Wednesday, March 14, 2012

रेल बजट में किराए में वृद्धि


रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने वित्ता वर्ष 2012-13 के रेल बजट में किराए में वृद्धि की घोषणा की है। उन्होंने स्लीपर से लेकर एसी गाड़ियों में पांच से तीस पैसे प्रति किलोमीटर तक किराए में वृद्धि की घोषणा की है। कुल मिलाकर यह वृद्धि पांच रुपये तक होगी। रेलवे ने करीब नौ साल के बाद पहली बार यह वृद्धि की गई है।

रेल बजट पेश करते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय रेल अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। उन्होंने अपने बजट भाषण में लगातार बढ़ रहे रेलवे के घाटे और बढ़ रही घटनाओं पर भी अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में भारतीय रेल सुरक्षा को प्राथमिकता देगी।

त्रिवेदी ने कहा कि उनका पूरा ध्यान सुरक्षा पर है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में रेल दुर्घटना की पृष्ठभूमि में पद संभालने के कुछ ही समय बाद यह निर्णय लिया गया था। अपने राजनीतिक जीवन का पहला रेल बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वह रेल यात्रा को दुर्घटना रहित बनाना चाहते हैं। परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व प्रमुख अनिल काकोदकर अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह की अनुशंसा पर मैं एक स्वतंत्र रेल सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव किया है।

भारतीय रेल 64,000 किमी मार्ग के साथ विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। इस नेटवर्क पर प्रतिदिन 12,000 यात्री रेलगाड़ी एवं 7,000 मालगाड़ियां क्रमश: 230 लाख यात्रियों एवं 26.5 लाख टन सामान की ढुलाई करती है। रेलवे को वर्ष 2012-13 में रेलवे यात्री किराए से 36 हजार करोड़ रुपये आय होने की उम्मीद है।

रेल बजट 2012-13

- एसी थ्री के किराए में दस पैसे, टू टायर में पंद्रह पैसे, एसी फ‌र्स्ट में तीस पैसे और स्लीपर में पांच पैसे की वृद्धि की गई है।

- रेलवे 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि [2012-17] में 7.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी। पिछली योजना अवधि में रेलवे ने 1.92 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।

- 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में ढांचागत संरचना पर होने वाले अनुमानित 20 लाख करोड़ रुपये के खर्च का 10 फीसदी हिस्सा रेलवे को हासिल करना होगा।

- रेलवे को 12वीं योजना अवधि में 2.5 लाख करोड़ रुपये के कुल बजटीय सहायता की उम्मीद।

- आधुनिकीकरण के लिए धन जुटाने संबंधी तंत्र बनाने की सामूहिक चुनौती।

- रेलवे को सकल घरेलू उत्पादन में दो फीसदी योगदान करना होगा जो अभी एक फीसदी है।

- सुरक्षा पर ध्यान। विश्व की सबसे सुरक्षित नेटवर्को में शामिल करने का लक्ष्य।

- दुर्घटना को 0.55 से घटाकर 0.17 पर लाने का लक्ष्य हासिल।

- सुरक्षा मानकों के लिए एक विशेष संगठन की स्थापना।

- स्वायत्ता रेलवे सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना।

- आधुनिकीकरण के लिए 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत

- वर्ष 2012-13 के लिए 60,100 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान, जो अब तक का सर्वाधिक है।

- रेलवे को 10 सालों में आधुनिकीकरण के लिए 14 लाख करोड़ रुपये की जरूरत

- संचालन अनुपात को 90 फीसदी से घटाकर 2012-13 में 84.9 फीसदी करने तथा 2016-17 तक 72 फीसदी पर लाने का लक्ष्य।

- रक्षा नीति और विदेश नीति की तरह राष्ट्रीय रेल नीति बनाने का समय आ चुका है।

- हर साल दस खिलाडियों को रेल खेल रत्न पुरस्कार दिए जाएंगे

- 2012-13 के दौरान रेलवे में एक लाख नई भर्तिया

- रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन किया जाएगा।

- रेलवे बोर्ड में दो नए सदस्य नियुक्त किए जाएंगे

- 2012-13 में 21 नई ट्रेनें चलाई जाएंगी।

- सिख तीर्थस्थलों अमृतसर, पटना साहिब और नादेड को जोडने वाली विशेष गुरू परिक्रमा ट्रेन।

- मुंबई में 75 नई उपनगरीय ट्रेनें।

- 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान हेरिटेज रेल लाइनों को छोडकर बाकी सभी मीटर गेज और नैरो गेज लाइनों को ब्राड गेज में तब्दील कर दिया जाएगा।

- भारतीय रेल को नेपाल और बाग्लादेश से जोडा जाएगा।

- सभी गरीब रथ ट्रेनों में विकलागों के लिए एक विशेष वातानुकूलित कोच।

- अगले साल 2500 कोचों में लगेंगे ग्रीन टायलेट

- 75 नई एक्सप्रेस और सवारी गाडिया अगले वित्त वर्ष के दौरान चलाई जाएंगी।

Sunday, February 19, 2012

मतदान महज औपचारिकता नहीं


मताधिकार को छोड़कर शायद ही ऐसा कोई ऐसा अधिकार हो जिसके लिए जागरूकता अभियान चलाना पड़ता हो। चुनाव के वक्त महज रस्म अदायगी के लिए वोट न डालें, प्रत्याशी को जांचे-परखें तब उसे अपना मत दें।
अधिकतर वोटर जाति-पांति के नाम पर वोट देने की रस्म अदायगी करते हैं। उन्हें इस चीज से कोई मतलब नहीं होता कि जिसे वह चुने रहे हैं वह कैसा व्यक्ति है। राजनीति और विकास के नारे का संबंध पुराना और परंपरागत है। यह बात अलग है कि इस नारे के साथ राजनीति तो आगे बढ़ती गयी, लेकिन विकास पीछे ही छूट गया। क्षेत्र के विकास के सवाल पर अब जनता अचंभित नजर नहीं आती, लेकिन यह बात उसे जरूर हैरान कर रही है कि विकास के लिए उनके वोटों पर जीतकर सदन पहुंचे माननीय की ही उपेक्षा करते हैं।
लोकतंत्र की बेहतरी के लिए चुनाव के दौरान नियम-कानूनों को और भी सख्त किया जाना चाहिए ताकि राजनीति में गलत लोगों का प्रवेश बिल्कुल न होने पाये और घोटाले दर घोटाले और भ्रष्टाचार में जनता की गाढ़ी कमाई को लुटने से बचाया जा सके। जरूरत इसकी है, समय-समय पर नेताओं की अर्जित संपत्ति, इसके स्रोतों की जांच की जाये।
चुनाव के वक्त नेताओं के दाखिल हलफनामे के सत्यापन के बाद उनकी संपत्ति और उसके स्रोतों का ब्योरा जनता के सामने रखा जाना चाहिए। इससे चुनाव मैदान में खड़े नेता के सही चेहरे और चरित्र से जनता वाकिफ हो सकेगी।
किसी प्रत्याशी को इसलिए वोट नहीं देना चाहिए कि उसकी फिजा है और वह जीत रहा है। हमें अपने वोट की कीमत समझनी होगी। मताधिकार का प्रयोग करते हुए ऐसे प्रत्याशी को चुनना होगा जो कि सच्चा हो और क्षेत्र के लिए कुछ करे न कि खुद के लिए।
धर्म और जाति के बजाए देश हित को ध्यान में रखकर मतदान करना चाहिए। खासतौर से युवा वर्ग को अपने वोट का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए।
देश का सम्मान इसी में हैं कि हम सही व्यक्ति को चुनें। वोट देकर हमे अपनी आजादी का अहसास करना चाहिए।
देश में रोज एक नई पार्टी बन रही है। जोड़-तोड़ की राजनीति ने देश का विनाश कर दिया है। देश में दलों की संख्या सीमित कर देनी चाहिए। दर्जनों दलों की जगह एक मजबूत बड़ा दल बने जो देश को टिकाऊ सरकार दे सके।
चुनाव के दौरान मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। वो प्रत्याशियों की सच्चाई जनता तक पहुंचाए। चुनाव जीतने के बाद भी नेताओं को इसी तरह जनता से मिलना चाहिए।

Saturday, February 4, 2012

यूपी विधानसभा चुनाव: पहले चरण का प्रचार चरम पर


उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनाव प्रचार के लिए महज 48 घंटे बचे हैं, ऐसे में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के साथ चुनाव प्रचार चरम पर पहुंचता जा रहा है। पहले चरण में 55 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आठ फरवरी को मतदान होंगे। शनिवार को सभी दलों के प्रमुख नेताओं के तूफानी दौरे जारी रहे।

वाराणसी में चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ''हम चोरों की सरकार और गुंडों की सरकार से समझौता नहीं करने वाले हैं, चाहे कुछ भी हो जाए। चाहे कांग्रेस पार्टी हारे या जीते, हम समझौता केवल उत्तर प्रदेश की जनता से करेंगे।'' राहुल ने सिद्धार्थनगर जिले में भी जनसभा की।

कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचीं प्रियंका वाड्रा ने दूसरे दिन शनिवार को मायावती सरकार पर आक्षेप किया कि कांग्रेस-नीत केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के विकास के लिए भेजा गया पैसा जनता तक न पहुंचकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

दूसरी ओर, प्रदेश की बदहाली के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए बसपा की अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने चुनाव प्रचार के चौथे दिन शनिवार को कहा कि 40 साल उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहने पर जब कांग्रेस ने विकास नहीं किया तो पांच साल में क्या करेगी।

पूर्वाचल क्षेत्र के महाराजगंज और बस्ती में चुनावी जनसभाओं को सम्बोधित करते हुए मायावती ने कहा, ''उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा समय 40 साल तक कांग्रेस ने राज किया। उसी की गलत नीतियों के कारण प्रदेश में गरीबी व बेरोजगारी बढ़ी और लोग दूसरे राज्यों में पलायन के लिए मजबूर हुए।''

उधर, देविरया और अयोध्या में चुनाव प्रचार करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पहले ही दिन राम मंदिर मुद्दे को हवा देते हुए कहा कि उन्हें तब तक चैन नहीं मिलेगा जब तक अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने लखनऊ में कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश की जनता को पार्टी के 2 साल पुराने शासन की याद दिला रहे हैं, जबकि जनता इसे बुरा सपना मानती है। भाजपा नेता अरुण जेटली और मुख्तार अब्बास नकवी ने रामपुर में जनसभा की।

वहीं, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बांदा और चित्रकूट में जनसभाएं कीं। बांदा में उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में सपा की सरकार आई तो गुंडागर्दी करने वाले सभी लोग सलाखों के पीछे होंगे चाहे वे सपा कार्यकर्ता ही क्यों न हों।

सपा नेता शिवपाल यादव ने बलरामपुर बस्ती, प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोनभद्र में जनसभाओं को सम्बोधित किया।

राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) प्रमुख व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह ने फैजाबाद में जनसभाएं कीं तो कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गोंडा और सीतापुर, राज बब्बर ने गोंडा और उन्नाव, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बस्ती और सिद्धार्थनगर में जनसभाएं कीं।

उधर पांचवें चरण में 49 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का काम आज समाप्त हो गया।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: चिदंबरम और सरकार को फौरी राहत


कोर्ट ने कहा :
-ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि चिदंबरम ने लाइसेंस के आवंटन में कोई आर्थिक फायदा लिया हो।
-याचिकाकर्ता के किसी दस्तावेज से यह साबित नहीं हो पाया कि चिदंबरम ने राजा के साथ मिलकर स्पेक्ट्रम का आवंटन किया है और दोनों ने मिलकर आर्थिक लाभ लिया है।
-चिदंबरम ने लोक सेवक होने के नाते जो फैसले लिए उसमें कहीं से भी आपराधिक षड़यंत्र की जानकारी नहीं मिलती।
गृह मंत्री पी चिदंबरम और सरकार को दिल्ली की निचली अदालत से फौरी राहत मिल गई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें बहुचर्चित ख्जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सह आरोपी बनाने से इंकार करते हुए जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी। खचाखच भरी कोर्ट में विशेष न्यायाधीश ओपी. सैनी ने दोपहर 1.35 बजे आदेश सुनाया। कोर्ट ने 64 पन्नों के आदेश में माना है कि प्रथम दृष्टया पी. चिदंबरम के खिलाफ ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित होता हो कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उनकी कोई भूमिका रही है। स्वामी ने फैसले के तुरंत बाद कहा कि वह इस निर्णय से हैरान हैं। लेकिन विचलित नहीं। विशेष कोर्ट के फैसले को वह दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।
विशेष कोर्ट मे पहले दस बजे फैसला सुनाया जाना था लेकिन कोर्ट ने फैसले का समय बढ़ाकर 12.30 बजे कर दिया। ठीक 12.30 स्वामी अपनी वकील पत्नी रोक्साना के साथ पहुंचे लेकिन कोर्ट रूम में सिर्फ स्वामी और उनकी पत्‍‌नी को ही अंदर बुलाया गया। इसके बाद विशेष अदालत के जज 1: 35 बजे आए और बैठते ही बोले 'पिटीशन डिसमिस्ड'। बस इतना सुनते ही स्वामी कुछ देर के लिए शांत खड़े रहे। फिर अंदर पहुंची मीडियाकर्मियों की भीड़ के साथ वह भी कोर्ट रूम से बाहर आ गए।
विशेष जज ओपी सैनी ने अपने फैसले में कहा कहा कि याचिकाकर्ता ने चिदंबरम पर दो आरोप लगाए हैं। पहला चिदंबरम ने 2001 के मूल्य पर स्पेक्ट्रम आवंटन की बात कही थी और दूसरा स्वॉन टेलीकॉम और यूनिटेक को इक्विटी बेचने को कहा था, लेकिन इस बारे में ऐसा कोई सुबूत रिकार्ड पर नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि इन दोनों ही कार्य के लिए चिदंबरम ने कहीं से भी आर्थिक फायदा लिया हो।
कोर्ट ने कहा कि 31 अक्टूबर 2003 में कैबिनेट की जो बैठक स्पेक्ट्रम आवंटन और मूल्य निर्धारण करने के लिए हुई थी उसके बाद वित्त मंत्री ने निर्णय लेते हुए ए.राजा से सन 2001 के मूल्य के आधार पर स्पेक्ट्रम लाइसेंस की बिक्री करने को कहा था। लेकिन इसके बाद से तत्कालीन दूर संचार मंत्री राजा, इस बारे में बात करने के लिए दोबारा तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के पास नहीं गए। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में जो शामिल थे उन पर सीबीआइ द्वारा सुबूतों के आधार पर विशेष कोर्ट में पहले से ही मुकदमा चल रहा है। अदालतन ने कहा कि चिदंबरम के लोक सेवक होने के नाते उन्होंने जो फैसले लिए उसमें कहीं से भी आपराधिक षड़यंत्र का आभास नहीं होता है और न ही इससे चिदंबरम की किसी भी मामले में कोई बदनियती नजर आती है।
किसी भी दस्तावेजों से कोर्ट को यह नहीं पता चला कि राजा के साथ मिलकर चिदंबरम ने खुद को आर्थिक फायदा पहुंचाया हो या अपने किसी परिचित और जानकार को।

Sunday, January 29, 2012

अन्ना के इलाज में राजनीतिक साजिश


क्या बाबा रामदेव का यह आरोप सही है कि अन्ना हजारे के इलाज के दौरान कोई गंभीर राजनीतिक साजिश हुई? रविवार को हुई अन्ना की डॉक्टरी जांच इलाज में गड़बड़ी के सवाल को और गहरा देती है। डॉक्टरों के नए पैनल के मुताबिक खतरनाक और गैर जरूरी दवाओं के कुप्रभाव की वजह से उनके शरीर में कई जगह सूजन है। शरीर में कई जगह पानी भर गया है और रक्तचाप खतरनाक स्तर पर है। अन्ना के करीबी अरविंद केजरीवाल ने भी पहली बार उनके पिछले इलाज पर अंगुली उठा दी है। पुणे के संचेती अस्पताल के प्रमुख और अभी 26 जनवरी को सर्वोच्च पद्म पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजे गए केएच संचेती का कहना है कि इलाज में न तो कोई गड़बड़ी हुई है और न ही उन पर कोई राजनीतिक दबाव है।

गुड़गांव स्थित वेदांता मेडिसिटी अस्पताल के डॉक्टरों के पैनल ने रविवार को अन्ना की जांच के बाद पाया कि उन्हें उच्च रक्त चाप [170-110] है, पूरे शरीर में और खास कर पेट, पैर और चेहरे में काफी सूजन है। उनका दम फूल रहा है, पैर और पेट में भारी जलन है और शरीर के विभिन्न भाग में पानी जमा है। अधिकांश प्रभाव विभिन्न दवाओं की वजह से हैं।

क्या इसमें कोई साजिश है, यह पूछने पर अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल कहते हैं, 'मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि अन्ना पुणे के अस्पताल से ज्यादा बीमार होकर लौटे हैं।' अन्ना के एक अन्य सहयोगी कहते हैं कि जिस तरह पुणे के डॉक्टरों ने पहले ही दिन से यह कहना शुरू कर दिया था कि अन्ना को एक महीने के आराम की जरूरत है और अब उन्हें सरकार बदले में इनाम दे रही है। उसे देखते हुए इस पूरे मामले की गंभीर जांच होनी चाहिए। एक दिन पहले बाबा रामदेव अन्ना के इलाज में सरकार की राजनीतिक साजिश का आरोप खुलकर लगा ही चुके हैं।

गुड़गांव के डॉक्टरों के मुताबिक अन्ना को पुणे में तीन-तीन इंट्रावीनस [नसों के जरिए दी जाने वाली] एंटीबायटिक दी गई, जिसे बहुत आपात स्थिति में ही इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से उन्हें लंबे समय के लिए एसीडीटी हो गई है। बिना जरूरत के उन्हें स्टेराएड और बहुत ज्यादा पेन किलर दिए गए, जिसकी वजह से शरीर में सूजन हो गई और कई जगह पानी भर गया।

संचेती ने इस अखबार से बातचीत में कहा कि अन्ना के इलाज में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और न ही उनको पद्म विभूषण दिए जाने का इससे कोई वास्ता है। उनके अस्पताल में गलत इलाज होने के आरोप के बारे में वे कहते हैं, 'पहली बात तो अन्ना प्राथमिक तौर पर डॉक्टर महेंद्र कावेरिया की निगरानी में थे, जो चेस्ट फिजीशियन हैं। मैं सिर्फ उनकी पीठ दर्द का इलाज कर रहा था। दूसरा, वे जब अस्पताल आए थे, तभी साफ कर दिया गया था कि उनको ठीक होने में एक माह का समय लगेगा।'

शरीर में सूजन और पानी भर जाने के बारे में वे कहते हैं कि उनके डॉक्टरों ने जब आखिरी बार उनकी जांच की थी, तब तक ऐसा कोई असर नहीं दिखा था। एंटी बायटिक और स्टेराएड की खुराक को भी वे जरूरी बताते हैं। साथ ही वे कहते हैं कि यह सारी दवाएं उन्हें चेस्ट फिजीशियन ने लिखी थी। संचेती के मुताबिक उन्होंने अन्ना के इलाज के बारे में कभी किसी बाहरी व्यक्ति से कोई चर्चा तक नहीं की है। पद्म पुरस्कार के लिए उनका नाम विख्यात समाजवादी नेता मोहन धारिया जी ने चार महीने पहले किया था।

Thursday, January 26, 2012

प्रहार और प्रतिरोधक क्षमता का नायाब नजारा


राजपथ ने 63वें गणतंत्र दिवस पर सशस्त्र सेनाओं के शौर्य, क्षमता और मुल्क की सांस्कृतिक संपदा का झरोखा खोल दिया। गणतंत्र दिवस परेड में नजर आई अग्नि-4 मिसाइल और प्रहार प्रक्षेपास्त्रों ने सैन्य प्रहार शक्ति की बानगी पेश की तो मानवरहित टोही विमान रुस्तम, बारूदी सुरंगों को उखाड़ फेंकने वाले टी-72 टैंक व एक साथ अनेक फ्रीक्वेंसियों को जाम कर देने वाले जैमर स्टेशन ने प्रतिरोधक क्षमता का नमूना दिखाया।

राजधानी में बुधवार सुबह गणतंत्र दिवस समारोह का आगाज 20 अगस्त, 2011 को देश के लिए जान न्योछावर करने वाले सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह को अशोक चक्र प्रदान करने के साथ हुआ। मरणोपरांत अपने बेटे के लिए शांतिकाल का सर्वोच्च बहादुरी पदक पिता जोगिंदर सिंह ने जब राष्ट्रपति से हासिल किया तो उनका सीना फख्र से चौड़ा था, लेकिन शहीद नवदीप की मां की आंखें नम।

दिल्ली क्षेत्र के लेफ्टिनेंट जनरल अफसर वीके पिल्लै की अगुआई में शुरू हुई परेड में दो परमवीर चक्र प्राप्त योद्धाओं और सात अशोक चक्र विजेताओं ने भी राष्ट्रपति को सलामी दी। भारत के गणतंत्र बनने की 62वीं सालगिरह के मौके पर परेड की सलामी तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने ली। सैन्य क्षमता और सांस्कृतिक विविधता को समेटती इस परेड की मुख्य अतिथि थीं थाइलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री एके एंटनी समेत सभी केंद्रीय मंत्री, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और आला सैन्य व असैन्य अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में आए स्कूली बच्चे व नागरिक परेड के साक्षी बने।

सर्द सुबह तीनों सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के 20 मार्चिग दस्तों से लेकर अपनी गर्जना से दहलाने वाले वायुसेना के विमानों ने धरती और आसमान पर भारत की उभरती ताकत के दस्तखत उकेरे। पैरों को थिरकाने वाली संगीत धुनों पर आई सांस्कृतिक टोलियों ने उभरते भारत की नई तस्वीर खींची। परेड में इस बार बीते दिनों अमेरिका से खरीदे गए तीन सी-130जे बहुउद्देश्यीय विमान भी शामिल थे। यह पहला मौका था जब गणतंत्र दिवस परेड में मेड-इन-अमेरिका विमान ने भारतीय परचम लहराया। पहली बार नाभिकीय हथियारों के साथ तीन हजार किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-4 मिसाइल का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] ने 150 किमी तक मार करने वाले 'प्रहार' प्रक्षेपास्त्र का प्रदर्शन किया।

सैन्य प्रहार क्षमता की नुमाइश की कड़ी में सेना ने 37.5 किमी मारक क्षमता वाली पिनाक बहुनलीय प्रक्षेपास्त्र लांचर प्रणाली और 40 सेकेंड में 12 रॉकेट दागने वाली रूस से आयातित स्मर्च प्रक्षेपास्त्र प्रणाली राजपथ पर उतारा। नौसेना ने सुरक्षित समुद्र और महफूज तट के अपने लक्ष्य को सिद्ध करने के लिए झांकी की शक्ल में लंबी दूरी की निगरानी में सक्षम आइएल-38 और मानवरहित टोही विमान को दिखाया। वायुसेना के 27 विमानों और तीन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के शानदार फ्लाइपास्ट के नजारे ने भरोसा दोहराया कि भारतीय आसमान के निगहबानों के पास ताकत भी है और काबिलियत भी।

Wednesday, February 2, 2011

1810 में उतार लिया गया था ताज का स्वर्ण कलश

ताजमहल के शिखर पर लगा स्वर्ण कलश ठीक दो सौ वर्ष पूर्व 1810 में उतारा गया था। ठीक दो सदी पहले की यह घटना अपने समय का सबसे चर्चित और ऐसा वाकया थी जिसे अंग्रेज पूरी तरह गुपचुप रखना चाहते थे। बाद में 1811 में इस कलश की जगह तांबे का कलश लगवाया गया जिस पर सोने का पानी चढ़ा था।
हटाए गए सोने का कलश चालीस हजार तोले यानि लगभग चार सौ किलो सोने का था। यह कलश तीस फुट छह इंच ऊंचा था। इसके हटाए जाने का मुख्य कारण ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने के लिए धन जुटाया जाना था। हालांकि ईस्ट इंडियाकंपनी के रिकार्ड में इस आय का कोई साक्ष्य नहीं मिलता।
उतारे गए स्वर्ण कलश का सोना लुट गया। स्वर्ण कलश को हटाये जाने के बाद लगाये गये कलश को अब तक 1876 और 1940 में दो बार और बदला गया। इस प्रकार वर्तमान में ताजमहल के गुंबद पर लगा हुआ कलश बदले जाने के क्रम में चौथा है। जो भी कलश ताजमहल की शोभा बना वह मूल कलश की ही प्रतिकृति है।
कलश की ऊंचाई और आकार के बारे में अक्सर होने वाली पूछताछ के चलते 1888 में ताजमहल के बायीं ओर बने मेहमान खाने के चबूतरे पर काला पत्थर इस्तेमाल कर मूल कलश की अनुकृति बनवा दी गई जो अब भी मौजूद है।
मूल गुंबद से कलश उतरवाने का कार्य आर्थिक लोभ से जरूर किया गया किंतु ईस्ट इंडिया कंपनी के खजाने को इससे कोई लाभ नहीं हुआ। यह बात लोगों से गुंबद की मरम्मत के नाम पर छुपाई गई। राजे के मुताबिक दो सौ साल पहले सोने के कलश को उतरवाने का काम जहां कंपनी सेना में कार्यरत जोजेफ नाम के अधिकारी ने किया था वहीं इसकी काले पत्थर की अनुकृति आगरा के कलाकार नाथू राम ने बनाई।