Sunday, June 20, 2010
Thursday, May 20, 2010
राजीव गांधी का पंचायती राज का अधूरा सपना: राजीव गांधी की पुण्यतिथि 21 मई पर विशेष:

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासनकाल में त्रिस्तरीय पंचायती राज संबंधी जो ऐतिहासिक कानून बनाया गया उसके बारे में आज विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भले ही सत्ता के विकेंद्रीयकरण और महिलाओं के सशक्तीकरण में काफी मदद मिली हो लेकिन आज भी कई लक्ष्य हासिल किए जाने बाकी हैं तथा इसके लिए मजबूत निगरानी प्रणाली की जरूरत है।त्रिस्तरीय पंचायती राज लागू होने के कारण लोकतंत्र को लोगों के द्वार तक पहुंचा दिया गया। इससे निर्णय प्रक्रिया में जन भागीदारी बढ़ी है। लेकिन राजीव गांधी सहित जिन लोगों ने पंचायती राज व्यवस्था के लिए जो लक्ष्य सोचे थे वे अभी तक भ्रष्टाचार, लालफीताशाही आदि के कारण दूर का ख्वाब बने हुए हैं।निस्संदेह राजीव गांधी सरकार के शासनकाल में पारित किए गए पंचायती राज संबंधी कानून के कारण लोकतंत्र को चुस्त बनाने में काफी मदद मिली। आज देश में ढाई लाख पंचायतें एवं 32 लाख चुने हुए प्रतिनिधि हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें 12 लाख महिलाएं चुनकर आई हैं।पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उम्मीदवारों की भागीदारी काफी बढ़ी है, जो हमारे लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।इन सबके बावजूद पंचायती राज के बारे में राजीव गांधी का जो सपना था, वह अभी तक अधूरा है। व्यावहारिक स्तर पर देखने में आता है कि पंचायती राज संस्थाओं की विकास योजनाओं में नौकरशाही अड़चनें पैदा करती है। इसके अलावा पंचायती राज संस्थाओं के मामले में कई राज्य सरकारों का रवैया उपेक्षापूर्ण रहता है।यदि सांसद, विधायक एवं राज्य सरकारें पंचायती राज संस्थाओं के मामले में अधिक रुचि दिखाए तो इन संस्थाओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर विकास के कार्यो को तेज गति से अंजाम दिया जा सकता है।भले ही सरकार के शासनकाल में पंचायती राज संबंधी कानून संसद में पारित किया गया हो लेकिन इसका सारा श्रेय उन्हें ही नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश के प्रमुख नेताओं ने इसका स्वप्न देखा था। यदि पंचायती राज संस्थाएं आज ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं तो इसके लिए कांगे्स अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती क्योंकि कानून लागू होने के बाद करीब सवा दशक तक उनकी सरकार केंद्र में रही।राजीव गांधी कहते थे कि केंद्र से जारी किए गए एक रुपये में से मात्र 15 पैसे ही जनता तक पहुंच पाते हैं। अब उनके पुत्र राहुल गांधी कह रहे हैं कि जनता तक मात्र दस पैसे ही पहुंच पा रहे हैं। स्थिति में जो गिरावट आई है क्या कांगे्स शासित सरकारें उसके लिए दोषी नहीं हैं।आज इस बात की बेहद जरूरत है कि पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कराए जाने वाले कामकाज की 'सोशल आडिट' हो। इससे उनकी जवाबदेही बढ़ेगी। सोशल आडिट नौकरशाहों की बजाय जन प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों से करवाया जाना चाहिए।ग्रामीण आबादी शहरों की तरफ नहीं भागे, यह सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना बेहद जरूरी है। राजीव गांधी ने इसी लक्ष्य के साथ संबंधित कानून बनाने की पहल की थी।राजीव गांधी चाहते थे कि पंचायती राज संस्थाओं को विकास के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल किया जाए। इसके लिए जरूरी है कि विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं को इन संस्थाओं के जरिए लागू करवाया जाए। इससे गांवों के विकास में मदद मिलेगी।आज जमीनी स्तर पर इस बात की जरूरत महसूस की जा रही है कि पंचायती राज संस्थाओं द्वारा खर्च किए जा रहे धन और कराए जा रहे कार्यो की कड़ी निगरानी करवाई जाए। इस पर निगरानी से ठोस कार्य सुनिश्चित होंगे।
Monday, April 26, 2010
आईपीएल होता मापदंड तो बदल जाती भारतीय टीम
जरा सोचिए कि अगर ट्वेंटी-20 विश्व कप की टीम के चयन के लिए इंडियन प्रीमियर लीग का प्रदर्शन टीम मापदंड होता तो क्या युवराज सिंह, गौतम गंभीर, पीयूष चावला, प्रवीण कुमार और यहां तक की यूसुफ पठान को टीम में जगह मिल पाती।शायद नहीं क्योंकि तब वेस्टइंडीज जाने वाली पंद्रह सदस्यीय टीम में सौरभ तिवारी, रोबिन उथप्पा, अंबाती रायुडु, प्रज्ञान ओझा, अमित मिश्रा और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी शामिल होते जिन्होंने आईपीएल में प्रभावशाली प्रदर्शन किया लेकिन वह के श्रीकांत की अगुवाई वाली चयनसमिति को प्रभावित करने में असफल रहे।कैरेबियाई देशों में 30 अप्रैल से शुरू होने वाले विश्व कप में भारत की जो टीम भाग लेगी उसमें कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो अच्छी फार्म में नहीं चल रहे हैं। इनमें कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी शामिल किया जा सकता है जो आईपीएल में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। धोनी ने 13 मैच में 287 रन बनाए जिसमें दो अर्धशतक के अलावा दो शून्य भी शामिल हैं।भारतीय टीम हालांकि सबसे अधिक चिंतित युवराज की फार्म को लेकर है जिन्होंने 2007 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले विश्व कप के दौरान इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्राड के एक ओवर में छह छक्के जमाए थे। किंग्स इलेवन पंजाब की तरफ से खेलने वाले युवराज ने आईपीएल थ्री के 14 मैच में 21.55 की औसत से केवल 255 रन बनाए। वह किसी भी मैच में 50 रन की संख्या नहीं छू पाए।युवराज ने स्वयं स्वीकार किया कि उनका आत्मविश्वास डगमगाया हुआ है और वह अपनी फिटनेस के प्रति भी वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भी आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन वह कंधे की चोट के कारण विश्व कप टीम से बाहर हो गए। उनके जोड़ीदार गंभीर ने भी 11 मैच में दो ही अच्छी पारियां खेली। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने 30.77 की औसत से 277 रन बनाए और उनके बल्ले से केवल दो छक्के निकले।बिगहिटर यूसुफ पठान ने 14 मैच में भले ही 333 रन बनाए लेकिन इनमें उनकी 100 और 73 रन की दो पारियां शामिल हैं। यदि इन दोनों पारियों को निकाल दिया जाता है तो उनके नाम पर बाकी 12 मैच में केवल 160 रन दर्ज होंगे। दिनेश कार्तिक ने 14 मैच में 21.38 की औसत से 278 रन बनाए और विकेट के पीछे 12 शिकार किए।यदि आईसीसी की अनुमति होती और चयनसमिति आज बैठक कर रही होती तो शायद इन खिलाडि़यों की जगह सौरभ तिवारी [16 मैच में 419 रन ], रोबिन उथप्पा [16 मैच में 31.16 और 171.55 की स्ट्राइक रेट से 374 रन] और अंबाती रायुडु [14 मैच में 356 रन और आठ मैच में विकेटकीपर के तौर पर छह शिकार] रखे जा सकते थे। इरफान पठान ने कई अवसरों पर बल्ले और गेंद से अच्छा प्रदर्शन किया और 14 मैच में 34.50 की औसत से 276 रन बनाने के अलावा 15 विकेट भी लिए।अब यदि गेंदबाजी की बात की जाए तो शायद चयनकर्ता यह सोच रहे होंगे कि उन्होंने प्रज्ञान ओझा या अमित मिश्रा को क्यों टीम में नहीं लिया। ओझा ने 16 मैच में 20.42 की औसत से आईपीएल में सर्वाधिक 21 विकेट लिए जबकि अमित मिश्रा ने 14 मैच में 21.35 की औसत से 17 विकेट हासिल किए। चेन्नई सुपरकिंग्स के स्पिनर आर अश्विन और शादाब जकाती ने भी उम्दा प्रदर्शन करके प्रभावित किया।भारतीय टीम में चुने गए लेग स्पिनर पीयूष चावला 14 मैच में 30.58 की औसत से 12 विकेट ही ले पाए और उनका इकोनोमी रेट [7.48] भी ओझा और मिश्रा से अधिक है।तेज गेंदबाजों में प्रवीण कुमार 12 मैच में 38.00 की औसत से आठ विकेट ही ले पाए। उनसे बेहतर प्रदर्शन तो आर पी सिंह सिद्धार्थ त्रिवेदी का रहा जो कि टीम में शामिल नहीं हैं। तेज गेंदबाज जहीर खान [14 मैच में 15 विकेट], आशीष नेहरा [चार मैच में छह विकेट] और हरभजन सिंह [15 मैच में 17 विकेट] ने अच्छा प्रदर्शन किया। आर विनयकुमार को तो आईपीएल में ही अच्छे प्रदर्शन [14 मैच में 16 विकेट] का इनाम मिला और टीम में चुना गया।भारतीय टीम में शामिल बल्लेबाजों में सुरेश रैना ने सर्वाधिक प्रभावित किया और 16 मैच में 520 रन बनाए। रोहित शर्मा [16 मैच में 404 रन] ने भी टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया जबकि मुरली विजय को सहवाग के बाहर होने के कारण उनके आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन का ही इनाम मिला। विजय ने 15 मैच में 458 रन बनाए जिसमें 26 छक्के भी शामिल हैं।
Wednesday, March 31, 2010
लिव इन रिलेशनशिप
लिव इन रिलेशनशिप यानी सहजीवन। आपको याद होगा कि अपने देश में इस विषय पर विवाद की शरुआत दक्षिण भारतीय सिने जगत की सुपर स्टार खुशबू के उस बयान से शुरू हुई थी जिसमें उन्होंने विवाह पूर्व सेक्स संबंधों को जायज ठहराया था और इसके फलस्वरूप तमिलनाडु में काफी हो-हल्ला हुआ था। अब कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय देकर एकबार फिर उस विवाद को हवा दे दी है। पक्ष-विपक्ष में हर तरह के विचार आ रहे हैं। कुछ लोग विवाह नाम की संस्था को सामाजिक ढकोसला मानकर इसकी आवश्यकता पर ही प्रश्न चिह्न लगा रहे है।
प्रागैतिहासिक काल में विवाह नाम की संस्था नहीं थी, स्त्री-पुरुष आपस में सेक्स संबंध बनाने के लिए स्वतंत्र थे। समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ नियम बनाए गए और विवाह नाम की संस्था ने जन्म लिया। समय के साथ समाज की रीति नीति में काफी परिवर्तन आए है, इंसान की पैसे की हवस और अहम की भावना ने इस संस्था को काफी नुकसान पहुँचाया है, लेकिन मात्र इसके कारण इसकी आवश्यकता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता।
सहजीवन पश्चिमी अवधारणा है, जिसके कारण वहां का सबसे ज्यादा सामाजिक विघटन हुआ है। परंतु धीरे-धीरे अपने देश में भी लोकप्रिय हो रही है। खासकर देश के मेट्रोपोलिटन शहरों में रहने वाले युवाओं के मध्य इस तरह के रिश्ते लोकप्रिय हो रहे है। पहले इस तरह के रिश्ते समाज में एक तरह के टैबू के रूप में देखे जाते थे, पर अब फैशन के तौर पर इन्हें अपनाया जा रहा है। इस तरह के रिश्तों को युवाओं का समाज के रीति-रिवाजों के प्रति एक विद्रोह माना जाय या एक आसान जीवन शैली- जिसमें वे साथी की जिम्मेदारियों से मुक्त एक स्वतंत्र जीवन जीते है। यह एक तरह की ट्रायल एंड एरर जैसी स्थिति होती है जिसमें यदि परिस्थितियां मनोकूल रही हैं तो साथ लंबा रहता है अन्यथा पहले साथी को छोड़ कर आगे बढ़ने में देर नहीं लगती। अगर आप भावुक है और रिश्तों में वचनबद्धता को महत्व देते है तो आपको सहजीवन की अवधारणा से दूर ही रहना चाहिए, यहां वचनबद्धता जैसे नियम लागू नहीं होते। यहां सामाजिक नियमों को दरकिनार कर साथ रहने का रोमांच जरूर होता है, लेकिन इस बात की गारंटी नहीं होती कि परिवार और समाज की अवहेलना कर यह रोमांच कितनी अवधि तक जीवित रहेगा।
यहां पर मैं सुप्रीम कोर्ट के ही एक और निर्णय की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगी, जिसके अनुसार मां-बाप का यह हक है कि उनके बच्चे बुढ़ापे में उनकी देखभाल करें। ऐसा न करने पर उन्हें कानूनन दंडित किया सकता है। अब यही पर कन्फ्यूजन क्रिएट होता है। सहजीवन भारतीय समाज द्वारा मान्य नहीं है दूसरे ऐसे बच्चे जिनकी अपनी जीवन-धारा ही सुनिश्चित न हो, वे अपने मां-बाप को इसमें कैसे शामिल करेंगे? इस तरह के रिश्ते सिवाय सामाजिक विघटन के हमें और कुछ नहीं दे सकते।
अंत में मैं एक बार फिर अभिनेत्री खुशबू का उल्लेख करना चाहूंगी। खुशबू ने अपने लिव इन रिलेशनशिप से उस समय काफी गहरी चोट खाई थी, जब शिवाजी गणेशन के सुपुत्र प्रभु से अपने रिश्तों को सार्वजनिक करने के बाद भी, प्रभु ने न तो इन रिश्तों को स्वीकारा और न ही अपनी पत्नी से अलग हुए । बाद में खुशबू ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के मशहूर एक्टर और डायरेक्टर सी.सुदंर से विवाह करने के लिए मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया। शायद उस समय तक उनको इस बात का अहसास पूरी तरह हो गया था कि विवाह ही एक ऐसी संस्था है जो आपको भावात्मक सुरक्षा और जीवन में साथ निभाने की वचनबद्धता देती है। सहजीवन थोड़े समय के लिए आपको रोमांचित तो कर सकता है, लेकिन लंबे साथ की कामना आप इससे नहीं कर सकते।
आज जरूरत है कि विवाह संस्था में आई कुरीतियों को दूर करने की, ताकि पारिवारिक संबंधों में पारस्परिक गरमाहट बढ़े। हमारा चिंतन परिवार नाम की संस्था को दृढ़ता बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
प्रागैतिहासिक काल में विवाह नाम की संस्था नहीं थी, स्त्री-पुरुष आपस में सेक्स संबंध बनाने के लिए स्वतंत्र थे। समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ नियम बनाए गए और विवाह नाम की संस्था ने जन्म लिया। समय के साथ समाज की रीति नीति में काफी परिवर्तन आए है, इंसान की पैसे की हवस और अहम की भावना ने इस संस्था को काफी नुकसान पहुँचाया है, लेकिन मात्र इसके कारण इसकी आवश्यकता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता।
सहजीवन पश्चिमी अवधारणा है, जिसके कारण वहां का सबसे ज्यादा सामाजिक विघटन हुआ है। परंतु धीरे-धीरे अपने देश में भी लोकप्रिय हो रही है। खासकर देश के मेट्रोपोलिटन शहरों में रहने वाले युवाओं के मध्य इस तरह के रिश्ते लोकप्रिय हो रहे है। पहले इस तरह के रिश्ते समाज में एक तरह के टैबू के रूप में देखे जाते थे, पर अब फैशन के तौर पर इन्हें अपनाया जा रहा है। इस तरह के रिश्तों को युवाओं का समाज के रीति-रिवाजों के प्रति एक विद्रोह माना जाय या एक आसान जीवन शैली- जिसमें वे साथी की जिम्मेदारियों से मुक्त एक स्वतंत्र जीवन जीते है। यह एक तरह की ट्रायल एंड एरर जैसी स्थिति होती है जिसमें यदि परिस्थितियां मनोकूल रही हैं तो साथ लंबा रहता है अन्यथा पहले साथी को छोड़ कर आगे बढ़ने में देर नहीं लगती। अगर आप भावुक है और रिश्तों में वचनबद्धता को महत्व देते है तो आपको सहजीवन की अवधारणा से दूर ही रहना चाहिए, यहां वचनबद्धता जैसे नियम लागू नहीं होते। यहां सामाजिक नियमों को दरकिनार कर साथ रहने का रोमांच जरूर होता है, लेकिन इस बात की गारंटी नहीं होती कि परिवार और समाज की अवहेलना कर यह रोमांच कितनी अवधि तक जीवित रहेगा।
यहां पर मैं सुप्रीम कोर्ट के ही एक और निर्णय की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगी, जिसके अनुसार मां-बाप का यह हक है कि उनके बच्चे बुढ़ापे में उनकी देखभाल करें। ऐसा न करने पर उन्हें कानूनन दंडित किया सकता है। अब यही पर कन्फ्यूजन क्रिएट होता है। सहजीवन भारतीय समाज द्वारा मान्य नहीं है दूसरे ऐसे बच्चे जिनकी अपनी जीवन-धारा ही सुनिश्चित न हो, वे अपने मां-बाप को इसमें कैसे शामिल करेंगे? इस तरह के रिश्ते सिवाय सामाजिक विघटन के हमें और कुछ नहीं दे सकते।
अंत में मैं एक बार फिर अभिनेत्री खुशबू का उल्लेख करना चाहूंगी। खुशबू ने अपने लिव इन रिलेशनशिप से उस समय काफी गहरी चोट खाई थी, जब शिवाजी गणेशन के सुपुत्र प्रभु से अपने रिश्तों को सार्वजनिक करने के बाद भी, प्रभु ने न तो इन रिश्तों को स्वीकारा और न ही अपनी पत्नी से अलग हुए । बाद में खुशबू ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के मशहूर एक्टर और डायरेक्टर सी.सुदंर से विवाह करने के लिए मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया। शायद उस समय तक उनको इस बात का अहसास पूरी तरह हो गया था कि विवाह ही एक ऐसी संस्था है जो आपको भावात्मक सुरक्षा और जीवन में साथ निभाने की वचनबद्धता देती है। सहजीवन थोड़े समय के लिए आपको रोमांचित तो कर सकता है, लेकिन लंबे साथ की कामना आप इससे नहीं कर सकते।
आज जरूरत है कि विवाह संस्था में आई कुरीतियों को दूर करने की, ताकि पारिवारिक संबंधों में पारस्परिक गरमाहट बढ़े। हमारा चिंतन परिवार नाम की संस्था को दृढ़ता बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
Monday, March 22, 2010
सुखदेव को फांसी देना गलत था

अंग्रेजों ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और वे हर कीमत पर इन तीनों क्रांतिकारियों को ठिकाने लगाना चाहते थे।लाहौर षड्यंत्र [सांडर्स हत्याकांड] में जहां पक्षपातपूर्ण ढंग से मुकदमा चलाया गया, वहीं अंग्रेजों ने सुखदेव के मामले में तो सभी हदें पार कर दीं और उन्हें बिना जुर्म के ही फांसी पर लटका दिया। सांडर्स हत्याकांड में सुखदेव शामिल नहीं थे, लेकिन फिर भी ब्रितानिया हुकूमत ने उन्हें फांसी पर लटका दिया।राजगुरू, सुखदेव और भगत सिंह की लोकप्रियता तथा क्रांतिकारी गतिविधियों से अंग्रेजी शासन इस कदर हिला हुआ था कि वह इन्हें हर कीमत पर फांसी पर लटकाना चाहता था।सांडर्स हत्याकांड में पक्षपातपूर्ण ढंग से मुकदमा चलाया गया और सुखदेव को इस मामले में बिना जुर्म के ही सजा दे दी गई। 15 मई 1907 को पंजाब के लायलपुर [अब पाकिस्तान का फैसलाबाद] में जन्मे सुखदेव भी भगत सिंह की तरह बचपन से ही आजादी का सपना पाले हुए थे। यह दोनों लाहौर नेशनल कॉलेज के छात्र थे। दोनों एक ही सन में लायलपुर में पैदा हुए और एक ही साथ शहीद हो गए।..तुझे जिबह करने की खुशी और मुझे मरने का शौक'तुझे जिबह करने की खुशी और मुझे मरने का शौक, है मेरी भी मर्जी वही जो मेरे सैयाद की है..'इन पंक्तियों का एक-एक लफ्ज उस महान देशभक्त की वतन पर मर मिटने की ख्वाहिश जाहिर करता है जिसने आजादी की राह में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया।देशभक्ति की यह तहरीर भगत सिंह की उस डायरी का हिस्सा है जो उन्होंने लाहौर जेल में लिखी थी। शहीद-ए-आजम ने आजादी का ख्वाब देखते हुए जेल में जो दिन गुजारे, उन्हें पल-पल अपनी डायरी में दर्ज किया। 404 पृष्ठ की यह मूल डायरी आज भगत सिंह के पौत्र [भतीजे बाबर सिंह संधु के पुत्र] यादविंदर सिंह के पास है जिसे उन्होंने अनमोल धरोहर के रूप में संजोकर रखा है।दिल्ली के नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में इस डायरी की प्रति भी उपलब्ध है ्रजबकि राष्ट्रीय संग्रहालय में इसकी माइक्रो फिल्म रखी है।उच्चतम न्यायालय में लगी एक प्रदर्शनी में भी इस डायरी को प्रदर्शित किया जा चुका है।डायरी के पन्ने अब पुराने हो चले हैं, लेकिन इसमें उकेरा गया एक-एक शब्द देशभक्ति की अनुपम मिसाल के साथ ही भगत सिंह के सुलझे हुए विचारों की तस्वीर पेश करता नजर आता है। शहीद-ए-आजम ने यह डायरी अंगे्रजी भाषा में लिखी है, लेकिन बीच-बीच में उन्होंने उर्दू भाषा में वतन परस्ती से ओत-प्रोत पंक्तियां भी लिखी हैं।भगत सिंह का सुलेख इतना सुंदर है कि डायरी देखने वालों की निगाहें ठहर जाती हैं। डायरी उनके समूचे व्यक्तित्व के दर्शन कराती है। इससे पता चलता है कि वह महान क्रांतिकारी होने के साथ ही विहंगम दृष्टा भी थे।बाल मजदूरी हो या जनसंख्या का मामला, शिक्षा नीति हो या फिर सांप्रदायिकता का विषय, देश की कोई भी समस्या डायरी में भगत सिंह की कलम से अछूती नहीं रही है।उनकी सोच कभी विदेशी क्रांतिकारियों पर जाती है तो कभी उनके मन में गणित, विज्ञान, मानव और मशीन की भी बात आती है। डायरी में पेज नंबर 60 पर उन्होंने लेनिन द्वारा परिभाषित साम्राज्यवाद का उल्लेख किया है तो पेज नंबर 61 पर तानाशाही का। इसमें मानव-मशीन की तुलना के साथ ही गणित के सूत्र भी लिखे हैं।इन 404 पन्नों में भगत के मन की भावुकता भी झलकती है जो बटुकेश्वर दत्त को दूसरी जेल में स्थानांतरित किए जाने पर सामने आती है।मित्र से बिछुड़ते समय मन के किसी कोने में शायद यह अहसास था कि अब मुलाकात नहीं होगी, इसलिए निशानी के तौर पर डायरी में भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के ऑटोग्राफ ले लिए थे। बटुकेश्वर ने ऑटोग्राफ के रूप में बीके दत्त के नाम से हस्ताक्षर किए।अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ होने के साथ ही भगत सिंह इतिहास और राजनीति जैसे विषयों में भी पारंगत थे।सभी विषयों की जबर्दस्त जानकारी होने के चलते ही हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी [एचएसआरए] के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें अंग्रेजों की नीतियों के विरोध में आठ अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने की इजाजत दी थी।27 सितंबर 1907 को जन्मे भगत सिंह 23 मार्च 1931 को मात्र 23 साल की उम्र में ही देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए। देशवासियों के दिलों में वह आज भी जिन्दा हैं।
Sunday, March 7, 2010
महिला आरक्षण : संसद में इतिहास रचने की तैयारी
संसद में इतिहास रचने की तैयारी की जा रही है क्योंकि सोमवार को राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक को विचार और पारित किए जाने के लिए पेश किया जाएगा। कांग्रेस, भाजपा तथा वाम दलों ने जहां इसका समर्थन करने का ऐलान किया है वहीं इस विधेयक के विरोधियों के बीच मतभेद खुल कर सामने आ गए हैं।पिछले करीब डेढ़ दशक से आम सहमति का इंतजार कर रहे इस विधेयक की राह राज्यसभा से बन रही है जहां इस पर सोमवार को चर्चा होनी है। इस विधेयक को उच्च सदन में मंजूरी मिलना लगभग तय है क्योंकि कांग्रेस, भाजपा, वामदलों के अलावा अन्य छोटे दल जैसे तेदेपा, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, अकाली दल और नेशनल कांफ्रेंस ने इसका समर्थन करने का ऐलान किया है।राज्यसभा की सदस्य संख्या 245 है लेकिन 12 रिक्तियों की वजह से सदन के सदस्यों की संख्या 233 हैं। इन 12 रिक्तियों में छह नामांकित सदस्यों के लिए रिक्तियां शामिल हैं।बिहार के मुख्यमंत्री और जद [यू] नेता नीतीश कुमार ने अचानक रुख बदल कर विधेयक के पक्ष में आवाज उठाई और विपक्ष को झटका दे दिया है।राज्यसभा में विधेयक का विरोध करने वाले सदस्यों की संख्या 26 से भी कम है क्योंकि जद [यू] में नीतीश कुमार के बयान के बाद गहरे मतभेद नजर आ रहे हैं।महिला आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक को मतदान के दौरान सदन में विशेष बहुमत के लिए 155 मतों की जरूरत होगी। फिलहाल विधेयक के पक्ष में 165 से अधिक सदस्यों का समर्थन नजर आ रहा है।विधि एवं न्याय मंत्री एम वीरप्पा मोइली 'संविधान [108 वां संशोधन] विधेयक' को विचार विमर्श के लिए सदन में पेश करेंगे। महिला आरक्षण विधेयक के नाम से जाना जाने वाला यह विधेयक संयोगवश आठ मार्च को सदन में पेश करने का फैसला किया गया है जिस दिन दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाएगी।एक खास बात यह भी है कि आठ मार्च, 2010 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के सौ साल पूरे हो रहे हैं। इस विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है।महिला आरक्षण विधेयक के विरोधियों ने इसके खिलाफ 'युद्ध' का ऐलान कर दिया है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जद [यू] प्रमुख शरद यादव ने इस विधेयक के वर्तमान स्वरूप पर अपना विरोध बरकरार रखा है। यह दल इस विधेयक में पिछड़े वर्गो और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं।राज्यसभा में कांग्रेस के 71 सदस्य, भाजपा के 45, माकपा के 15, अन्नाद्रमुक के सात, राकांपा के पांच, द्रमुक के चार, बीजद के चार, तेदेपा के दो, तृणमूल कांग्रेस के दो और फारवर्ड ब्लॉक का एक सदस्य है। इन सभी दलों ने विधेयक के लिए अपना समर्थन जताया है। सदन में अकाली दल के तीन सदस्य हैं। अकाली दल ने पहले ही विधेयक के प्रति अपने समर्थन की घोषणा कर दी है।विधेयक पर विचार-विमर्श से पूर्व सरकार ने इसके विरोधियों का समर्थन जुटाने के लिए एक स्वर में इसका समर्थन करने की अपील की तथा इसके विभिन्न पहलुओं पर बातचीत करने का आश्वासन दिया है।संसदीय मामलों के मंत्री पी के बंसल ने बताया कि उन सभी से यह अपेक्षा, उम्मीद और अपील है कि हमें इस महत्वपूर्ण विधेयक का इसके वर्तमान स्वरूप में समर्थन करना चाहिए। कानून के बहुत अच्छे पहलू हैं। अगर किसी के पास कोई और विचार हैं तो उन पर हम बाद में बात कर सकते हैं।कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने सदस्यों को विधेयक का समर्थन करने के लिए व्हिप जारी किया है। भाकपा नेता डी राजा ने कहा है कि उन्होंने पार्टी सदस्यों से सदन में मौजूद रहने के लिए कहा है। माकपा नेताओं ने भी ऐसा ही किया है।संसदीय मामलों के मंत्री की तरह ही राजा भी मानते हैं कि अगर समर्थन करने वालों की संख्या पर गौर करें तो विधेयक की राह में कोई बाधा नहीं आएगी। राजा ने कहा कि द्रमुक, अन्नाद्रमुक, तेदेपा और बीजद आदि दल भी विधेयक का समर्थन कर रहे हैं।राजा से पूछा गया कि क्या आठ मार्च को संसद में 'रेड लेटर' डे होगा क्योंकि यह विधेयक लोकसभा में महिलाओं और पुरुषों की संख्या ही बदल देगा। इस पर भाकपा नेता ने उम्मीद जताई कि 'यह एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय होगा और उन्हें कोई समस्या नजर नहीं आती।बहरहाल, विधेयक का विरोध करने वालों की संख्या कम है और इसे मूल्यवृद्धि, ईधन के दामों में वृद्धि जैसे मुद्दों को लेकर कायम विपक्षी एकता को तोड़ने का कांग्रेस का एक प्रयास समझा जा रहा है।राज्यसभा की सदस्य संख्या 245 है लेकिन 12 रिक्तियों की वजह से फिलहाल सदन के सदस्यों की संख्या 233 हैं। इन 12 रिक्तियों में छह नामांकित सदस्यों के लिए रिक्तियां शामिल हैं।विधेयक को संसद में पेश करने के प्रयास पिछले 13 साल से नाकाम होते रहे हैं। इसका विरोध करने वाले दल महिलाओं के लिए लोकसभा और विधायिकाओं में 33 फीसदी आरक्षण के कोटे के अंदर पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण का कोटा तय करने की मांग कर रहे हैं।वर्ष 1997 में लोकसभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के हाथों से उनकी ही पार्टी जनता दल के सदस्यों ने विधेयक की प्रतियां छीन कर फाड़ दी थीं। जनता दल तत्कालीन संयुक्त मोर्चा सरकार की अगुवाई कर रहा था।राजग के कार्यकाल में तत्कालीन विधि मंत्री राम जेठमलानी ने जब लोकसभा में यह विधेयक पेश करना चाहा तब भी इसके विरोधियों ने इसकी प्रतियां फाड़ डालीं थीं।यह स्पष्ट हो चुका है कि कांग्रेस और भाजपा में इस विधेयक के लिए श्रेय लेने की होड़ मची है। अब ऐसा लगता है कि यह विधेयक सोमवार को सदन में पेश होने से पहले ही एक पड़ाव पार कर चुका है क्योंकि इसके धुर विरोधी और आलोचक जद [यू] में मतभेद खुल कर सामने आ गए हैं।
Wednesday, February 24, 2010
दीदी का भालो बजट

रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा में पेश रेल बजट 2010-11 में यात्री किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई है।रेल बजट की मुख्य बातें :. यात्री किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं।. 54 नई रेलगाडी सेवाएं।. 28 नई यात्री गाड़ी सेवाएं।. 21 ट्रेनों का परिचालन क्षेत्र विस्तार।. 12 ट्रेनों के फेरों में वृद्धि।. 16 मागो' पर ' भारत तीर्थ ' नामक विशेष पर्यटक ट्रेनें।. लंबी दूरी की छह ' दूरंतो ' ट्रेनें।. कम दूरी की चार ' दूरंतो ' ट्रेनें।. महिला विशेष रेलों का नाम बदलकर ' मातृभूमि विशेष ' किया जाएगा।. ' कर्मभूमि ' नामक तीन अनारक्षित रेलगाडि़यां।. रविन्द्रनाथ टैगोर के 150वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में पूरे देश में ' संस्कृतिएक्सप्रेस ' ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसे बांग्लादेश भी ले जाने का प्रस्ताव। गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के 150वें जन्मदिन के अवसर पर उनके विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए रेलवे संस्कृति एक्सपे्रस के नाम से एक विशेष ट्रेन चलाएगा।टैगोर विश्व के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी कविताओं को दो देशों द्वारा राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया गया है.. बांग्लादेश के लिए आमार सोनार बांग्ला और भारत के लिए जन गण मन। टैगोर अविभाजित बंगाल में जिए और अपनी अनेक साहित्यिक रचनाओं का सर्जन किया।निजी आपरेटरों को विशेष मालगाडि़यां चलाने और बुनियादी ढांचे में निवेश की अनुमति मिलेगी।. उच्च क्षमता सामान्य प्रयोजन और विशेष प्रयोजन माल डिब्बों के लिए विशेष माल डिब्बा निवेश योजना।. दस जगहों पर आटोमोबाइल हब।. बिजली खपत कम करने के लिए रेल कर्मचारियों को 26 लाख सीएफएल वितरित करेगी रेलवे।. हरित शौचालयों के साथ दस रेक शुरू किए जाएंगे।. छह उच्च गति यात्री गलियारों की पहचान की गई है। इन पर आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय उच्च गति रेल प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी।. बांग्लादेश छोर पर अखौरा और भारत के अगरतला के बीच रेल संपर्क।. रेल सुरक्षा बल को मजबूत बनाने के लिए उसमें पूर्व सैनिक होंगे शामिल।. मदर टेरेसा, टीपू सुल्तान, भगत सिंह के नाम पर कोलकाता मेट्रो के स्टेशनों का नामकरण और बालीगंज स्टेशन का नाम बहादुरशाह जफर के नाम पर होगा।रेल बजट की घोषणाएं:-कुछ गेज परिवर्तन परियोजनाओं में लागत के बंटवारे में निजी सार्वजनिक भागीदारी।-दूसरे राज्यों में जाकर काम करने वाले कामगारों के लिए 'कर्मभूमि' रेलगाडि़यां चलाई जाएंगी।-अहमदाबाद और उधमपुर के बीच नई 'जन्मभूमि' रेलगाडि़यां चलेगी।-रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती मनाने के लिए 'भारत तीर्थ' विशेष रेलगाड़ी पूरे देश में चलाई जाएगी।-सिक्किम की राजधानी गंगटोक को रेलमार्ग द्वारा रंगपो से जोड़ा जाएगा।-हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से जम्मू एवं कश्मीर के लेह तक रेल मार्ग का विस्तार किया जाएगा।-अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के डिगलीपुर को रेलमार्ग द्वारा पोर्ट ब्लेयर से जोड़ा जाएगा।- वर्ष 2011 में रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती पर पश्चिम बंगाल से विशेष रेलगाड़ी बांग्लादेश जाएगी।- 4,411 करोड़ रुपये के आवंटन से वर्ष 2010-11 में विस्तार पर जोर।-छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से रेलवे पर पड़ा 55,000 करोड़ रुपये का बोझ।-वर्ष 2009-10 में सकल आय 88,281 करोड़ रुपये रही।-वर्ष 2009-10 में क्रियान्वयन खर्च 83,440 करोड़ रुपये रहा।- वर्ष 2010-11 के दौरान 87,100 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान।- कश्मीर रेल लिंक को सोपोर तक बढ़ाया जाएगा।- वर्ष 2009-10 में शुद्ध मुनाफा 1328 करोड़ रुपये रहने का अनुमान।- 10 अधीनस्थ ऑटोमोबाइल केंद्रों की स्थापना होगी।- ऊर्जा बचाने वाली 2.2 करोड़ सीएफएल लाइट्स वितरित की गई।-रेलवे की परियोजनाओं के लिए जमीन लिए जाने वाले परिवार के एक सदस्य को नौकरी देना का नीतिगत फैसला।- उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम माल ढुलाई गलियारे का निर्माण किया जाएगा।- अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अधिक अस्पताल खोल जाएंगे।-80,000 महिला कर्मचारियों के बच्चों के लिए शिक्षा सुविधाओं का विकास किया जाएगा।-गैंगमेन के लिए विशेष सुविधाओं की स्थापना की जाएगी।-रेलवे की कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत लाइसेंसधारी कूलियों के लिए बीमा की सुविधा।-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और रक्षा शोध और विकास संगठन के साथ मिलकर रेलवे शोध केंद्र की स्थापना की जाएगी।-नीतियों के निर्माण में कर्मचारी संगठनों को शामिल किया जाएगा।- चेन्नई स्थिति एकीकृत डिब्बा कारखाना को आधुनिक बनाया जाएगा।- मुंबई में नया डिब्बा मरम्मत केंद्र की स्थापना।-बेंगलुरू में पहियों के डिजाइन, विकास और परीक्षण केंद्र की स्थापना।- महिला यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।- पांच साल के भीतर सभी मानवरहित रेलवे क्रासिंग को मानव युक्त कर दिया जाएगा।- सड़क ओवरब्रिज के अलावा और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा।- रेलवे सुरक्षा बल में पूर्व सैनिकों की होगी भर्ती।- पांच खेल अकादमियों की स्थापना की जाएगी, हॉकी के विकास के लिए एस्ट्रोटर्फ मुहैया करवाई जाएगी और खिलाडि़यों की नौकरी की व्यवस्था की जाएगी।- राष्ट्रमंडल खेलों में रेलवे मुख्य भागीदार होगा।-यात्री सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विशेष प्रस्ताव।-94 स्टेशनों को उन्नत बनाया जाएगा।- निजी-सार्वजनिक भागीदारी के तहत छह नए पेय जल संयंत्र लगाए जाएंगे।- रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक शौचालय बनाए जाएंगे।-लोगों की सहूलियत के लिए और टिकट खिड़की खोली जाएंगी।- आधुनिक सुरक्षा प्रौद्योगिकी पर जोर।-1000 किलोमीटर रेल पटरियों का निर्माण।-नए व्यापारिक मॉडल बनाए जाएंगे।- निजीकरण नहीं, रेलवे सरकार की है लेकिन व्यापारिक समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी।-चालू वित्त वर्ष की 120 में 117 रेलगाडि़यां शुरू हो चुकी हैं। कैंसर के मरीजों को तृतीय वातानुकूलित श्रेणी (एसी-3) में निशुल्क यात्रा की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी।
यात्री किराए में कोई वृद्धि नहीं करने की घोषणा। उर्वरक और किरोसिन के मालढुलाई किराये में प्रति वैगन 100 रुपये की कटौती की घोषणा की।रेल बजट में घोषित प्रमुख ट्रेनों की सूची में 16 भारत तीर्थ, दस दूरंतो, तीन अनारक्षित कर्मभूमि, जवानों के लिए एक जन्मभूमि गाड़ी, भारत और बांग्लादेश के बीच एक संस्कृति एक्सप्रेस ट्रेन, छह मातृभूमि महिला स्पेशल के अलावा 52 नई एक्सप्रेस ट्रेनें, 28 पैसेंजर गाडि़यां, नौ मेमू, आठ डेमू शामिल हैं।इन गाडि़यों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है :मातृभूमि गाडिं़यां :1. दिल्ली-पानीपत2. बारासात-सियालदह3. कृष्णानगर-सियालदह4. फलकनुमा-लिंगमपल्ली5. ठाणे-वाशी6. पनवेल-नेरूल-ठाणेकर्मभूमि गाडियां :1. दरभंगा-मुंबई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :2. गुवाहाटी-मुंबई : साप्ताहिक : वाया हावड़ा-टाटानगर-झारसुगुडा-बिलासपुर-नागपुर3. न्यू जल्पाईगुड़ी-अमृतसर : साप्ताहिक : वाया कटिहार-सीतापुरजन्मभूमि गाड़ी :1. अहमदाबाद-ऊधमपुर : साप्ताहिक :भारत तीर्थ गाडि़यां :1. हावड़ा-गया-आगरा-मथुरा-वृन्दावन-नई दिल्ली-हरिद्वार-वाराणसी-हावड़ा2. हावड़ा-चेन्नई-पुडुचेरी-मदुरै-रामेश्वरम-कन्याकुमारी-बेंगलूरू-मैसूर-चेन्नई-हावड़ा3. हावड़ा-विजग-हैदराबाद-अरकू-हावड़ा4. हावड़ा-वाराणसी-जम्मूतवी-अमृतसर-हरिद्वार-मथुरा-वृन्दावन-इलाहाबाद-हावड़ा5. हावड़ा-अजमेर-उदयपुर-जोधपुर-बीकानेर-जयपुर-हावड़ा6. मुंबई-पुणे-तिरूपति-कांचीपुरम-रामेश्वरम-मदुरै-कन्याकुमारी-पुणे-मुंबई7. पुणे-जयपुर-नाथद्वार-रणकपुर-जयपुर-मथुरा-आगरा-हरिद्वार-अमृतसर-जम्मूतवी-पुणे8. पुणे-रत्नागिरि-गोवा-बेंगलूरू-मैसूर-तिरूपति-पुणे9. अहमदाबाद-पुरी-कोलकाता-गंगासागर-वाराणसी-इलाहाबाद-इंदौर-ओंकारेश्वर-उज्जैन-अहमदाबाद10. भोपाल-द्वारका-सोमनाथ-उदयपुर-अजमेर-जोधपुर-जयपुर-मथुरा-वृन्दावन-अमृतसर-जम्मूतवी-भोपाल11. भोपाल-तिरूपति-कांचीपुरम-रामेश्वरम-मदुरै-कन्याकुमारी-त्रिवेन्द्रम-कोच्चि-भोपाल12. मदुरै-चेन्नई-कोपरगांव-मंत्रालयम-चेन्नई-मदुरै13. मदुरै-इरोड-पुणे-उज्जैन-वेरावल-नासिक-हैदराबाद-चेन्नई-मदुरै14. मदुरै-चेन्नई-जयपुर-दिल्ली-मथुरा-वृन्दावन-इलाहाबाद-वाराणसी-गया-चेन्नई-मदुरै15. मदुरै-वाराणसी-गया-पटनासाहिब-इलाहाबाद-हरिद्वार-चंडीगढ-कुरूक्षेत्र-अमृतसर-दिल्ली-मदुरै16. मदुरै-मैसूर-गोवा-मुंबई-औरंगाबाद-हैदराबाद-मदुरैलंबी दूरी की दूरंतो :1. यशवंतपुर : बेंगलूरू :-दिल्ली एसी साप्ताहिक2. मुंबई-सिकंदराबाद एसी : सप्ताह में दो बार :3. पुणे-हावड़ा एसी : सप्ताह में दो बार :4. मुंबई-एर्णाकुलम एसी : सप्ताह में दो बार :5. इंदौर-मुंबई एसी : सप्ताह में दो बार :6. जयपुर-मुंबई एसी : सप्ताह में दो बार :कम दूरी वाली दूरंतो :1. चंडीगढ़-अमृतसर2. चेन्नई-कोयंबटूर3. पुरी-हावड़ा4. हावडा-दीघालंबी दूरी की एक्सप्रेस गाडि़यां :1. सुल्तानपुर-मुंबई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :2. सुल्तानपुर-अजमेर एक्सप्रेस : साप्ताहिक :3. आसनसोल-दीघा एक्सप्रेस : साप्ताहिक :4. हावड़ा-काटपाडी : वेल्लोर :-पुडुचेरी एक्सप्रेस : साप्ताहिक :5. किशनगंज-अजमेर एक्सप्रेस : साप्ताहिक :6. कोलकाता-अजमेर एक्सप्रेस : साप्ताहिक :7. कोलकाता-आनंदपुर साहिब-नांगलडैम एक्सप्रेस : साप्ताहिक :8. ऊना-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :9. सिऊडी-प्रांतीक-हावड़ा एक्सप्रेस : दैनिक :10. हल्दिया-चेन्नई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :11. हैदराबाद-अजमेर एक्सप्रेस : सप्ताह में दो दिन :12. राजगीर-हावड़ा एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :13. मुंबई-शिरडी इंटरसिटी एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन बार :14. हरिद्वार-मुंबई सीएसटी एसी एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन बार :15. वलसाड-हरिद्वार एक्सप्रेस : साप्ताहिक :16. अजमेर-इंदौर लिंक एक्सप्रेस : दैनिक :17. नागरकोइल-बेंगलूरू एक्सप्रेस : साप्ताहिक :18. कानपुर-चित्रकूट एक्सप्रेस : दैनिक :19. न्यू जल्पाईगुडी-चेन्नई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :20. दिल्ली सराय रोहिल्ला-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :21. मंगलौर-तिरूचिरापल्ली एक्सप्रेस : साप्ताहिक :22. भुवनेश्वर-पुणे एक्सप्रेस : साप्ताहिक :23. हबीबगंज-जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस : दैनिक :24. कालीकट-तिरूवनंतपुरम जन शताब्दी एक्सप्रेस : सप्ताह में पांच दिन :25. पुणे-एर्णाकुलम सुपरफास्ट : सप्ताह में दो दिन :26. कोयंबटूर-तिरूपति इंटरसिटी : सप्ताह में तीन दिन :27. शिमोगा-मैसूर इंटरसिटी : दैनिक :28. बेंगलूरू-तिरूपति इंटरसिटी : तीन दिन :29. छत्रपति शाहूजी महाराज टर्मिनस-शोलापुर एक्सप्रेस : दैनिक :30. जयपुर-पुणे एक्सप्रेस : साप्ताहिक :31. रांची-जयनगर एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :32. मदुरै-तिरूपति एक्सप्रेस : दो दिन :33. तिरूपति-सिकंदराबाद एक्सप्रेस : दो दिन :34. संबलपुर-हावड़ा एक्सप्रेस : साप्ताहिक :35. अहमदाबाद-आगरा एक्सप्रेस : तीन दिन :36. गोंडा-मडुवाडीह इंटरसिटी : दैनिक :37. बंगलोर-हुबली हम्पी एक्सप्रेस और बंगलोर-नांदेड एक्सप्रेस लिंक की बजाय स्वतंत्र रूप से चलेंगी।38. हरिप्रिया और रायलसीमा एक्सप्रेस लिंक की बजाय स्वतंत्र ट्रेनों के रूप में चलेंगी।39. सिकंदराबाद-मनुगुरू एक्सप्रेस : तीन दिन :40. अलीपुरदुआर-लमडिंग इंटरसिटी : दैनिक :41. गुवाहाटी-मरियानी इंटरसिटी : दैनिक :42. गांधीधाम-जोधपुर एक्सप्रेस : तीन दिन :43. राजकोट-पोरबंदर एक्सप्रेस : तीन दिन :44. कोलकाता-दरभंगा एक्सप्रेस : दो दिन :45. हावडा-बेहरामपुर एक्सप्रेस : तीन दिन :46. बारीपाडा-शालीमार एक्सप्रेस : तीन दिन :47. खड़गपुर-पुरूलिया इंटरसिटी : तीन दिन :48. ग्वालियर-छिंदवाड़ा एक्सप्रेस : दो दिन :49. रामपुर हाट-सियालदह इंटरसिटी : तीन दिन :50. हावड़ा-शिरडी एक्सप्रेस : साप्ताहिक :52. पुरी-वलसाड एक्सप्रेस : एक दिन :53. पुरी-दीघा एक्सप्रेस : एक दिन :
रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आरपीएफ में होगा परिवर्तन। समर्पित यात्री कारिडार भी बनाए जाएंगे। मितव्ययिता के प्रयासों से 2,000 करोड़ रुपये की बचत की।
यात्री किराए में कोई वृद्धि नहीं करने की घोषणा। उर्वरक और किरोसिन के मालढुलाई किराये में प्रति वैगन 100 रुपये की कटौती की घोषणा की।रेल बजट में घोषित प्रमुख ट्रेनों की सूची में 16 भारत तीर्थ, दस दूरंतो, तीन अनारक्षित कर्मभूमि, जवानों के लिए एक जन्मभूमि गाड़ी, भारत और बांग्लादेश के बीच एक संस्कृति एक्सप्रेस ट्रेन, छह मातृभूमि महिला स्पेशल के अलावा 52 नई एक्सप्रेस ट्रेनें, 28 पैसेंजर गाडि़यां, नौ मेमू, आठ डेमू शामिल हैं।इन गाडि़यों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है :मातृभूमि गाडिं़यां :1. दिल्ली-पानीपत2. बारासात-सियालदह3. कृष्णानगर-सियालदह4. फलकनुमा-लिंगमपल्ली5. ठाणे-वाशी6. पनवेल-नेरूल-ठाणेकर्मभूमि गाडियां :1. दरभंगा-मुंबई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :2. गुवाहाटी-मुंबई : साप्ताहिक : वाया हावड़ा-टाटानगर-झारसुगुडा-बिलासपुर-नागपुर3. न्यू जल्पाईगुड़ी-अमृतसर : साप्ताहिक : वाया कटिहार-सीतापुरजन्मभूमि गाड़ी :1. अहमदाबाद-ऊधमपुर : साप्ताहिक :भारत तीर्थ गाडि़यां :1. हावड़ा-गया-आगरा-मथुरा-वृन्दावन-नई दिल्ली-हरिद्वार-वाराणसी-हावड़ा2. हावड़ा-चेन्नई-पुडुचेरी-मदुरै-रामेश्वरम-कन्याकुमारी-बेंगलूरू-मैसूर-चेन्नई-हावड़ा3. हावड़ा-विजग-हैदराबाद-अरकू-हावड़ा4. हावड़ा-वाराणसी-जम्मूतवी-अमृतसर-हरिद्वार-मथुरा-वृन्दावन-इलाहाबाद-हावड़ा5. हावड़ा-अजमेर-उदयपुर-जोधपुर-बीकानेर-जयपुर-हावड़ा6. मुंबई-पुणे-तिरूपति-कांचीपुरम-रामेश्वरम-मदुरै-कन्याकुमारी-पुणे-मुंबई7. पुणे-जयपुर-नाथद्वार-रणकपुर-जयपुर-मथुरा-आगरा-हरिद्वार-अमृतसर-जम्मूतवी-पुणे8. पुणे-रत्नागिरि-गोवा-बेंगलूरू-मैसूर-तिरूपति-पुणे9. अहमदाबाद-पुरी-कोलकाता-गंगासागर-वाराणसी-इलाहाबाद-इंदौर-ओंकारेश्वर-उज्जैन-अहमदाबाद10. भोपाल-द्वारका-सोमनाथ-उदयपुर-अजमेर-जोधपुर-जयपुर-मथुरा-वृन्दावन-अमृतसर-जम्मूतवी-भोपाल11. भोपाल-तिरूपति-कांचीपुरम-रामेश्वरम-मदुरै-कन्याकुमारी-त्रिवेन्द्रम-कोच्चि-भोपाल12. मदुरै-चेन्नई-कोपरगांव-मंत्रालयम-चेन्नई-मदुरै13. मदुरै-इरोड-पुणे-उज्जैन-वेरावल-नासिक-हैदराबाद-चेन्नई-मदुरै14. मदुरै-चेन्नई-जयपुर-दिल्ली-मथुरा-वृन्दावन-इलाहाबाद-वाराणसी-गया-चेन्नई-मदुरै15. मदुरै-वाराणसी-गया-पटनासाहिब-इलाहाबाद-हरिद्वार-चंडीगढ-कुरूक्षेत्र-अमृतसर-दिल्ली-मदुरै16. मदुरै-मैसूर-गोवा-मुंबई-औरंगाबाद-हैदराबाद-मदुरैलंबी दूरी की दूरंतो :1. यशवंतपुर : बेंगलूरू :-दिल्ली एसी साप्ताहिक2. मुंबई-सिकंदराबाद एसी : सप्ताह में दो बार :3. पुणे-हावड़ा एसी : सप्ताह में दो बार :4. मुंबई-एर्णाकुलम एसी : सप्ताह में दो बार :5. इंदौर-मुंबई एसी : सप्ताह में दो बार :6. जयपुर-मुंबई एसी : सप्ताह में दो बार :कम दूरी वाली दूरंतो :1. चंडीगढ़-अमृतसर2. चेन्नई-कोयंबटूर3. पुरी-हावड़ा4. हावडा-दीघालंबी दूरी की एक्सप्रेस गाडि़यां :1. सुल्तानपुर-मुंबई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :2. सुल्तानपुर-अजमेर एक्सप्रेस : साप्ताहिक :3. आसनसोल-दीघा एक्सप्रेस : साप्ताहिक :4. हावड़ा-काटपाडी : वेल्लोर :-पुडुचेरी एक्सप्रेस : साप्ताहिक :5. किशनगंज-अजमेर एक्सप्रेस : साप्ताहिक :6. कोलकाता-अजमेर एक्सप्रेस : साप्ताहिक :7. कोलकाता-आनंदपुर साहिब-नांगलडैम एक्सप्रेस : साप्ताहिक :8. ऊना-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :9. सिऊडी-प्रांतीक-हावड़ा एक्सप्रेस : दैनिक :10. हल्दिया-चेन्नई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :11. हैदराबाद-अजमेर एक्सप्रेस : सप्ताह में दो दिन :12. राजगीर-हावड़ा एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :13. मुंबई-शिरडी इंटरसिटी एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन बार :14. हरिद्वार-मुंबई सीएसटी एसी एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन बार :15. वलसाड-हरिद्वार एक्सप्रेस : साप्ताहिक :16. अजमेर-इंदौर लिंक एक्सप्रेस : दैनिक :17. नागरकोइल-बेंगलूरू एक्सप्रेस : साप्ताहिक :18. कानपुर-चित्रकूट एक्सप्रेस : दैनिक :19. न्यू जल्पाईगुडी-चेन्नई एक्सप्रेस : साप्ताहिक :20. दिल्ली सराय रोहिल्ला-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :21. मंगलौर-तिरूचिरापल्ली एक्सप्रेस : साप्ताहिक :22. भुवनेश्वर-पुणे एक्सप्रेस : साप्ताहिक :23. हबीबगंज-जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस : दैनिक :24. कालीकट-तिरूवनंतपुरम जन शताब्दी एक्सप्रेस : सप्ताह में पांच दिन :25. पुणे-एर्णाकुलम सुपरफास्ट : सप्ताह में दो दिन :26. कोयंबटूर-तिरूपति इंटरसिटी : सप्ताह में तीन दिन :27. शिमोगा-मैसूर इंटरसिटी : दैनिक :28. बेंगलूरू-तिरूपति इंटरसिटी : तीन दिन :29. छत्रपति शाहूजी महाराज टर्मिनस-शोलापुर एक्सप्रेस : दैनिक :30. जयपुर-पुणे एक्सप्रेस : साप्ताहिक :31. रांची-जयनगर एक्सप्रेस : सप्ताह में तीन दिन :32. मदुरै-तिरूपति एक्सप्रेस : दो दिन :33. तिरूपति-सिकंदराबाद एक्सप्रेस : दो दिन :34. संबलपुर-हावड़ा एक्सप्रेस : साप्ताहिक :35. अहमदाबाद-आगरा एक्सप्रेस : तीन दिन :36. गोंडा-मडुवाडीह इंटरसिटी : दैनिक :37. बंगलोर-हुबली हम्पी एक्सप्रेस और बंगलोर-नांदेड एक्सप्रेस लिंक की बजाय स्वतंत्र रूप से चलेंगी।38. हरिप्रिया और रायलसीमा एक्सप्रेस लिंक की बजाय स्वतंत्र ट्रेनों के रूप में चलेंगी।39. सिकंदराबाद-मनुगुरू एक्सप्रेस : तीन दिन :40. अलीपुरदुआर-लमडिंग इंटरसिटी : दैनिक :41. गुवाहाटी-मरियानी इंटरसिटी : दैनिक :42. गांधीधाम-जोधपुर एक्सप्रेस : तीन दिन :43. राजकोट-पोरबंदर एक्सप्रेस : तीन दिन :44. कोलकाता-दरभंगा एक्सप्रेस : दो दिन :45. हावडा-बेहरामपुर एक्सप्रेस : तीन दिन :46. बारीपाडा-शालीमार एक्सप्रेस : तीन दिन :47. खड़गपुर-पुरूलिया इंटरसिटी : तीन दिन :48. ग्वालियर-छिंदवाड़ा एक्सप्रेस : दो दिन :49. रामपुर हाट-सियालदह इंटरसिटी : तीन दिन :50. हावड़ा-शिरडी एक्सप्रेस : साप्ताहिक :52. पुरी-वलसाड एक्सप्रेस : एक दिन :53. पुरी-दीघा एक्सप्रेस : एक दिन :
रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आरपीएफ में होगा परिवर्तन। समर्पित यात्री कारिडार भी बनाए जाएंगे। मितव्ययिता के प्रयासों से 2,000 करोड़ रुपये की बचत की।
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