे, टू टायर में पंद्रह पैसे, एसी फर्स्ट में तीस पैसे और स्लीपर में पांच पैसे की वृद्धि की गई है।
- रेलवे 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि [2012-17] में 7.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी। पिछली योजना अवधि में रेलवे ने 1.92 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।
- 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में ढांचागत संरचना पर होने वाले अनुमानित 20 लाख करोड़ रुपये के खर्च का 10 फीसदी हिस्सा रेलवे को हासिल करना होगा।
- रेलवे को 12वीं योजना अवधि में 2.5 लाख करोड़ रुपये के कुल बजटीय सहायता की उम्मीद।
- आधुनिकीकरण के लिए धन जुटाने संबंधी तंत्र बनाने की सामूहिक चुनौती।
- रेलवे को सकल घरेलू उत्पादन में दो फीसदी योगदान करना होगा जो अभी एक फीसदी है।
- सुरक्षा पर ध्यान। विश्व की सबसे सुरक्षित नेटवर्को में शामिल करने का लक्ष्य।
- दुर्घटना को 0.55 से घटाकर 0.17 पर लाने का लक्ष्य हासिल।
- सुरक्षा मानकों के लिए एक विशेष संगठन की स्थापना।
- स्वायत्ता रेलवे सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना।
- आधुनिकीकरण के लिए 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत
- वर्ष 2012-13 के लिए 60,100 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान, जो अब तक का सर्वाधिक है।
- रेलवे को 10 सालों में आधुनिकीकरण के लिए 14 लाख करोड़ रुपये की जरूरत
- संचालन अनुपात को 90 फीसदी से घटाकर 2012-13 में 84.9 फीसदी करने तथा 2016-17 तक 72 फीसदी पर लाने का लक्ष्य।
- रक्षा नीति और विदेश नीति की तरह राष्ट्रीय रेल नीति बनाने का समय आ चुका है।
- हर साल दस खिलाडियों को रेल खेल रत्न पुरस्कार दिए जाएंगे
- 2012-13 के दौरान रेलवे में एक लाख नई भर्तिया
- रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन किया जाएगा।
- रेलवे बोर्ड में दो नए सदस्य नियुक्त किए जाएंगे
- 2012-13 में 21 नई ट्रेनें चलाई जाएंगी।
- सिख तीर्थस्थलों अमृतसर, पटना साहिब और नादेड को जोडने वाली विशेष गुरू परिक्रमा ट्रेन।
- मुंबई में 75 नई उपनगरीय ट्रेनें।
- 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान हेरिटेज रेल लाइनों को छोडकर बाकी सभी मीटर गेज और नैरो गेज लाइनों को ब्राड गेज में तब्दील कर दिया जाएगा।
- भारतीय रेल को नेपाल और बाग्लादेश से जोडा जाएगा।
- सभी गरीब रथ ट्रेनों में विकलागों के लिए एक विशेष वातानुकूलित कोच।
- अगले साल 2500 कोचों में लगेंगे ग्रीन टायलेट
- 75 नई एक्सप्रेस और सवारी गाडिया अगले वित्त वर्ष के दौरान चलाई जाएंगी।
Sunday, February 19, 2012
मतदान महज औपचारिकता नहीं

मताधिकार को छोड़कर शायद ही ऐसा कोई ऐसा अधिकार हो जिसके लिए जागरूकता अभियान चलाना पड़ता हो। चुनाव के वक्त महज रस्म अदायगी के लिए वोट न डालें, प्रत्याशी को जांचे-परखें तब उसे अपना मत दें।
अधिकतर वोटर जाति-पांति के नाम पर वोट देने की रस्म अदायगी करते हैं। उन्हें इस चीज से कोई मतलब नहीं होता कि जिसे वह चुने रहे हैं वह कैसा व्यक्ति है। राजनीति और विकास के नारे का संबंध पुराना और परंपरागत है। यह बात अलग है कि इस नारे के साथ राजनीति तो आगे बढ़ती गयी, लेकिन विकास पीछे ही छूट गया। क्षेत्र के विकास के सवाल पर अब जनता अचंभित नजर नहीं आती, लेकिन यह बात उसे जरूर हैरान कर रही है कि विकास के लिए उनके वोटों पर जीतकर सदन पहुंचे माननीय की ही उपेक्षा करते हैं।
लोकतंत्र की बेहतरी के लिए चुनाव के दौरान नियम-कानूनों को और भी सख्त किया जाना चाहिए ताकि राजनीति में गलत लोगों का प्रवेश बिल्कुल न होने पाये और घोटाले दर घोटाले और भ्रष्टाचार में जनता की गाढ़ी कमाई को लुटने से बचाया जा सके। जरूरत इसकी है, समय-समय पर नेताओं की अर्जित संपत्ति, इसके स्रोतों की जांच की जाये।
चुनाव के वक्त नेताओं के दाखिल हलफनामे के सत्यापन के बाद उनकी संपत्ति और उसके स्रोतों का ब्योरा जनता के सामने रखा जाना चाहिए। इससे चुनाव मैदान में खड़े नेता के सही चेहरे और चरित्र से जनता वाकिफ हो सकेगी।
किसी प्रत्याशी को इसलिए वोट नहीं देना चाहिए कि उसकी फिजा है और वह जीत रहा है। हमें अपने वोट की कीमत समझनी होगी। मताधिकार का प्रयोग करते हुए ऐसे प्रत्याशी को चुनना होगा जो कि सच्चा हो और क्षेत्र के लिए कुछ करे न कि खुद के लिए।
धर्म और जाति के बजाए देश हित को ध्यान में रखकर मतदान करना चाहिए। खासतौर से युवा वर्ग को अपने वोट का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए।
देश का सम्मान इसी में हैं कि हम सही व्यक्ति को चुनें। वोट देकर हमे अपनी आजादी का अहसास करना चाहिए।
देश में रोज एक नई पार्टी बन रही है। जोड़-तोड़ की राजनीति ने देश का विनाश कर दिया है। देश में दलों की संख्या सीमित कर देनी चाहिए। दर्जनों दलों की जगह एक मजबूत बड़ा दल बने जो देश को टिकाऊ सरकार दे सके।
चुनाव के दौरान मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। वो प्रत्याशियों की सच्चाई जनता तक पहुंचाए। चुनाव जीतने के बाद भी नेताओं को इसी तरह जनता से मिलना चाहिए।
Saturday, February 4, 2012
यूपी विधानसभा चुनाव: पहले चरण का प्रचार चरम पर

उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनाव प्रचार के लिए महज 48 घंटे बचे हैं, ऐसे में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के साथ चुनाव प्रचार चरम पर पहुंचता जा रहा है। पहले चरण में 55 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आठ फरवरी को मतदान होंगे। शनिवार को सभी दलों के प्रमुख नेताओं के तूफानी दौरे जारी रहे।
वाराणसी में चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ''हम चोरों की सरकार और गुंडों की सरकार से समझौता नहीं करने वाले हैं, चाहे कुछ भी हो जाए। चाहे कांग्रेस पार्टी हारे या जीते, हम समझौता केवल उत्तर प्रदेश की जनता से करेंगे।'' राहुल ने सिद्धार्थनगर जिले में भी जनसभा की।
कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचीं प्रियंका वाड्रा ने दूसरे दिन शनिवार को मायावती सरकार पर आक्षेप किया कि कांग्रेस-नीत केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के विकास के लिए भेजा गया पैसा जनता तक न पहुंचकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।
दूसरी ओर, प्रदेश की बदहाली के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए बसपा की अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने चुनाव प्रचार के चौथे दिन शनिवार को कहा कि 40 साल उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहने पर जब कांग्रेस ने विकास नहीं किया तो पांच साल में क्या करेगी।
पूर्वाचल क्षेत्र के महाराजगंज और बस्ती में चुनावी जनसभाओं को सम्बोधित करते हुए मायावती ने कहा, ''उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा समय 40 साल तक कांग्रेस ने राज किया। उसी की गलत नीतियों के कारण प्रदेश में गरीबी व बेरोजगारी बढ़ी और लोग दूसरे राज्यों में पलायन के लिए मजबूर हुए।''
उधर, देविरया और अयोध्या में चुनाव प्रचार करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पहले ही दिन राम मंदिर मुद्दे को हवा देते हुए कहा कि उन्हें तब तक चैन नहीं मिलेगा जब तक अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने लखनऊ में कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की जनता को पार्टी के 2 साल पुराने शासन की याद दिला रहे हैं, जबकि जनता इसे बुरा सपना मानती है। भाजपा नेता अरुण जेटली और मुख्तार अब्बास नकवी ने रामपुर में जनसभा की।
वहीं, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बांदा और चित्रकूट में जनसभाएं कीं। बांदा में उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में सपा की सरकार आई तो गुंडागर्दी करने वाले सभी लोग सलाखों के पीछे होंगे चाहे वे सपा कार्यकर्ता ही क्यों न हों।
सपा नेता शिवपाल यादव ने बलरामपुर बस्ती, प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोनभद्र में जनसभाओं को सम्बोधित किया।
राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) प्रमुख व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह ने फैजाबाद में जनसभाएं कीं तो कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गोंडा और सीतापुर, राज बब्बर ने गोंडा और उन्नाव, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बस्ती और सिद्धार्थनगर में जनसभाएं कीं।
उधर पांचवें चरण में 49 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का काम आज समाप्त हो गया।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: चिदंबरम और सरकार को फौरी राहत

कोर्ट ने कहा :
-ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि चिदंबरम ने लाइसेंस के आवंटन में कोई आर्थिक फायदा लिया हो।
-याचिकाकर्ता के किसी दस्तावेज से यह साबित नहीं हो पाया कि चिदंबरम ने राजा के साथ मिलकर स्पेक्ट्रम का आवंटन किया है और दोनों ने मिलकर आर्थिक लाभ लिया है।
-चिदंबरम ने लोक सेवक होने के नाते जो फैसले लिए उसमें कहीं से भी आपराधिक षड़यंत्र की जानकारी नहीं मिलती।
गृह मंत्री पी चिदंबरम और सरकार को दिल्ली की निचली अदालत से फौरी राहत मिल गई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें बहुचर्चित ख्जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सह आरोपी बनाने से इंकार करते हुए जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी। खचाखच भरी कोर्ट में विशेष न्यायाधीश ओपी. सैनी ने दोपहर 1.35 बजे आदेश सुनाया। कोर्ट ने 64 पन्नों के आदेश में माना है कि प्रथम दृष्टया पी. चिदंबरम के खिलाफ ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित होता हो कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उनकी कोई भूमिका रही है। स्वामी ने फैसले के तुरंत बाद कहा कि वह इस निर्णय से हैरान हैं। लेकिन विचलित नहीं। विशेष कोर्ट के फैसले को वह दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।
विशेष कोर्ट मे पहले दस बजे फैसला सुनाया जाना था लेकिन कोर्ट ने फैसले का समय बढ़ाकर 12.30 बजे कर दिया। ठीक 12.30 स्वामी अपनी वकील पत्नी रोक्साना के साथ पहुंचे लेकिन कोर्ट रूम में सिर्फ स्वामी और उनकी पत्नी को ही अंदर बुलाया गया। इसके बाद विशेष अदालत के जज 1: 35 बजे आए और बैठते ही बोले 'पिटीशन डिसमिस्ड'। बस इतना सुनते ही स्वामी कुछ देर के लिए शांत खड़े रहे। फिर अंदर पहुंची मीडियाकर्मियों की भीड़ के साथ वह भी कोर्ट रूम से बाहर आ गए।
विशेष जज ओपी सैनी ने अपने फैसले में कहा कहा कि याचिकाकर्ता ने चिदंबरम पर दो आरोप लगाए हैं। पहला चिदंबरम ने 2001 के मूल्य पर स्पेक्ट्रम आवंटन की बात कही थी और दूसरा स्वॉन टेलीकॉम और यूनिटेक को इक्विटी बेचने को कहा था, लेकिन इस बारे में ऐसा कोई सुबूत रिकार्ड पर नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि इन दोनों ही कार्य के लिए चिदंबरम ने कहीं से भी आर्थिक फायदा लिया हो।
कोर्ट ने कहा कि 31 अक्टूबर 2003 में कैबिनेट की जो बैठक स्पेक्ट्रम आवंटन और मूल्य निर्धारण करने के लिए हुई थी उसके बाद वित्त मंत्री ने निर्णय लेते हुए ए.राजा से सन 2001 के मूल्य के आधार पर स्पेक्ट्रम लाइसेंस की बिक्री करने को कहा था। लेकिन इसके बाद से तत्कालीन दूर संचार मंत्री राजा, इस बारे में बात करने के लिए दोबारा तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के पास नहीं गए। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में जो शामिल थे उन पर सीबीआइ द्वारा सुबूतों के आधार पर विशेष कोर्ट में पहले से ही मुकदमा चल रहा है। अदालतन ने कहा कि चिदंबरम के लोक सेवक होने के नाते उन्होंने जो फैसले लिए उसमें कहीं से भी आपराधिक षड़यंत्र का आभास नहीं होता है और न ही इससे चिदंबरम की किसी भी मामले में कोई बदनियती नजर आती है।
किसी भी दस्तावेजों से कोर्ट को यह नहीं पता चला कि राजा के साथ मिलकर चिदंबरम ने खुद को आर्थिक फायदा पहुंचाया हो या अपने किसी परिचित और जानकार को।
Sunday, January 29, 2012
अन्ना के इलाज में राजनीतिक साजिश

क्या बाबा रामदेव का यह आरोप सही है कि अन्ना हजारे के इलाज के दौरान कोई गंभीर राजनीतिक साजिश हुई? रविवार को हुई अन्ना की डॉक्टरी जांच इलाज में गड़बड़ी के सवाल को और गहरा देती है। डॉक्टरों के नए पैनल के मुताबिक खतरनाक और गैर जरूरी दवाओं के कुप्रभाव की वजह से उनके शरीर में कई जगह सूजन है। शरीर में कई जगह पानी भर गया है और रक्तचाप खतरनाक स्तर पर है। अन्ना के करीबी अरविंद केजरीवाल ने भी पहली बार उनके पिछले इलाज पर अंगुली उठा दी है। पुणे के संचेती अस्पताल के प्रमुख और अभी 26 जनवरी को सर्वोच्च पद्म पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजे गए केएच संचेती का कहना है कि इलाज में न तो कोई गड़बड़ी हुई है और न ही उन पर कोई राजनीतिक दबाव है।
गुड़गांव स्थित वेदांता मेडिसिटी अस्पताल के डॉक्टरों के पैनल ने रविवार को अन्ना की जांच के बाद पाया कि उन्हें उच्च रक्त चाप [170-110] है, पूरे शरीर में और खास कर पेट, पैर और चेहरे में काफी सूजन है। उनका दम फूल रहा है, पैर और पेट में भारी जलन है और शरीर के विभिन्न भाग में पानी जमा है। अधिकांश प्रभाव विभिन्न दवाओं की वजह से हैं।
क्या इसमें कोई साजिश है, यह पूछने पर अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल कहते हैं, 'मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि अन्ना पुणे के अस्पताल से ज्यादा बीमार होकर लौटे हैं।' अन्ना के एक अन्य सहयोगी कहते हैं कि जिस तरह पुणे के डॉक्टरों ने पहले ही दिन से यह कहना शुरू कर दिया था कि अन्ना को एक महीने के आराम की जरूरत है और अब उन्हें सरकार बदले में इनाम दे रही है। उसे देखते हुए इस पूरे मामले की गंभीर जांच होनी चाहिए। एक दिन पहले बाबा रामदेव अन्ना के इलाज में सरकार की राजनीतिक साजिश का आरोप खुलकर लगा ही चुके हैं।
गुड़गांव के डॉक्टरों के मुताबिक अन्ना को पुणे में तीन-तीन इंट्रावीनस [नसों के जरिए दी जाने वाली] एंटीबायटिक दी गई, जिसे बहुत आपात स्थिति में ही इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से उन्हें लंबे समय के लिए एसीडीटी हो गई है। बिना जरूरत के उन्हें स्टेराएड और बहुत ज्यादा पेन किलर दिए गए, जिसकी वजह से शरीर में सूजन हो गई और कई जगह पानी भर गया।
संचेती ने इस अखबार से बातचीत में कहा कि अन्ना के इलाज में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और न ही उनको पद्म विभूषण दिए जाने का इससे कोई वास्ता है। उनके अस्पताल में गलत इलाज होने के आरोप के बारे में वे कहते हैं, 'पहली बात तो अन्ना प्राथमिक तौर पर डॉक्टर महेंद्र कावेरिया की निगरानी में थे, जो चेस्ट फिजीशियन हैं। मैं सिर्फ उनकी पीठ दर्द का इलाज कर रहा था। दूसरा, वे जब अस्पताल आए थे, तभी साफ कर दिया गया था कि उनको ठीक होने में एक माह का समय लगेगा।'
शरीर में सूजन और पानी भर जाने के बारे में वे कहते हैं कि उनके डॉक्टरों ने जब आखिरी बार उनकी जांच की थी, तब तक ऐसा कोई असर नहीं दिखा था। एंटी बायटिक और स्टेराएड की खुराक को भी वे जरूरी बताते हैं। साथ ही वे कहते हैं कि यह सारी दवाएं उन्हें चेस्ट फिजीशियन ने लिखी थी। संचेती के मुताबिक उन्होंने अन्ना के इलाज के बारे में कभी किसी बाहरी व्यक्ति से कोई चर्चा तक नहीं की है। पद्म पुरस्कार के लिए उनका नाम विख्यात समाजवादी नेता मोहन धारिया जी ने चार महीने पहले किया था।
Thursday, January 26, 2012
प्रहार और प्रतिरोधक क्षमता का नायाब नजारा

राजपथ ने 63वें गणतंत्र दिवस पर सशस्त्र सेनाओं के शौर्य, क्षमता और मुल्क की सांस्कृतिक संपदा का झरोखा खोल दिया। गणतंत्र दिवस परेड में नजर आई अग्नि-4 मिसाइल और प्रहार प्रक्षेपास्त्रों ने सैन्य प्रहार शक्ति की बानगी पेश की तो मानवरहित टोही विमान रुस्तम, बारूदी सुरंगों को उखाड़ फेंकने वाले टी-72 टैंक व एक साथ अनेक फ्रीक्वेंसियों को जाम कर देने वाले जैमर स्टेशन ने प्रतिरोधक क्षमता का नमूना दिखाया।
राजधानी में बुधवार सुबह गणतंत्र दिवस समारोह का आगाज 20 अगस्त, 2011 को देश के लिए जान न्योछावर करने वाले सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह को अशोक चक्र प्रदान करने के साथ हुआ। मरणोपरांत अपने बेटे के लिए शांतिकाल का सर्वोच्च बहादुरी पदक पिता जोगिंदर सिंह ने जब राष्ट्रपति से हासिल किया तो उनका सीना फख्र से चौड़ा था, लेकिन शहीद नवदीप की मां की आंखें नम।
दिल्ली क्षेत्र के लेफ्टिनेंट जनरल अफसर वीके पिल्लै की अगुआई में शुरू हुई परेड में दो परमवीर चक्र प्राप्त योद्धाओं और सात अशोक चक्र विजेताओं ने भी राष्ट्रपति को सलामी दी। भारत के गणतंत्र बनने की 62वीं सालगिरह के मौके पर परेड की सलामी तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने ली। सैन्य क्षमता और सांस्कृतिक विविधता को समेटती इस परेड की मुख्य अतिथि थीं थाइलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री एके एंटनी समेत सभी केंद्रीय मंत्री, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और आला सैन्य व असैन्य अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में आए स्कूली बच्चे व नागरिक परेड के साक्षी बने।
सर्द सुबह तीनों सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के 20 मार्चिग दस्तों से लेकर अपनी गर्जना से दहलाने वाले वायुसेना के विमानों ने धरती और आसमान पर भारत की उभरती ताकत के दस्तखत उकेरे। पैरों को थिरकाने वाली संगीत धुनों पर आई सांस्कृतिक टोलियों ने उभरते भारत की नई तस्वीर खींची। परेड में इस बार बीते दिनों अमेरिका से खरीदे गए तीन सी-130जे बहुउद्देश्यीय विमान भी शामिल थे। यह पहला मौका था जब गणतंत्र दिवस परेड में मेड-इन-अमेरिका विमान ने भारतीय परचम लहराया। पहली बार नाभिकीय हथियारों के साथ तीन हजार किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-4 मिसाइल का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] ने 150 किमी तक मार करने वाले 'प्रहार' प्रक्षेपास्त्र का प्रदर्शन किया।
सैन्य प्रहार क्षमता की नुमाइश की कड़ी में सेना ने 37.5 किमी मारक क्षमता वाली पिनाक बहुनलीय प्रक्षेपास्त्र लांचर प्रणाली और 40 सेकेंड में 12 रॉकेट दागने वाली रूस से आयातित स्मर्च प्रक्षेपास्त्र प्रणाली राजपथ पर उतारा। नौसेना ने सुरक्षित समुद्र और महफूज तट के अपने लक्ष्य को सिद्ध करने के लिए झांकी की शक्ल में लंबी दूरी की निगरानी में सक्षम आइएल-38 और मानवरहित टोही विमान को दिखाया। वायुसेना के 27 विमानों और तीन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के शानदार फ्लाइपास्ट के नजारे ने भरोसा दोहराया कि भारतीय आसमान के निगहबानों के पास ताकत भी है और काबिलियत भी।
Wednesday, February 2, 2011
1810 में उतार लिया गया था ताज का स्वर्ण कलश
ताजमहल के शिखर पर लगा स्वर्ण कलश ठीक दो सौ वर्ष पूर्व 1810 में उतारा गया था। ठीक दो सदी पहले की यह घटना अपने समय का सबसे चर्चित और ऐसा वाकया थी जिसे अंग्रेज पूरी तरह गुपचुप रखना चाहते थे। बाद में 1811 में इस कलश की जगह तांबे का कलश लगवाया गया जिस पर सोने का पानी चढ़ा था।
हटाए गए सोने का कलश चालीस हजार तोले यानि लगभग चार सौ किलो सोने का था। यह कलश तीस फुट छह इंच ऊंचा था। इसके हटाए जाने का मुख्य कारण ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने के लिए धन जुटाया जाना था। हालांकि ईस्ट इंडियाकंपनी के रिकार्ड में इस आय का कोई साक्ष्य नहीं मिलता।
उतारे गए स्वर्ण कलश का सोना लुट गया। स्वर्ण कलश को हटाये जाने के बाद लगाये गये कलश को अब तक 1876 और 1940 में दो बार और बदला गया। इस प्रकार वर्तमान में ताजमहल के गुंबद पर लगा हुआ कलश बदले जाने के क्रम में चौथा है। जो भी कलश ताजमहल की शोभा बना वह मूल कलश की ही प्रतिकृति है।
कलश की ऊंचाई और आकार के बारे में अक्सर होने वाली पूछताछ के चलते 1888 में ताजमहल के बायीं ओर बने मेहमान खाने के चबूतरे पर काला पत्थर इस्तेमाल कर मूल कलश की अनुकृति बनवा दी गई जो अब भी मौजूद है।
मूल गुंबद से कलश उतरवाने का कार्य आर्थिक लोभ से जरूर किया गया किंतु ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने को इससे कोई लाभ नहीं हुआ। यह बात लोगों से गुंबद की मरम्मत के नाम पर छुपाई गई। राजे के मुताबिक दो सौ साल पहले सोने के कलश को उतरवाने का काम जहां कंपनी सेना में कार्यरत जोजेफ नाम के अधिकारी ने किया था वहीं इसकी काले पत्थर की अनुकृति आगरा के कलाकार नाथू राम ने बनाई।
हटाए गए सोने का कलश चालीस हजार तोले यानि लगभग चार सौ किलो सोने का था। यह कलश तीस फुट छह इंच ऊंचा था। इसके हटाए जाने का मुख्य कारण ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने के लिए धन जुटाया जाना था। हालांकि ईस्ट इंडियाकंपनी के रिकार्ड में इस आय का कोई साक्ष्य नहीं मिलता।
उतारे गए स्वर्ण कलश का सोना लुट गया। स्वर्ण कलश को हटाये जाने के बाद लगाये गये कलश को अब तक 1876 और 1940 में दो बार और बदला गया। इस प्रकार वर्तमान में ताजमहल के गुंबद पर लगा हुआ कलश बदले जाने के क्रम में चौथा है। जो भी कलश ताजमहल की शोभा बना वह मूल कलश की ही प्रतिकृति है।
कलश की ऊंचाई और आकार के बारे में अक्सर होने वाली पूछताछ के चलते 1888 में ताजमहल के बायीं ओर बने मेहमान खाने के चबूतरे पर काला पत्थर इस्तेमाल कर मूल कलश की अनुकृति बनवा दी गई जो अब भी मौजूद है।
मूल गुंबद से कलश उतरवाने का कार्य आर्थिक लोभ से जरूर किया गया किंतु ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने को इससे कोई लाभ नहीं हुआ। यह बात लोगों से गुंबद की मरम्मत के नाम पर छुपाई गई। राजे के मुताबिक दो सौ साल पहले सोने के कलश को उतरवाने का काम जहां कंपनी सेना में कार्यरत जोजेफ नाम के अधिकारी ने किया था वहीं इसकी काले पत्थर की अनुकृति आगरा के कलाकार नाथू राम ने बनाई।
Monday, January 24, 2011
राष्ट्रमंडल खेलों ने अर्श से फर्श पर पहुंचाया कलमाड़ी को
राजनीति, रक्षा और खेल मामलों में मजबूत पकड़ वाली शख्सियत के रूप में चर्चित सुरेश कलमाड़ी के लिए राष्ट्रमंडल खेल बतौर खेल प्रशासक उत्कर्ष बिंदु थे लेकिन यही खेल कलमाड़ी के जीवन पर ऐसा धब्बा लगा गए जिसे मिटाने में शायद उन्हें वर्षो लग जाएंगे। खेल प्रशासक के रूप में कलमाड़ी के कैरियर की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन रहा लेकिन इन खेलों में भ्रष्टाचार और अनियमिताओं के आरोपों से वह इतने बुरी तरह घिरे कि उन्हें पहली बार जीवन में हर कदम पर नीचा देखना पड़ा। कलमाड़ी पिछले 15 साल से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं और इस दौरान उन्होंने देश में एफ्रो एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन करवाया लेकिन लगता है कि 67 वर्षीय खेल प्रशासक की कार्यशैली ही उनकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई क्योंकि विभिन्न खेल महासंघों में काबिज उनके साथियों ने उन पर 'तानाशाह' होने का आरोप लगाया।
कलमाड़ी को आज राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति से बर्खास्त किया जाना खेल प्रशासक के तौर उनके कैरियर के अंत का संकेत माना जा रहा है। वह अब भी खेलों से जुड़ी संस्थाओं में कई पदों पर काबिज हैं जिनमें आईओए प्रमुख है।
कलमाड़ी 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए नई दिल्ली की दावेदारी पेश करने वाली समिति के अध्यक्ष थे।
भारत में कई राजनीतिज्ञों की तरह कलमाड़ी भी पिछले लंबे समय से खेल और राजनीति दोनों नावों पर सवार हैं। अभी पुणे से लोकसभा सदस्य कलमाड़ी 1996 से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं। उन्हें वर्ष 2008 में चौथी बार इस पर चुना गया और उनका कार्यकाल वर्ष 2012 तक का है। यदि खेल मंत्रालय की कार्यकाल संबंधी दिशानिर्देश लागू होते हैं तो फिर कलमाड़ी आगे इस पर काबिज नहीं हो पाएंगे।
वर्ष 1982 से वर्ष 2004 तक चार बार राज्यसभा सदस्य और क्क्वीं तथा क्ब्वीं लोकसभा के सदस्य रहे कलमाड़ी वर्ष 2001 से लगातार एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष हैं। वह वर्ष 1989 से 2006 तक भारतीय एथलेटिक्टस संघ के भी अध्यक्ष रहे जिसके बाद उन्हें इस संघ का आजीवन अध्यक्ष बना दिया गया।
कलमाड़ी की अध्यक्षता में ही वर्ष 2003 में हैदराबाद में एफ्रो एशियन गेम्स का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। वर्ष 2008 में पुणे में हुए राष्ट्रमंडल युवा खेल भी कलमाड़ी की ही अध्यक्षता में आयोजित हुए।
एक मई 1944 को जन्मे कलमाड़ी की शिक्षा पुणे के सेंट विंसेंट हाई स्कूल और फिर फर्गुसन कालेज में हुई। वर्ष 1960 में वह खड़कवासला, पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हुए जिसके बाद उन्होंने 1964 में एयर फोर्स फ्लाइंग कालेज, जोधपुर में प्रवेश किया। कलमाड़ी ने 1964 से 72 तक वायु सेना में अपनी सेवाएं दीं और भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके सराहनीय सेवाओं के लिए आठ पदकों से नवाजा गया।
कलमाड़ी को आज राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति से बर्खास्त किया जाना खेल प्रशासक के तौर उनके कैरियर के अंत का संकेत माना जा रहा है। वह अब भी खेलों से जुड़ी संस्थाओं में कई पदों पर काबिज हैं जिनमें आईओए प्रमुख है।
कलमाड़ी 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए नई दिल्ली की दावेदारी पेश करने वाली समिति के अध्यक्ष थे।
भारत में कई राजनीतिज्ञों की तरह कलमाड़ी भी पिछले लंबे समय से खेल और राजनीति दोनों नावों पर सवार हैं। अभी पुणे से लोकसभा सदस्य कलमाड़ी 1996 से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं। उन्हें वर्ष 2008 में चौथी बार इस पर चुना गया और उनका कार्यकाल वर्ष 2012 तक का है। यदि खेल मंत्रालय की कार्यकाल संबंधी दिशानिर्देश लागू होते हैं तो फिर कलमाड़ी आगे इस पर काबिज नहीं हो पाएंगे।
वर्ष 1982 से वर्ष 2004 तक चार बार राज्यसभा सदस्य और क्क्वीं तथा क्ब्वीं लोकसभा के सदस्य रहे कलमाड़ी वर्ष 2001 से लगातार एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष हैं। वह वर्ष 1989 से 2006 तक भारतीय एथलेटिक्टस संघ के भी अध्यक्ष रहे जिसके बाद उन्हें इस संघ का आजीवन अध्यक्ष बना दिया गया।
कलमाड़ी की अध्यक्षता में ही वर्ष 2003 में हैदराबाद में एफ्रो एशियन गेम्स का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। वर्ष 2008 में पुणे में हुए राष्ट्रमंडल युवा खेल भी कलमाड़ी की ही अध्यक्षता में आयोजित हुए।
एक मई 1944 को जन्मे कलमाड़ी की शिक्षा पुणे के सेंट विंसेंट हाई स्कूल और फिर फर्गुसन कालेज में हुई। वर्ष 1960 में वह खड़कवासला, पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हुए जिसके बाद उन्होंने 1964 में एयर फोर्स फ्लाइंग कालेज, जोधपुर में प्रवेश किया। कलमाड़ी ने 1964 से 72 तक वायु सेना में अपनी सेवाएं दीं और भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके सराहनीय सेवाओं के लिए आठ पदकों से नवाजा गया।
Saturday, January 15, 2011
भारत में धार्मिक स्वतंत्रता है बेमिसाल
दुनियाभर में आधुनिकता और सहिष्णुता की शिक्षा के प्रचार प्रसार के बावजूद मजहबी कट्टरपन बढ़ रहा है और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं। हालांकि भारत के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता और दूसरे देश भारत की धार्मिक स्वतंत्रता को बेमिसाल मानते हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता पर निगरानी रखने वाली अंतरराष्ट्रीय समिति के अनुसार कट्टरपंथी ताकतें अपने धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर दूसरे धर्म के अनुयायियों को दबाने की कोशिशें करती रहती हैं। विशेषज्ञ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कबाइली इलाकों को इस बात का जीता जागता उदाहरण करार देते हैं जहां कट्टरपंथी तालिबान कभी अल्पसंख्यक सिखों को भयभीत करता है तो कभी उदार मुसलमानों को निशाना बनाता है। शियाओं की मस्जिदों और पीर-फकीरों की मजारों पर हमले कर निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार देता है।
धार्मिक स्वतंत्रता निगरानी समिति ने हाल ही में भारत में भी धार्मिक स्वतंत्रता का अध्ययन किया और कहा कि इस मामले में कुल मिलाकर भारत की स्थिति अच्छी है। समिति ने कहा कि भारत के लोग उदार हैं और अल्पसंख्यक निर्भीक होकर अपने धर्म का पालन करते हैं। उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। कुछ राज्य सरकारें धर्म परिवर्तन विरोधी कानून बनाकर धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश करती हैं।
भारत धार्मिक स्वतंत्रता का जीता जागता उदाहरण है जहां सभी धर्म और संप्रदायों के लोग बिना किसी डर के अपने धार्मिक कार्य कलापों को अंजाम देते हैं।
देश में हालांकि कभी कभार धर्म के नाम पर दंगे हो जाते हैं लेकिन इनके पीछे धार्मिक स्वतंत्रता को दबाने का उद्देश्य नहीं होता। अमेरिका जैसा देश भी भारत की धार्मिक सहिष्णुता की दाद देता है। हाल ही में विकीलीक्स द्वारा सार्वजनिक किए गए एक गोपनीय अमेरिकी राजनयिक संदेश से भी विदेशों में भारत की धर्म निरपेक्ष छवि स्पष्ट हो जाती है।
अमेरिका भारत की धर्म निरपेक्षता से सीख ले सकता है जहां बहु धर्मीय बहु संस्कृति औ बहु जातीय समाज है तथा सभी स्वतंत्रता के साथ जीते हैं और अपने धार्मिक कार्यकलापों को स्वतंत्र होकर संपन्न करते हैं।
आज पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सूडान, इराक, यमन, नाइजीरिया और इनके अतिरिक्त बहुत से मुल्कों में हिंसा चरम पर है जिसके पीछे कहीं न कहीं धार्मिक कट्टरपन जिम्मेदार है।
भारत में धर्म के नाम पर कभी कभार दंगे बेशक होते हों, लेकिन फिर भी किसी की धार्मिक स्वतंत्रता पर कभी आंच नहीं आती जिसका श्रेय भारतीय जनमानस की उदारता और देश के संविधान को दिया जाना चाहिए।
धार्मिक स्वतंत्रता पर निगरानी रखने वाली अंतरराष्ट्रीय समिति के अनुसार कट्टरपंथी ताकतें अपने धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर दूसरे धर्म के अनुयायियों को दबाने की कोशिशें करती रहती हैं। विशेषज्ञ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कबाइली इलाकों को इस बात का जीता जागता उदाहरण करार देते हैं जहां कट्टरपंथी तालिबान कभी अल्पसंख्यक सिखों को भयभीत करता है तो कभी उदार मुसलमानों को निशाना बनाता है। शियाओं की मस्जिदों और पीर-फकीरों की मजारों पर हमले कर निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार देता है।
धार्मिक स्वतंत्रता निगरानी समिति ने हाल ही में भारत में भी धार्मिक स्वतंत्रता का अध्ययन किया और कहा कि इस मामले में कुल मिलाकर भारत की स्थिति अच्छी है। समिति ने कहा कि भारत के लोग उदार हैं और अल्पसंख्यक निर्भीक होकर अपने धर्म का पालन करते हैं। उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। कुछ राज्य सरकारें धर्म परिवर्तन विरोधी कानून बनाकर धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश करती हैं।
भारत धार्मिक स्वतंत्रता का जीता जागता उदाहरण है जहां सभी धर्म और संप्रदायों के लोग बिना किसी डर के अपने धार्मिक कार्य कलापों को अंजाम देते हैं।
देश में हालांकि कभी कभार धर्म के नाम पर दंगे हो जाते हैं लेकिन इनके पीछे धार्मिक स्वतंत्रता को दबाने का उद्देश्य नहीं होता। अमेरिका जैसा देश भी भारत की धार्मिक सहिष्णुता की दाद देता है। हाल ही में विकीलीक्स द्वारा सार्वजनिक किए गए एक गोपनीय अमेरिकी राजनयिक संदेश से भी विदेशों में भारत की धर्म निरपेक्ष छवि स्पष्ट हो जाती है।
अमेरिका भारत की धर्म निरपेक्षता से सीख ले सकता है जहां बहु धर्मीय बहु संस्कृति औ बहु जातीय समाज है तथा सभी स्वतंत्रता के साथ जीते हैं और अपने धार्मिक कार्यकलापों को स्वतंत्र होकर संपन्न करते हैं।
आज पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सूडान, इराक, यमन, नाइजीरिया और इनके अतिरिक्त बहुत से मुल्कों में हिंसा चरम पर है जिसके पीछे कहीं न कहीं धार्मिक कट्टरपन जिम्मेदार है।
भारत में धर्म के नाम पर कभी कभार दंगे बेशक होते हों, लेकिन फिर भी किसी की धार्मिक स्वतंत्रता पर कभी आंच नहीं आती जिसका श्रेय भारतीय जनमानस की उदारता और देश के संविधान को दिया जाना चाहिए।
एक और काली 14 जनवरी
केरल के सबरीमाला में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कल की 14 जनवरी एक बार फिर काली साबित हुई। इसके पहले यहां दो बार 14 जनवरी को हादसे हो चुके हैं।
इस धार्मिक स्थल पर 14 जनवरी को पहली दुर्घटना 1952 में हुई। इस दिन यहां पटाखों के कारण आग लग गई, जिससे भगवान अयप्पा के 66 भक्तों की मौत हो गई।
14 जनवरी 1999 को पंपा में 'मकर ज्योति' के दर्शन के बाद मची भगदड़ में 52 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। कल की तरह उस दिन भी यहां बहुत भीड़ थी। उस समय मरने वाले ज्यादातर लोगों में आंध्र प्रदेश के निवासी शामिल थे।
'मकर ज्योति' के दर्शन के लिए लाखों लोग यहां जमा होते हैं।
साल 1998 के हादसे के बाद सरकार भीड़ प्रबंधन के लिए कड़े उपाय कर रही है और इसके लिए वैज्ञानिक तरीके भी अपना रही है। इसी के परिणामस्वरूप इस बार श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा का अब तक का समय हादसों से मुक्त रहा था।
इस धार्मिक स्थल पर 14 जनवरी को पहली दुर्घटना 1952 में हुई। इस दिन यहां पटाखों के कारण आग लग गई, जिससे भगवान अयप्पा के 66 भक्तों की मौत हो गई।
14 जनवरी 1999 को पंपा में 'मकर ज्योति' के दर्शन के बाद मची भगदड़ में 52 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। कल की तरह उस दिन भी यहां बहुत भीड़ थी। उस समय मरने वाले ज्यादातर लोगों में आंध्र प्रदेश के निवासी शामिल थे।
'मकर ज्योति' के दर्शन के लिए लाखों लोग यहां जमा होते हैं।
साल 1998 के हादसे के बाद सरकार भीड़ प्रबंधन के लिए कड़े उपाय कर रही है और इसके लिए वैज्ञानिक तरीके भी अपना रही है। इसी के परिणामस्वरूप इस बार श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा का अब तक का समय हादसों से मुक्त रहा था।
Thursday, December 30, 2010
इंजीनियरिंग के लिए 12 वीं के मार्क्स को मिलेगी वेटेज
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि सरकार इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (आईआईटी) के एंट्रेंस के पूरे सिस्टम को बदलने जा रही है। सिब्बल ने कहा कि बढ़िया स्टूडेंट्स के आईआईटी में दाखिले के लिए जरूरी है कि मौजूदा कोचिंग सिस्टम खत्म किया जाए।
शुक्रवार को आईआईटी काउंसिल की बैठक के बाद सिब्बल ने कहा कि इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम के पैटर्न में बदलाव की सिफारिश मंत्रालय ने पहले भी की थी। आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर दामोदर आचार्य के तहत एक कमिटी बनी थी जिसने इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए 12वीं के रिजल्ट को वेटेज देने और जेईई से पहले नैशनल लेवल का एप्टिट्यूड टेस्ट लेने की बात कही थी। कमिटी अपनी रिपोर्ट दे चुकी है और इस बात पर सभी रजामंद हैं कि एंट्रेंस एग्जाम के सिस्टम को बदलने की जरूरत है। नया सिस्टम कैसा हो, यह अभी फाइनल किया जाना बाकी है।
सिब्बल ने कहा कि हमें स्टूडेंट के 12वीं लेवल पर परफॉर्मेंस को भी देखना चाहिए... वरना कुछ राज्यों के स्टूडेंट्स तो आईआईटी में एडमिशन ले ही नहीं पाएंगे। 12वीं के एग्जाम के मार्क्स को वेटेज दी जाएगी और ये मार्क्स पूरे साल स्टूडेंट की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होंगे। इससे कोचिंग का ट्रेंड अपने आप खत्म हो जाएगा।
सिब्बल ने कहा कि साइंस ऐंड टेक्नॉलजी सेक्रेटरी टी. रामासामी के तहत एक कमिटी बनाई गई है और यह अपनी रिपोर्ट तीन महीने में पेश करेगी। इसके बाद हम सभी आईआईटी के साथ रिपोर्ट पर चर्चा करेंगे। सभी आईआईटी ने कहा है कि वे जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम को जारी रखना चाहते हैं। पर अगर विकल्प दिया जाएगा तो वे अपनी फैकल्टी के साथ उसे डिस्कस करेंगे।
विदेशी स्टूडेंट्स और फैकल्टी: आईआईटी में विदेशी स्टूडेंट्स और परमानेंट विदेशी फैकल्टी को भी शामिल किया जाएगा। विदेशी स्टूडेंट्स का पर्सेंट 25 तक होगा और उन्हें पीजी लेवल पर ही एडमिशन मिलेगा। विदेशी फैकल्टी 10 पर्सेंट से ज्यादा नहीं रखी जाएगी। विदेशी स्टूडेंट्स की सीटें पहले से मौजूद भारतीय छात्रों की सीटों के अलावा जोड़ी जाएंगी।
मेडिकल स्ट्रीम भी जुड़ेगी: सिब्बल ने कहा कि आईआईटी में पीजी लेवल पर मेडिसिन और मेडिकल रिसर्च के कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। चूंकि मेडिसिन फील्ड में इंजीनियरिंग तकनीक की बेहद जरूरत होती है, इसलिए आईआईटी में मेडिसिन कोर्स की जरूरत महसूस की गई। इस बारे में मेडिकल काउंसिल से अप्रूवल मिलने के बाद आईआईटी एक्ट में जरूरी बदलाव भी किए जा सकते हैं।
शुक्रवार को आईआईटी काउंसिल की बैठक के बाद सिब्बल ने कहा कि इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम के पैटर्न में बदलाव की सिफारिश मंत्रालय ने पहले भी की थी। आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर दामोदर आचार्य के तहत एक कमिटी बनी थी जिसने इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए 12वीं के रिजल्ट को वेटेज देने और जेईई से पहले नैशनल लेवल का एप्टिट्यूड टेस्ट लेने की बात कही थी। कमिटी अपनी रिपोर्ट दे चुकी है और इस बात पर सभी रजामंद हैं कि एंट्रेंस एग्जाम के सिस्टम को बदलने की जरूरत है। नया सिस्टम कैसा हो, यह अभी फाइनल किया जाना बाकी है।
सिब्बल ने कहा कि हमें स्टूडेंट के 12वीं लेवल पर परफॉर्मेंस को भी देखना चाहिए... वरना कुछ राज्यों के स्टूडेंट्स तो आईआईटी में एडमिशन ले ही नहीं पाएंगे। 12वीं के एग्जाम के मार्क्स को वेटेज दी जाएगी और ये मार्क्स पूरे साल स्टूडेंट की परफॉर्मेंस के आधार पर तय होंगे। इससे कोचिंग का ट्रेंड अपने आप खत्म हो जाएगा।
सिब्बल ने कहा कि साइंस ऐंड टेक्नॉलजी सेक्रेटरी टी. रामासामी के तहत एक कमिटी बनाई गई है और यह अपनी रिपोर्ट तीन महीने में पेश करेगी। इसके बाद हम सभी आईआईटी के साथ रिपोर्ट पर चर्चा करेंगे। सभी आईआईटी ने कहा है कि वे जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम को जारी रखना चाहते हैं। पर अगर विकल्प दिया जाएगा तो वे अपनी फैकल्टी के साथ उसे डिस्कस करेंगे।
विदेशी स्टूडेंट्स और फैकल्टी: आईआईटी में विदेशी स्टूडेंट्स और परमानेंट विदेशी फैकल्टी को भी शामिल किया जाएगा। विदेशी स्टूडेंट्स का पर्सेंट 25 तक होगा और उन्हें पीजी लेवल पर ही एडमिशन मिलेगा। विदेशी फैकल्टी 10 पर्सेंट से ज्यादा नहीं रखी जाएगी। विदेशी स्टूडेंट्स की सीटें पहले से मौजूद भारतीय छात्रों की सीटों के अलावा जोड़ी जाएंगी।
मेडिकल स्ट्रीम भी जुड़ेगी: सिब्बल ने कहा कि आईआईटी में पीजी लेवल पर मेडिसिन और मेडिकल रिसर्च के कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। चूंकि मेडिसिन फील्ड में इंजीनियरिंग तकनीक की बेहद जरूरत होती है, इसलिए आईआईटी में मेडिसिन कोर्स की जरूरत महसूस की गई। इस बारे में मेडिकल काउंसिल से अप्रूवल मिलने के बाद आईआईटी एक्ट में जरूरी बदलाव भी किए जा सकते हैं।
Wednesday, December 29, 2010
आरुषि के मर्डर की गुत्थी नहीं सुलाझा पाई सीबीआई
नोएडा के बहुचर्चित आरुषि तलवार मर्डर केस में करीब ढाई साल की जांच के बाद भी केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई ) के हाथ कुछ भी नहीं लगा। सीबीआई ने गाजियाबाद के स्पेशल कोर्ट में जांच करने के लिए पर्याप्त सबूत न मिलने की बात कहते हुए इसकी जांच को बंद करने की रिपोर्ट फाइल कर दी। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि उसे घटना स्थल पर पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए थे।।
नोएडा के जलवायु विहार अपार्टमेंट में 16 मई 2008 को आरुषि का शव मिला था। अगले ही दिन यानी 17 मई को घर की छत पर नौकर हेमराज भी मृत मिला था। 15 दिनों तक केस पर काम करने के बाद यूपी पुलिस के किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाने के कारण इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। एक जून 2008 को जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व में सीबीआई ने आरुषि के पिता राजेश तलवार की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले की जांच शुरू की।
राजेश तलवार 50 दिनों तक जेल में भी रहे थे। बीआई ने इस मामले में आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार के कपाउंडर कृष्णा को आरोपी बनाया था। उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना था कि शवों के पोस्टमार्टम के बाद यह बात सामने आई कि दोनों हत्याओं में एक ही तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया।
वह बहुत होनहार थी। उसके हौसले भी बुलंद थे, लेकिन उसके सारे सपनों को चूर कर दिया उसे बेरहमी से कत्ल करने वालों ने। दो साल पहले आरुषि तलवार का नोएडा के जलवायु विहार स्थित उसके घर में बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था। आरुषि जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करना चाहती थी। उसे पढ़ाई के साथ हर एक्टिविटी में आगे रहना पसंद था। आरुषि के दोस्तों का कहना है कि वह एक इंटेलिजेंट लड़की थी।
उसे डांस बहुत पसंद था। अपनी परफॉर्मेंस को और बेहतर बनाने के लिए वह नोएडा के एक डांस इंस्टिट्यूट से क्लास ले रही थी। वह सालसा डांस में बेहतरीन प्रदर्शन करना चाहती थी। उसकी अच्छी परफॉर्मेंस का ही नतीजा था कि उसे एक शो में जल्द ही पूर्व मिस वर्ल्ड युक्ता मुखी के साथ परफॉर्म करने का मौका मिलने वाला था। आकांक्षा बताती है कि उसे तो मौके की तलाश होती थी, फिर तो वह छोटी से छोटी पार्टी में भी डांस करना नहीं छोड़ती थी। फिल्मी गानों पर तो यूं ही थिरकने लगती थी। उसे स्विमिंग का भी काफी शौक था। एक प्राइवेट ट्रेनिंग संस्थान से वह स्विमिंग की ट्रेनिंग ले रही थी। उसे फ्रेशनेस और अच्छी फिटनेस के लिए भी स्विमिंग करना पसंद था।
स्कूल में भी हमेशा अव्वल रहती। उसे स्कूल में स्कॉलर प्लेजर मिला था। यह उसी को मिलता है जो एग्जाम में अच्छा स्कोर करे। चाहे डिबेट हो या क्विज, वह हर प्रतियोगिता में हिस्सा लेती थी। उसे कविताएं लिखना भी पसंद था। एक अच्छी और पढ़ाई में होशियार छात्र होने के नाते उसे स्कूल के लगभग सभी टीचर जानते थे। उसके सीनियर छात्रों के मुताबिक वह बहुत खुशमिजाज थी और अपने से बड़े स्टूडेंट्स को पूरी इज्जत देती थी। अंकिता बताती है कि स्कूल में होने वाले हर कॉम्पिटिशन में वह हिस्सा लेती थी और अधिकतर में अव्वल रहती। सभी के साथ वह अच्छा बिहैव करती थी।
आरुषि-हेमराज मर्डर को देश की सबसे बड़ी मिस्ट्री बनने की वजह घटनास्थल से सबूत जुटाने में हुई पुलिस की लापरवाही है। पुलिस ने घटनास्थल से फोटो लेने में भी लापरवाही की थी। महज दो-तीन एंगल से ही फोटो लिए गए थे। घटना के दो दिनों बाद तक हेमराज के कमरे में पड़ी शराब की बोतल और तीन ग्लास को भी कब्जे में नहीं लिया गया था। आरुषि के कमरे में ब्लड और कुछ गिरे हुए बाल को भी नहीं उठाया गया था। इसलिए जांच की दिशा तय करने में ही परेशानी हो रही है।
पुलिस ने शुरुआती जांच में जमकर लापरवाही बरती। अगर पुलिस ने साइंटिफिक एविडेंस कलेक्ट किए होते तो जांच आसान हो जाती। 16 मई को आरुषि की डेड बॉडी मिलने के दूसरे दिन रिटायर्ड डिप्टी एसपी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मुआयना करने के दौरान ही साक्ष्यों को नहीं उठाए जाने को देख मैं बारीकी से पड़ताल करने लगा। घर के बाहर सीढ़ी की रेलिंग पर कुछ ब्लड स्पॉट दिखे। छत के दरवाजे पर भी कुछ निशान देखा। इसलिए तत्कालीन थाना प्रभारी की मदद से दरवाजे का ताला तोड़ा और छत पर पहुंचे तो हेमराज की डेड बॉडी मिली। इसके बाद केस में नया मोड़ आया था।
कातिल को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। जहां तक मेरी तफ्तीश है तो तलवार दंपती और नौकरों, दोनों पर शक की सूई है। हेमराज के कमरे में मिली शराब की बोतल और तीन ग्लास से नौकरों पर शक है। आरुषि के कमरे से ली गई तस्वीरों को देखने से साफ होता है कि उसके साथ जबर्दस्ती की गई, जिसे अभी तक छिपाया गया है। आशंका इस बात की भी है कि देर रात दो या तीन लोग हेमराज के कमरे में दाखिल हुए। उन्होंने मिलकर देर रात शराब पी। इसके बाद नशे में इस घटना को अंजाम दे दिया। हेमराज इस घटना का चश्मदीद बन गया, इसलिए बहाने से उसे छत पर ले जाकर ठिकाने लगा दिया गया।
वहीं, तलवार दंपती पर शक इसलिए होता है कि 16 मई की सुबह बहुत जल्दबाजी में ब्लड के निशान को साफ कर दिया गया। खून से गद्दे को डॉ. तलवार की छत के बजाय पड़ोसी की छत पर रख दिया गया। ऐसा आखिर क्यों किया गया? अगर तलवार की छत के गेट पर लगे लॉक की चाबी नहीं थी तो उसे तोड़ देना चाहिए था। जबकि ऐसा नहीं किया गया।
नोएडा के जलवायु विहार अपार्टमेंट में 16 मई 2008 को आरुषि का शव मिला था। अगले ही दिन यानी 17 मई को घर की छत पर नौकर हेमराज भी मृत मिला था। 15 दिनों तक केस पर काम करने के बाद यूपी पुलिस के किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाने के कारण इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। एक जून 2008 को जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व में सीबीआई ने आरुषि के पिता राजेश तलवार की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले की जांच शुरू की।
राजेश तलवार 50 दिनों तक जेल में भी रहे थे। बीआई ने इस मामले में आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार के कपाउंडर कृष्णा को आरोपी बनाया था। उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना था कि शवों के पोस्टमार्टम के बाद यह बात सामने आई कि दोनों हत्याओं में एक ही तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया।
वह बहुत होनहार थी। उसके हौसले भी बुलंद थे, लेकिन उसके सारे सपनों को चूर कर दिया उसे बेरहमी से कत्ल करने वालों ने। दो साल पहले आरुषि तलवार का नोएडा के जलवायु विहार स्थित उसके घर में बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था। आरुषि जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करना चाहती थी। उसे पढ़ाई के साथ हर एक्टिविटी में आगे रहना पसंद था। आरुषि के दोस्तों का कहना है कि वह एक इंटेलिजेंट लड़की थी।
उसे डांस बहुत पसंद था। अपनी परफॉर्मेंस को और बेहतर बनाने के लिए वह नोएडा के एक डांस इंस्टिट्यूट से क्लास ले रही थी। वह सालसा डांस में बेहतरीन प्रदर्शन करना चाहती थी। उसकी अच्छी परफॉर्मेंस का ही नतीजा था कि उसे एक शो में जल्द ही पूर्व मिस वर्ल्ड युक्ता मुखी के साथ परफॉर्म करने का मौका मिलने वाला था। आकांक्षा बताती है कि उसे तो मौके की तलाश होती थी, फिर तो वह छोटी से छोटी पार्टी में भी डांस करना नहीं छोड़ती थी। फिल्मी गानों पर तो यूं ही थिरकने लगती थी। उसे स्विमिंग का भी काफी शौक था। एक प्राइवेट ट्रेनिंग संस्थान से वह स्विमिंग की ट्रेनिंग ले रही थी। उसे फ्रेशनेस और अच्छी फिटनेस के लिए भी स्विमिंग करना पसंद था।
स्कूल में भी हमेशा अव्वल रहती। उसे स्कूल में स्कॉलर प्लेजर मिला था। यह उसी को मिलता है जो एग्जाम में अच्छा स्कोर करे। चाहे डिबेट हो या क्विज, वह हर प्रतियोगिता में हिस्सा लेती थी। उसे कविताएं लिखना भी पसंद था। एक अच्छी और पढ़ाई में होशियार छात्र होने के नाते उसे स्कूल के लगभग सभी टीचर जानते थे। उसके सीनियर छात्रों के मुताबिक वह बहुत खुशमिजाज थी और अपने से बड़े स्टूडेंट्स को पूरी इज्जत देती थी। अंकिता बताती है कि स्कूल में होने वाले हर कॉम्पिटिशन में वह हिस्सा लेती थी और अधिकतर में अव्वल रहती। सभी के साथ वह अच्छा बिहैव करती थी।
आरुषि-हेमराज मर्डर को देश की सबसे बड़ी मिस्ट्री बनने की वजह घटनास्थल से सबूत जुटाने में हुई पुलिस की लापरवाही है। पुलिस ने घटनास्थल से फोटो लेने में भी लापरवाही की थी। महज दो-तीन एंगल से ही फोटो लिए गए थे। घटना के दो दिनों बाद तक हेमराज के कमरे में पड़ी शराब की बोतल और तीन ग्लास को भी कब्जे में नहीं लिया गया था। आरुषि के कमरे में ब्लड और कुछ गिरे हुए बाल को भी नहीं उठाया गया था। इसलिए जांच की दिशा तय करने में ही परेशानी हो रही है।
पुलिस ने शुरुआती जांच में जमकर लापरवाही बरती। अगर पुलिस ने साइंटिफिक एविडेंस कलेक्ट किए होते तो जांच आसान हो जाती। 16 मई को आरुषि की डेड बॉडी मिलने के दूसरे दिन रिटायर्ड डिप्टी एसपी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मुआयना करने के दौरान ही साक्ष्यों को नहीं उठाए जाने को देख मैं बारीकी से पड़ताल करने लगा। घर के बाहर सीढ़ी की रेलिंग पर कुछ ब्लड स्पॉट दिखे। छत के दरवाजे पर भी कुछ निशान देखा। इसलिए तत्कालीन थाना प्रभारी की मदद से दरवाजे का ताला तोड़ा और छत पर पहुंचे तो हेमराज की डेड बॉडी मिली। इसके बाद केस में नया मोड़ आया था।
कातिल को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। जहां तक मेरी तफ्तीश है तो तलवार दंपती और नौकरों, दोनों पर शक की सूई है। हेमराज के कमरे में मिली शराब की बोतल और तीन ग्लास से नौकरों पर शक है। आरुषि के कमरे से ली गई तस्वीरों को देखने से साफ होता है कि उसके साथ जबर्दस्ती की गई, जिसे अभी तक छिपाया गया है। आशंका इस बात की भी है कि देर रात दो या तीन लोग हेमराज के कमरे में दाखिल हुए। उन्होंने मिलकर देर रात शराब पी। इसके बाद नशे में इस घटना को अंजाम दे दिया। हेमराज इस घटना का चश्मदीद बन गया, इसलिए बहाने से उसे छत पर ले जाकर ठिकाने लगा दिया गया।
वहीं, तलवार दंपती पर शक इसलिए होता है कि 16 मई की सुबह बहुत जल्दबाजी में ब्लड के निशान को साफ कर दिया गया। खून से गद्दे को डॉ. तलवार की छत के बजाय पड़ोसी की छत पर रख दिया गया। ऐसा आखिर क्यों किया गया? अगर तलवार की छत के गेट पर लगे लॉक की चाबी नहीं थी तो उसे तोड़ देना चाहिए था। जबकि ऐसा नहीं किया गया।
डरबन में भारत ने साउथ अफ्रीका को हराया
वीवीएस लक्ष्मण की जादूगरी और बोलर्स के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 87 रन से हराकर सीरीज में वापसी कर ली। इस जीत के साथ ही भारत इस सीरीज में 1-1 से बराबरी पर आ गया। वीवीएस लक्ष्मण को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
भारत का 303 रन का लक्ष्य किंग्समीड की असमान उछाल लेती पिच पर दक्षिण अफ्रीका के लिए पहाड़ जैसा बन गया और उसकी पूरी टीम इस कम स्कोर वाले मैच के चौथे दिन दूसरे सेशन में 215 रन पर सिमट गई। जहीर खान और एस श्रीशांत ने तीन-तीन जबकि हरभजन सिंह ने दो विकेट लिए।
इस तरह से भारत ने सेंचुरियन में पहले टेस्ट मैच में पारी और 125 रन की करारी हार का बदला चुकता कर लिया। इसके साथ ही यह सुनिश्चित कर दिया कि एक अप्रैल तक उसका नंबर एक का ताज सुरक्षित रहेगा। दक्षिण अफ्रीका को इस बार भी दूसरे नंबर से ही संतोष करना पड़ेगा। भारत की यह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कुल सातवीं और उसकी सरजमीं पर दूसरी जीत है। इससे पहले उसने दिसंबर 2006 में जोहानिसबर्ग में पहला टेस्ट मैच 123 रन से जीता था।
दक्षिण अफ्रीका ने सुबह जब तीन विकेट 111 रन से आगे खेलना शुरू किया तो दोनों टीमों का पलड़ा बराबरी पर लग रहा था।
लेकिन जाक कालिस और एबी डिविलियर्स दोनों सहजता से नहीं खेल पाए। इन दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 41 रन की पार्टनरशिप हुई। श्रीशांत ने कालिस को आउट कर इस पार्टनरशिप को तोड़ी।
पिच से असमान उछाल मिल रही थी और श्रीशांत ने इसी का फायदा उठाकर कालिस को शॉर्ट पिच बॉल फेंकी। इस अनुभवी बल्लेबाज ने उसे छोड़ना चाहा लेकिन वह उनके दस्तानों को चूमती हुई गली में वीरेंद्र सहवाग के हाथों में चली गई। कालिस ने 17 रन बनाए जिसके लिए उन्होंने 52 गेंद खेली और 2 चौके लगाए।
हरभजन ने दूसरे खतरनाक बल्लेबाज डिविलियर्स (33) को एलबीडब्ल्यू आउट करके भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी। डिविलियर्स अंपायर के इस फैसले से खुश नहीं थे और टीवी रीप्ले से भी लगा कि इस दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज का भाग्य ने साथ नहीं दिया।
डिविलियर्स के विकेट के बाद जहीर ने 43वें ओवर में मार्क बाउचर को भी एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। हालांकि तब भी लग रहा था कि गेंद मुड़ती हुई ऑफ स्टंप से बाहर जा रही थी।
जहीर ने इसके बाद डेल स्टेन (10) को आउट करके भारत को जीत के करीब ला दिया। स्टेन ने ड्राइव करने का प्रयास किया लेकिन गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर तीसरी स्लिप में चेतेश्वर पुजारा के हाथों में समा गई।
भारत का 303 रन का लक्ष्य किंग्समीड की असमान उछाल लेती पिच पर दक्षिण अफ्रीका के लिए पहाड़ जैसा बन गया और उसकी पूरी टीम इस कम स्कोर वाले मैच के चौथे दिन दूसरे सेशन में 215 रन पर सिमट गई। जहीर खान और एस श्रीशांत ने तीन-तीन जबकि हरभजन सिंह ने दो विकेट लिए।
इस तरह से भारत ने सेंचुरियन में पहले टेस्ट मैच में पारी और 125 रन की करारी हार का बदला चुकता कर लिया। इसके साथ ही यह सुनिश्चित कर दिया कि एक अप्रैल तक उसका नंबर एक का ताज सुरक्षित रहेगा। दक्षिण अफ्रीका को इस बार भी दूसरे नंबर से ही संतोष करना पड़ेगा। भारत की यह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कुल सातवीं और उसकी सरजमीं पर दूसरी जीत है। इससे पहले उसने दिसंबर 2006 में जोहानिसबर्ग में पहला टेस्ट मैच 123 रन से जीता था।
दक्षिण अफ्रीका ने सुबह जब तीन विकेट 111 रन से आगे खेलना शुरू किया तो दोनों टीमों का पलड़ा बराबरी पर लग रहा था।
लेकिन जाक कालिस और एबी डिविलियर्स दोनों सहजता से नहीं खेल पाए। इन दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 41 रन की पार्टनरशिप हुई। श्रीशांत ने कालिस को आउट कर इस पार्टनरशिप को तोड़ी।
पिच से असमान उछाल मिल रही थी और श्रीशांत ने इसी का फायदा उठाकर कालिस को शॉर्ट पिच बॉल फेंकी। इस अनुभवी बल्लेबाज ने उसे छोड़ना चाहा लेकिन वह उनके दस्तानों को चूमती हुई गली में वीरेंद्र सहवाग के हाथों में चली गई। कालिस ने 17 रन बनाए जिसके लिए उन्होंने 52 गेंद खेली और 2 चौके लगाए।
हरभजन ने दूसरे खतरनाक बल्लेबाज डिविलियर्स (33) को एलबीडब्ल्यू आउट करके भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी। डिविलियर्स अंपायर के इस फैसले से खुश नहीं थे और टीवी रीप्ले से भी लगा कि इस दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज का भाग्य ने साथ नहीं दिया।
डिविलियर्स के विकेट के बाद जहीर ने 43वें ओवर में मार्क बाउचर को भी एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। हालांकि तब भी लग रहा था कि गेंद मुड़ती हुई ऑफ स्टंप से बाहर जा रही थी।
जहीर ने इसके बाद डेल स्टेन (10) को आउट करके भारत को जीत के करीब ला दिया। स्टेन ने ड्राइव करने का प्रयास किया लेकिन गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर तीसरी स्लिप में चेतेश्वर पुजारा के हाथों में समा गई।
Subscribe to:
Posts (Atom)

